जम्मू-कश्मीर में मेडिकल इंटर्न का वजीफा ₹12,300 से बढ़कर ₹25,000, 1 अक्टूबर से लागू
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर सरकार ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को एक आधिकारिक आदेश जारी कर एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न — जिनमें विदेशी मेडिकल स्नातक भी शामिल हैं — का मासिक वजीफा ₹12,300 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जारी यह आदेश 1 अक्टूबर 2026 से पूर्वव्यापी रूप से प्रभावी होगा।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को निर्देश दिया था कि इंटर्न का वजीफा तत्काल प्रभाव से बढ़ाया जाए। इसके अगले ही दिन विभाग ने औपचारिक आदेश जारी कर दिया। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संशोधित वजीफा चिकित्सा और दंत चिकित्सा दोनों श्रेणियों के इंटर्न पर लागू होगा।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
आंदोलनकारी मेडिकल इंटर्न सोमवार को भूख हड़ताल पर चले गए थे। उनका तर्क था कि स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इटू द्वारा सैद्धांतिक सहमति का आश्वासन देने के बावजूद कोई औपचारिक आदेश नहीं आया। प्रशिक्षुओं ने बताया कि उनका वजीफा 2019 से अपरिवर्तित था, जबकि इस दौरान जीवनयापन की लागत में कई गुना वृद्धि हो चुकी है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा विभाग से तत्काल कार्रवाई का अनुरोध करने के बाद मंगलवार शाम हड़ताल समाप्त कर दी गई।
स्वास्थ्य सेवा में इंटर्न की भूमिका
जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में मेडिकल इंटर्न एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ये प्रशिक्षु आपातकालीन सेवाओं, ओपीडी और ऑपरेशन थिएटर में सक्रिय रूप से सेवाएँ देते हैं और अस्पतालों में भर्ती मरीजों की देखभाल में भी योगदान देते हैं। सरकारी अस्पतालों में कार्यरत वरिष्ठ डॉक्टरों ने भी वजीफा वृद्धि की इस माँग का सार्वजनिक समर्थन किया था।
गौरतलब है कि मेडिकल इंटर्नशिप वह अनिवार्य संक्रमण काल है जिसमें एमबीबीएस या बीडीएस की डिग्री प्राप्त चिकित्सक पूर्ण पंजीकरण से पहले पर्यवेक्षित व्यावहारिक प्रशिक्षण से गुजरते हैं। इस दौरान वे वरिष्ठ रेज़िडेंट और कंसल्टेंट डॉक्टरों की देखरेख में काम करते हैं — स्वतंत्र रूप से नहीं।
आम जनता और व्यवस्था पर असर
यह वृद्धि केंद्र शासित प्रदेश के उन सैकड़ों मेडिकल और डेंटल इंटर्न को सीधे राहत देगी जो जम्मू-कश्मीर के सरकारी अस्पतालों की जमीनी स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अपर्याप्त वजीफे के कारण प्रतिभाशाली चिकित्सा स्नातकों का बाहर पलायन एक चिंताजनक प्रवृत्ति रही है। यह फैसला उस रुझान को रोकने में सहायक हो सकता है।
क्या होगा आगे
चूँकि बढ़ा हुआ वजीफा 1 अक्टूबर 2026 से पूर्वव्यापी रूप से लागू होगा, इसलिए पात्र इंटर्न को अक्टूबर माह का बकाया अंतर भी मिलेगा। यह देखना होगा कि क्या अन्य राज्य सरकारें भी अपने मेडिकल इंटर्न के वजीफे की समीक्षा की दिशा में कदम उठाती हैं, जो देशभर में एक लंबे समय से लंबित माँग रही है।