29 जुलाई 2026
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जेपी नड्डा का केरल को बड़ा स्वास्थ्य पैकेज, एम्स और 100 एमबीबीएस सीटों की सैद्धांतिक मंजूरी

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जेपी नड्डा का केरल को बड़ा स्वास्थ्य पैकेज, एम्स और 100 एमबीबीएस सीटों की सैद्धांतिक मंजूरी

सारांश

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने केरल को एम्स, 100 एमबीबीएस सीटें, देश का पहला जेनेटिक इंस्टीट्यूट और एचपीवी वैक्सीन सहित कई बड़े स्वास्थ्य आश्वासन दिए — लेकिन असली परीक्षा इन वादों के ज़मीनी क्रियान्वयन में होगी।

मुख्य बातें

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 28 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में केरल के स्वास्थ्य मंत्री के.
मुरलीधरन के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की।
करुणाकरण मेमोरियल गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में अगले शैक्षणिक वर्ष से 100 एमबीबीएस सीटें शुरू करने की सैद्धांतिक मंजूरी दी गई।
केरल में एम्स स्थापित करने की केंद्र की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
नड्डा ने केरल से भारत का पहला जेनेटिक इंस्टीट्यूट स्थापित करने का प्रस्ताव भेजने को कहा।
एमबीबीएस दाखिलों में एक दशक की देरी को नड्डा ने 'आपराधिक लापरवाही' बताया; अनुमान है कि लगभग 1,100 छात्र इससे वंचित रहे।
लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन , तीन मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों के उन्नयन और स्टेट वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट के लिए बढ़ी केंद्रीय सहायता का भी वादा किया गया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 28 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में केरल को कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा आश्वासन दिए। इनमें तिरुवनंतपुरम के के. करुणाकरण मेमोरियल गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में अगले शैक्षणिक वर्ष से 100 एमबीबीएस सीटें शुरू करने की सैद्धांतिक मंजूरी और केरल में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) स्थापित करने की केंद्र की प्रतिबद्धता को दोहराना प्रमुख रूप से शामिल है।

मुख्य घोषणाएँ और आश्वासन

केरल के स्वास्थ्य मंत्री मुरलीधरन के अनुसार, नड्डा ने के. करुणाकरण मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस दाखिले में हुई लंबी देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि करीब एक दशक पहले करोड़ों रुपये की लागत से इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो जाने के बावजूद दाखिले नहीं हो सके — इस देरी को उन्होंने 'आपराधिक लापरवाही' करार दिया। उनका अनुमान है कि समय पर दाखिले शुरू हुए होते तो लगभग 1,100 छात्र मेडिकल शिक्षा का लाभ उठा चुके होते।

नड्डा ने केरल से भारत का पहला जेनेटिक इंस्टीट्यूट राज्य में स्थापित करने का प्रस्ताव केंद्र को भेजने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने जिला अस्पतालों को सुदृढ़ करते हुए प्रत्येक जिले में ट्रॉमा केयर सेंटर खोलने में केंद्रीय सहायता का वादा किया।

बीमा, मानसिक स्वास्थ्य और टीकाकरण

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने केंद्र की स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत केरल में बीमा कवरेज विस्तार के राज्य के अनुरोध को सैद्धांतिक मंजूरी दी। राज्य के तीन मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों को अपग्रेड करने में भी केंद्रीय सहयोग का भरोसा दिलाया गया। इसके अलावा नड्डा ने लड़कियों को ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) वैक्सीन उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय सहायता देने की बात कही।

यह ऐसे समय में आया है जब केरल ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत मौजूदा फंड की कमी की ओर केंद्र का ध्यान दिलाया था। नड्डा ने संकेत दिया कि एनएचएम के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।

दवाओं की उपलब्धता और वायरोलॉजी संस्थान

केरल के प्रतिनिधिमंडल ने गैर-संचारी रोगों की दवाओं, विशेष कैंसर उपचारों और उन दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में केंद्रीय सहयोग माँगा जो अभी भारत में सुलभ नहीं हैं। नड्डा ने भरोसा दिलाया कि इन मामलों की जाँच कर उचित कदम उठाए जाएंगे।

गौरतलब है कि नड्डा ने सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी में केरल की सक्रिय भूमिका को स्वीकार करते हुए स्टेट वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट के लिए केंद्रीय सहायता बढ़ाने पर सहमति जताई — यह संस्थान निपाह जैसे संक्रमणों की निगरानी में अहम भूमिका निभाता रहा है।

बैठक का माहौल और आगे की राह

केरल के स्वास्थ्य मंत्री मुरलीधरन ने बैठक को सौहार्दपूर्ण बताया और कहा कि केंद्रीय मंत्री ने राज्य की माँगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। नड्डा ने केरल की स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली की सराहना भी की। इन आश्वासनों के औपचारिक क्रियान्वयन पर नज़र रखना अब अहम होगा, क्योंकि एम्स जैसी बड़ी परियोजनाएँ अतीत में लंबे प्रशासनिक चक्रों से गुज़रती रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन केरल-केंद्र स्वास्थ्य वार्ताओं का इतिहास बताता है कि सैद्धांतिक मंजूरी और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई अक्सर चौड़ी रहती है। के. करुणाकरण मेडिकल कॉलेज में एक दशक की देरी — जिसे खुद नड्डा ने 'आपराधिक लापरवाही' कहा — यह दर्शाती है कि इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने के बाद भी प्रशासनिक अड़चनें कितनी लंबी खिंच सकती हैं। एम्स की प्रतिबद्धता 'दोहराई' गई है — यानी यह पहली बार नहीं है; ऐसे में सवाल यह है कि इस बार समयसीमा और बजट आवंटन कितना ठोस होगा। जेनेटिक इंस्टीट्यूट और एचपीवी वैक्सीन जैसी घोषणाएँ प्रगतिशील हैं, पर इनके लिए केरल को अभी प्रस्ताव भेजना है — यानी क्रियान्वयन की घड़ी अभी शुरू भी नहीं हुई।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपी नड्डा ने केरल को कौन-कौन से स्वास्थ्य आश्वासन दिए?
नड्डा ने 28 जुलाई 2026 को केरल को एम्स की प्रतिबद्धता दोहराने, के. करुणाकरण मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में 100 एमबीबीएस सीटों की सैद्धांतिक मंजूरी, देश के पहले जेनेटिक इंस्टीट्यूट का प्रस्ताव आमंत्रित करने, ट्रॉमा केयर सेंटर, एचपीवी वैक्सीन, तीन मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों के उन्नयन और स्टेट वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट के लिए बढ़ी सहायता सहित कई आश्वासन दिए।
के. करुणाकरण मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीटें क्यों अब तक शुरू नहीं हुईं?
नड्डा के अनुसार, करीब एक दशक पहले करोड़ों रुपये की लागत से इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो जाने के बावजूद दाखिले नहीं हो सके। उन्होंने इसे 'आपराधिक लापरवाही' बताया और कहा कि इस देरी से लगभग 1,100 छात्र मेडिकल शिक्षा से वंचित रहे।
केरल में एम्स कब तक स्थापित होगा?
नड्डा ने केरल में एम्स स्थापित करने की केंद्र की प्रतिबद्धता दोहराई, लेकिन इस बैठक में कोई निश्चित समयसीमा सार्वजनिक नहीं की गई। यह प्रतिबद्धता पहले भी व्यक्त की जा चुकी है और क्रियान्वयन की विस्तृत रूपरेखा अभी प्रतीक्षित है।
भारत का पहला जेनेटिक इंस्टीट्यूट केरल में क्यों प्रस्तावित किया जा रहा है?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने केरल से इस संस्थान की स्थापना के लिए प्रस्ताव भेजने को कहा है। केरल की उन्नत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली और वायरोलॉजी निगरानी में उसकी सक्रिय भूमिका इसके लिए उपयुक्त आधार मानी जा रही है।
केरल के स्वास्थ्य प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र से और क्या माँगें रखीं?
प्रतिनिधिमंडल ने गैर-संचारी रोगों की दवाओं, विशेष कैंसर उपचारों और भारत में अभी अनुपलब्ध दवाओं की सुलभता सुनिश्चित करने में मदद माँगी। साथ ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए बढ़ी वित्तीय सहायता और स्वास्थ्य बीमा कवरेज विस्तार का अनुरोध भी किया।
राष्ट्र प्रेस
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