भिवंडी इमारत हादसा: मालिक बिलाल अहमद और कॉन्ट्रैक्टर अशोक पर FIR, मृतक संख्या 10 हुई
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के भिवंडी के बालाजी नगर इलाके में गिरी चार मंजिला इमारत के मालिक बिलाल अहमद अबू बकर खान और मरम्मत कार्य से जुड़े कॉन्ट्रैक्टर अशोक के खिलाफ 1 अगस्त को औपचारिक मामला दर्ज किया गया। बचाव अभियान के पूर्ण होने तक इस हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है।
हादसे का घटनाक्रम
यह दुर्घटना गुरुवार की देर रात लगभग 11:30 बजे घटी, जब मरम्मत कार्य के दौरान बालाजी नगर की यह इमारत अचानक ढह गई। इमारत में 48 कमरे थे — प्रत्येक मंजिल पर 12 कमरे। बताया जा रहा है कि उस समय पिलर की मरम्मत का काम जारी था, जिसके चलते संरचना और कमज़ोर हो गई और देखते-देखते पूरी इमारत मलबे में तब्दील हो गई।
इमारत गिरने के बाद निवासियों में भगदड़ मच गई। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) सहित कई आपातकालीन एजेंसियों ने बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया। NDRF के अनुसार, मलबे से एक के बाद एक शव निकाले जाने के बाद मृतक संख्या 9 से बढ़कर 10 हो गई।
कानूनी कार्रवाई
अधिकारियों के मुताबिक, इमारत मालिक बिलाल अहमद अबू बकर खान ने बिना आवश्यक अनुमति के यह निर्माण कराया था। कॉन्ट्रैक्टर अशोक पिलर की मरम्मत का कार्य संभाल रहा था। यह शिकायत भिवंडी-निजामपुर नगर निगम के प्रभारी फैसल अब्दुल कय्यूम तातली ने दर्ज कराई। गौरतलब है कि नगर निगम ने इस इमारत को पहले ही असुरक्षित और खतरनाक घोषित कर दिया था, इसके बावजूद लोग वहाँ रह रहे थे।
प्रधानमंत्री की संवेदनाएँ और राहत राशि
शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र के ठाणे में इमारत गिरने से हुई मौतों के बारे में सुनकर बहुत दुख हुआ। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। घायल जल्द से जल्द ठीक हों।"
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से प्रत्येक मृतक के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की अनुग्रह राशि दी जाएगी।
आम जनता पर असर और व्यापक संदर्भ
यह हादसा भिवंडी में अनधिकृत और जर्जर इमारतों की बड़ी समस्या को एक बार फिर उजागर करता है। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र के कई शहरी क्षेत्रों में पुरानी और बिना अनुमति बनी इमारतों में रहने वाले हज़ारों परिवार जोखिम में हैं। आलोचकों का कहना है कि नगर निकाय द्वारा इमारत को खतरनाक घोषित किए जाने के बावजूद निवासियों को वहाँ से न हटाना प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करता है।
आगे क्या
पुलिस दोनों आरोपियों — मालिक और कॉन्ट्रैक्टर — के खिलाफ जाँच जारी रखे हुए है। मलबे में अभी भी और लोगों के दबे होने की आशंका को देखते हुए बचाव दल सतर्क हैं। प्रशासन से यह भी अपेक्षा है कि वह भिवंडी की अन्य जर्जर इमारतों का सर्वेक्षण कर उचित कार्रवाई करे।