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आयुष छात्रों की डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से माँग: ₹7,500 स्टाइपेंड को ₹25,000 करो, 15 साल से नहीं बढ़ा

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आयुष छात्रों की डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से माँग: ₹7,500 स्टाइपेंड को ₹25,000 करो, 15 साल से नहीं बढ़ा

सारांश

लखनऊ में आयुष इंटर्न्स का धैर्य टूटा — 15 साल, दो सरकारें, और स्टाइपेंड आज भी ₹7,500। जबकि एमबीबीएस और बीडीएस छात्रों के स्टाइपेंड दो बार बढ़ चुके हैं, आयुष छात्र डिप्टी सीएम के दरवाज़े पर खड़े हैं — माँग एक ही है: बराबर काम, बराबर दाम।

मुख्य बातें

नेशनल होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के आयुष छात्रों ने 8 सितंबर को लखनऊ में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के आवास पर ज्ञापन सौंपने पहुँचे।
छात्रों का मासिक स्टाइपेंड 2011 से ₹7,500 पर अपरिवर्तित है — पिछले 15 वर्षों में कोई बढ़ोतरी नहीं।
इसी अवधि में एमबीबीएस और बीडीएस छात्रों के स्टाइपेंड में दो बार वृद्धि हो चुकी है।
छात्रों की माँग है कि स्टाइपेंड ₹7,500 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रतिमाह किया जाए।
छात्र ओपीडी, आईपीडी और इमरजेंसी में अन्य विभागों के बराबर काम करने का हवाला देते हुए समान वेतन की माँग कर रहे हैं।

लखनऊ में नेशनल होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के आयुष छात्रों ने 8 सितंबर को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आवास के बाहर पहुँचकर स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की माँग रखी। छात्रों का कहना है कि 2011 से अब तक उनका मासिक स्टाइपेंड ₹7,500 पर स्थिर है, जबकि एमबीबीएस और बीडीएस छात्रों के स्टाइपेंड में इसी अवधि में दो बार वृद्धि हो चुकी है।

मुख्य घटनाक्रम

छात्रों का एक समूह उपमुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने के उद्देश्य से उनके आवास पर पहुँचा। प्रदर्शनकारियों में छात्राएँ और छात्र दोनों शामिल थे, जो ओपीडी, आईपीडी और इमरजेंसी सेवाओं में अन्य विभागों के समकक्ष काम करने का हवाला देते हुए समान वेतन की माँग कर रहे थे। छात्रों ने स्पष्ट किया कि यह विरोध नहीं, बल्कि एक सविनय आग्रह है।

छात्रों की माँग और उनके तर्क

छात्रा मारिया ने कहा, 'हम लोग सरकार का विरोध करने नहीं, बल्कि आग्रह करने आए हैं। हम लोग मरीजों की उतनी ही देखभाल करते हैं, जितना एलोपैथ के डॉक्टर करते हैं। ऐसे में अगर हम बराबर काम कर रहे हैं तो पेमेंट भी समान मिलना चाहिए।'

छात्र जलज कुमार यादव ने बताया कि 2011 में एमबीबीएस, बीडीएस और आयुष तीनों के स्टाइपेंड समान थे। उन्होंने कहा, 'पिछले 15 सालों से हमारी स्टाइपेंड नहीं बढ़ाई गई है। अभी भी स्टाइपेंड ₹7,500 मिलते हैं। स्टाइपेंड बढ़ाने के नाम पर हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है।'

छात्रा निवेदिका सिंह ने माँग को और स्पष्ट करते हुए कहा, 'हमारी माँग है कि स्टाइपेंड ₹7,500 से बढ़ाकर ₹25,000 की जाए। कई साल से हमें सिर्फ ₹7,500 मिल रहे हैं जबकि अन्य कोर्स में स्टाइपेंड बढ़ाए जा रहे हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह की माँग पहले भी कई बार उठाई जा चुकी है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली।

छात्र लव प्रभात ने कहा, 'हम लोग भी ओपीडी, आईपीडी और इमरजेंसी में अन्य विभाग के छात्रों के बराबर काम करते हैं। इसलिए हमारी माँग है कि स्टाइपेंड बढ़े।'

आम जनता और आयुष क्षेत्र पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें आयुष चिकित्सा पद्धति को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवाओं में शामिल करने पर ज़ोर दे रही हैं। आलोचकों का कहना है कि यदि आयुष इंटर्न्स को उचित स्टाइपेंड नहीं मिलता, तो इस क्षेत्र में प्रतिभाशाली छात्रों को आकर्षित करना कठिन होगा। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में सरकारी अस्पतालों में आयुष चिकित्सकों की माँग लगातार बढ़ रही है।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह

अब तक उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की ओर से इस माँग पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। छात्रों का कहना है कि वे ज्ञापन सौंपकर अपनी बात रखना चाहते हैं और सरकार से सकारात्मक उत्तर की उम्मीद रखते हैं। यदि माँग पूरी नहीं हुई, तो आगे और बड़े प्रदर्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक व्यापक नीतिगत विरोधाभास को उजागर करती है — सरकार एक तरफ आयुष को राष्ट्रीय स्वास्थ्य तंत्र का अभिन्न हिस्सा बताती है, दूसरी तरफ उसी तंत्र के इंटर्न्स को डेढ़ दशक से न्यूनतम स्टाइपेंड पर काम करने के लिए छोड़ देती है। यह पहली बार नहीं है कि यह माँग उठी है — बार-बार आश्वासन और कोई ठोस कार्रवाई न होना, नीति-निर्माण में आयुष की प्राथमिकता पर सवाल उठाता है। जब तक स्टाइपेंड नीति को एक पारदर्शी और नियमित संशोधन तंत्र से नहीं जोड़ा जाता, तब तक यह चक्र — प्रदर्शन, आश्वासन, विस्मरण — दोहराता रहेगा।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयुष छात्रों की स्टाइपेंड माँग क्या है?
नेशनल होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के आयुष इंटर्न्स ने माँग की है कि उनका मासिक स्टाइपेंड ₹7,500 से बढ़ाकर ₹25,000 किया जाए। उनका तर्क है कि वे ओपीडी, आईपीडी और इमरजेंसी में एमबीबीएस और बीडीएस छात्रों के बराबर काम करते हैं, इसलिए उन्हें समान स्टाइपेंड मिलना चाहिए।
आयुष छात्रों का स्टाइपेंड कब से नहीं बढ़ा है?
छात्रों के अनुसार, 2011 से उनका स्टाइपेंड ₹7,500 पर स्थिर है — यानी पिछले 15 वर्षों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। इसी अवधि में एमबीबीएस और बीडीएस छात्रों के स्टाइपेंड में दो बार वृद्धि की जा चुकी है।
छात्र डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के पास क्यों गए?
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक स्वास्थ्य विभाग की देखरेख करते हैं, इसलिए छात्र उन्हें ज्ञापन सौंपकर अपनी माँग रखने पहुँचे। छात्रों ने स्पष्ट किया कि यह विरोध नहीं, बल्कि सविनय आग्रह है।
क्या इस माँग पर पहले भी प्रयास हुए हैं?
हाँ, छात्रा निवेदिका सिंह के अनुसार इस तरह की माँग पहले भी कई बार उठाई जा चुकी है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला और कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। छात्र जलज कुमार यादव ने भी कहा कि बार-बार आश्वासन के बावजूद स्टाइपेंड नहीं बढ़ा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने अब तक क्या कहा है?
8 सितंबर को हुए इस प्रदर्शन के बाद उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। छात्र ज्ञापन सौंपकर सरकार से सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद रख रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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