केरल में 24/7 विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवा योजना को झटका: 800 पद खाली, डॉक्टरों ने दी चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
केरल सरकार की जिला और सामान्य अस्पतालों में चौबीसों घंटे विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी योजना को पहली बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा है। केरल सरकार चिकित्सा अधिकारी संघ (KGMOA) ने 27 अगस्त को चेतावनी दी कि स्वास्थ्य विभाग में पहले से ही लगभग 800 पद रिक्त हैं, और मौजूदा डॉक्टरों की पुनर्तैनाती से यह सुधार सफल नहीं हो सकता।
योजना का स्वरूप और लक्ष्य
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली केरल सरकार इस योजना के तहत विशेषज्ञ उपचार को मेडिकल कॉलेजों की सीमा से बाहर निकालकर आम जनता के करीब पहुँचाना चाहती है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने इसे लोगों के घरों के नज़दीक विशेषज्ञ देखभाल सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।
योजना के पहले चरण में 6 महीने के भीतर प्रत्येक जिले में कम से कम एक जिला या सामान्य अस्पताल को इस व्यवस्था में शामिल किया जाएगा। इसमें चिकित्सा, सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, बाल रोग और स्त्री रोग जैसी विशेषज्ञताएं शामिल होंगी, साथ ही रात के समय आपातकालीन प्रक्रियाओं और सर्जरी की सुविधा भी दी जाएगी। सरकार का मानना है कि जिला स्तर पर सुदृढ़ नेटवर्क बनने से मेडिकल कॉलेजों पर मरीजों का बोझ कम होगा।
डॉक्टरों की चेतावनी: मानव संसाधन की गंभीर कमी
KGMOA ने इस पहल का स्वागत करते हुए भी स्पष्ट किया कि इसे केवल मौजूदा डॉक्टरों की पुनर्तैनाती के ज़रिए लागू नहीं किया जाना चाहिए। संघ के अध्यक्ष पी.के. सुनील और महासचिव जोबिन जी. जोसेफ ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि जिला और सामान्य अस्पतालों में उपलब्ध मानव संसाधन चौबीसों घंटे की वास्तविक व्यवस्था के लिए कतई पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने कहा, 'चौबीसों घंटे देखभाल प्रदान करने वाले मेडिकल कॉलेज के एक विभाग में संकाय सदस्यों, वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टरों और कनिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टरों सहित लगभग 100 डॉक्टर हो सकते हैं। इसके विपरीत, कई जिला और सामान्य अस्पतालों में कुछ विभागों में सिर्फ तीन या चार विशेषज्ञ ही होते हैं।'
रिक्तियों का संकट: 800 से अधिक पद खाली
KGMOA के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों के लिए पहले से ही लगभग 800 पद रिक्त हैं — जिनमें विशेषज्ञ कैडर में करीब 300 और सामान्य कैडर में 476 पद शामिल हैं। अकेले कासरगोड, कन्नूर और पलक्कड़ जिलों में 100 से अधिक डॉक्टर पद रिक्त हैं। संघ ने यह भी आशंका जताई कि डॉक्टरों के स्थानांतरण से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक चिकित्सकों की कमी हो सकती है।
ये संस्थान टीकाकरण, मातृ एवं शिशु देखभाal, तथा संक्रामक और जीवनशैली संबंधी बीमारियों के नियंत्रण जैसी बुनियादी सेवाएं प्रदान करते हैं और उच्च स्तरीय अस्पतालों में अनावश्यक रेफरल रोकने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
KGMOA की माँगें
संघ ने सरकार से तीन ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है: नए विशेषज्ञ पदों का सृजन, मौजूदा 800 रिक्तियों को भरने के लिए तत्काल भर्ती, और आपातकालीन विभागों को अधिक आपातकालीन चिकित्सा अधिकारियों तथा प्रभावी ट्राइएज सिस्टम से सुदृढ़ करना।
आगे की राह
यह योजना ऐसे समय में आई है जब केरल की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को देश में अग्रणी माना जाता है, परंतु विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी एक पुरानी समस्या बनी हुई है। यदि सरकार नई नियुक्तियों के बिना योजना को आगे बढ़ाती है, तो तीन-स्तरीय स्वास्थ्य ढाँचे के कमज़ोर होने का जोखिम वास्तविक है। अब सरकार की अगली घोषणा — विशेषकर भर्ती प्रक्रिया पर — यह तय करेगी कि यह पहल सुधार बनती है या बोझ।