जम्मू-कश्मीर मेडिकल इंटर्न भूख हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, ₹30,000 स्टाइपेंड के लिए लिखित आदेश की माँग
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों के मेडिकल इंटर्न की भूख हड़ताल 9 सितंबर 2026 को लगातार दूसरे दिन भी जारी रही। इंटर्न अपनी मासिक स्टाइपेंड ₹12,300 से बढ़ाकर ₹30,000 करने की माँग को लेकर एक सप्ताह से अधिक समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार की ओर से इस संबंध में औपचारिक लिखित आदेश जारी नहीं होता, उनका आंदोलन रुकने वाला नहीं है।
मुख्य घटनाक्रम
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के बडगाम से विधायक सैयद आगा मुंतजिर मेहदी मंगलवार को प्रदर्शनकारी इंटर्न के साथ एकजुटता जताने पहुँचे। उन्होंने कहा कि इंटर्न का यह लगातार विरोध दर्शाता है कि केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की प्राथमिकताएँ गलत दिशा में हैं। इस प्रदर्शन में जम्मू-कश्मीर के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों और 2 डेंटल कॉलेजों के इंटर्न शामिल हैं।
गौरतलब है कि जून 2023 में जारी सरकारी आदेश संख्या 538-जेके(एचएमई) में स्टाइपेंड को 2019 की दर ₹12,300 से बढ़ाकर ₹25,000 करने की सिफारिश की गई थी, लेकिन इंटर्न का कहना है कि यह सिफारिश आज तक लागू नहीं हुई। इंटर्न अब सीधे ₹30,000 मासिक स्टाइपेंड की माँग कर रहे हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को स्वीकार किया कि यह मामला पहले ही सुलझा लिया जाना चाहिए था। उन्होंने माना कि लगातार चल रहे आंदोलन से इंटर्न के काम और प्रशिक्षण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू ने इंटर्न से अपनी ड्यूटी पर लौटने की अपील की और कहा कि विरोध प्रदर्शन से मरीजों की देखभाल प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
प्रदर्शनकारी इंटर्न के प्रतिनिधियों और स्वास्थ्य मंत्री के बीच बैठक हो चुकी है, लेकिन इंटर्न का कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं — उन्हें लिखित सरकारी आदेश चाहिए।
आम जनता और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
मेडिकल इंटर्न जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की रीढ़ माने जाते हैं। वे ओपीडी, ऑपरेशन थिएटर और इमरजेंसी वार्ड में सक्रिय रूप से काम करते हैं। पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से इंटर्न के हड़ताल पर रहने के कारण अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी हो गई है, जिससे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इंटर्न का तर्क है कि 2018 से उनकी स्टाइपेंड में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि इस दौरान रहने, खाने-पीने और अन्य जीवन-यापन की लागत कई गुना बढ़ चुकी है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में इंटर्न को मिलने वाला स्टाइपेंड देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है। आलोचकों का कहना है कि यह स्थिति न केवल इंटर्न के मनोबल को प्रभावित करती है, बल्कि भविष्य में क्षेत्र में योग्य चिकित्सकों की उपलब्धता पर भी असर डाल सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर अपनी स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण पर जोर दे रहा है।
क्या होगा आगे
इंटर्न ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक औपचारिक सरकारी आदेश जारी नहीं होता, भूख हड़ताल जारी रहेगी। प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है क्योंकि अस्पतालों में स्टाफ की कमी से सेवाएँ प्रभावित हो रही हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार कब और किस रूप में लिखित आदेश जारी करती है।