मुंबई के कुर्ला में भूस्खलन: 4 की मौत, महापौर ने ₹4 लाख मुआवजे का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई के कुर्ला (पश्चिम) स्थित अशोक नगर, टेकड़ी क्रमांक 3 पर 12 अगस्त 2026 की सुबह अचानक हुए भूस्खलन में पहाड़ी ढलान से मिट्टी और मलबा दो से तीन चॉल घरों पर आ गिरा, जिससे 4 लोगों की मौत की पुष्टि मुंबई पुलिस ने की है। कई अन्य लोग अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका है और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है।
मुख्य घटनाक्रम
प्रत्यक्षदर्शी सचिन कांबले ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही वे दोस्तों के साथ मौके पर पहुँचे और मलबे में लगभग 10 लोगों को फँसा पाया। स्थानीय लोगों की मदद से 4 लोगों को तत्काल बाहर निकाला गया — जिनमें से 2 की मौके पर ही मौत हो चुकी थी और 2 घायल थे। घायलों को राजावाड़ी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अब तक दो मृतकों की पहचान हो चुकी है — साहिल अंसारी (28 वर्ष) और मोहम्मद समीर (14 वर्ष)। घायलों में सोहेल अंसारी (18 वर्ष) और मोहम्मद अंसारी (14 वर्ष) का इलाज जारी है।
बचाव कार्य की स्थिति
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अनुसार, दुर्घटनास्थल तक पहुँचने का रास्ता इतना संकरा है कि एक समय में केवल एक व्यक्ति ही वहाँ जा सकता है, जिससे बचाव कार्य में बाधा आ रही है। मौके पर BMC अधिकारी, मुंबई अग्निशमन दल, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), मुंबई पुलिस और एंबुलेंस सेवाएँ तैनात हैं। प्रशासन पूरी स्थिति पर बारीकी से नज़र बनाए हुए है।
सरकार की प्रतिक्रिया
घटना की सूचना मिलते ही मुंबई महापौर रितू तावडे ने घटनास्थल का दौरा किया और बचाव कार्य का सीधे निरीक्षण किया। उन्होंने सभी एजेंसियों को बेहतर समन्वय के साथ राहत कार्य तेज़ करने के निर्देश दिए। इस दौरान प्रभाग समिति अध्यक्ष विजयेंद्र शिंदे, अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (पूर्व उपनगर) डॉ. अविनाश ढाकणे और एल विभाग के सहायक आयुक्त (प्रभारी) अनिल जाधव भी उपस्थित रहे।
मुआवजे की घोषणा
महापौर रितू तावडे ने पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को ₹4 लाख की तात्कालिक सहायता और घायल प्रत्येक व्यक्ति को चिकित्सा उपचार के लिए ₹50,000 की सहायता दी जाएगी।
आम जनता पर असर
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मुंबई में मानसून का मौसम चरम पर है और शहर के कई पहाड़ी इलाकों में अनधिकृत बस्तियाँ बसी हुई हैं। गौरतलब है कि कुर्ला और उसके आसपास के इलाकों में पहाड़ी ढलानों पर बनी चॉलें हर साल भूस्खलन के खतरे में रहती हैं। मलबे में अभी भी लोगों के फँसे होने की आशंका के बीच बचाव अभियान जारी रहेगा।