जम्मू-कश्मीर इंटर्न डॉक्टरों का CM उमर अब्दुल्ला से मिलने का कार्यक्रम, ₹30,000 स्टाइपेंड की मांग
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के इंटर्न डॉक्टरों का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार, 5 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात करेगा और मासिक स्टाइपेंड को मौजूदा ₹12,300 से बढ़ाकर ₹30,000 करने की लंबे समय से लंबित माँग रखेगा। यह बैठक तब हो रही है जब केंद्र शासित प्रदेश भर के इंटर्न सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व और संरचना
इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) के नेता डॉ. तसदुक कर रहे हैं। उनके साथ संयुक्त सचिव डॉ. आकिब, डॉ. शाहनवाज़, डॉ. तनिष मनसोत्रा और डॉ. फराज भी मुख्यमंत्री से मिलेंगे। AIMSA के राज्य प्रभारी डॉ. मोहम्मद मोमिन खान ने बताया कि गुरुवार रात सरकारी अधिकारियों की ओर से फोन आया था, जिसमें बातचीत के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने का अनुरोध किया गया था।
डॉ. खान ने कहा, 'हम इस पहल का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि सरकार स्टाइपेंड के लंबे समय से लंबित मुद्दे पर ठोस फ़ैसला लेगी।' उन्होंने स्पष्ट किया कि माँग पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
हड़ताल की पृष्ठभूमि और मुख्य माँगें
जम्मू-कश्मीर में MBBS और BDS पाठ्यक्रमों के इंटर्न डॉक्टरों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की थी। इंटर्नों का कहना है कि मौजूदा ₹12,300 मासिक स्टाइपेंड लगभग छह वर्षों से नहीं बढ़ाया गया है, जबकि महंगाई और काम का बोझ दोनों बढ़े हैं। उनकी माँग है कि इसे बढ़ाकर ₹30,000 प्रति माह किया जाए।
गौरतलब है कि इंटर्नों का तर्क है कि अन्य राज्यों की तुलना में जम्मू-कश्मीर में यह स्टाइपेंड सबसे कम है, जो न केवल उनकी आर्थिक कठिनाई को दर्शाता है, बल्कि भविष्य में चिकित्सा प्रतिभाओं को केंद्र शासित प्रदेश से बाहर जाने के लिए प्रेरित कर सकता है।
हड़ताल का दायरा और प्रभावित संस्थान
यह हड़ताल पूरे केंद्र शासित प्रदेश में फैली हुई है। SKIMS बेमिना, GMC जम्मू, GMC अनंतनाग और GMC बारामूला के इंटर्न डॉक्टर इसमें शामिल हैं। हड़ताल के कारण इन अस्पतालों में इंटर्नशिप-आधारित सेवाएँ प्रभावित हुई हैं, जिससे मरीज़ों की देखभाल पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
इंटर्नों की शर्तें और आगे की राह
डॉ. खान ने दोहराया कि विरोध प्रदर्शन तभी वापस लिया जाएगा जब स्टाइपेंड बढ़ाने को औपचारिक मंज़ूरी मिल जाए और लिखित सरकारी आदेश जारी हो जाए। मौखिक आश्वासन को पर्याप्त नहीं माना जाएगा। यह बैठक इस गतिरोध को सुलझाने की दिशा में पहला ठोस कदम मानी जा रही है, लेकिन अंतिम परिणाम सरकार के लिखित निर्णय पर निर्भर करेगा।