14 जुलाई 2026
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भरत तिवारी एनकाउंटर: न्यायिक जांच आयोग के सामने परिजन और ग्रामीण बोले — 'आत्मसमर्पण के बाद भी मारी गोली'

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भरत तिवारी एनकाउंटर: न्यायिक जांच आयोग के सामने परिजन और ग्रामीण बोले — 'आत्मसमर्पण के बाद भी मारी गोली'

सारांश

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में न्यायिक जांच आयोग के सामने परिजन और ग्रामीण आए — भाई चंदन तिवारी का दावा कि आत्मसमर्पण के बाद भी गोली मारी गई, और चश्मदीद ललिता देवी ने तीन गोलियों की गवाही दी। न्याय की मांग अब बिहार सरकार से केंद्र तक पहुँच रही है।

मुख्य बातें

14 जुलाई को भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच आयोग के समक्ष सुनवाई हुई।
भाई चंदन तिवारी ने दावा किया कि भरत तिवारी के आत्मसमर्पण के बाद भी उन्हें गोली मारी गई; आयोग से 30 मिनट बातचीत हुई।
चश्मदीद ललिता देवी ने कथित तौर पर बताया कि पिस्तौल फेंकने के बाद पुलिस ने भरत तिवारी को तीन गोलियाँ मारीं।
परिजन ने बिहार सरकार से न्याय की उम्मीद कम बताई; भारत सरकार से हस्तक्षेप की अपेक्षा जताई।
आयोग ने परिजनों को जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया, किंतु अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।

आरा में भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच के लिए गठित न्यायिक जांच आयोग के समक्ष 14 जुलाई को परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने अपने बयान दर्ज कराए। भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी और गांव की निवासी ललिता देवी ने आयोग को घटना का विस्तृत विवरण दिया और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की।

परिजन का बयान: 'आत्मसमर्पण के बाद भी गोली मारी गई'

चंदन तिवारी ने आयोग के सामने दावा किया कि उनके भाई भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, बावजूद इसके उन्हें आगे ले जाकर गोली मार दी गई। उन्होंने बताया कि आयोग के साथ करीब 30 मिनट तक बातचीत हुई, जिसमें घटना के सभी पहलू रखे गए।

चंदन तिवारी के अनुसार, आयोग ने उन्हें जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा, 'हमारी मांग है कि मामले में शामिल लोगों को जल्द गिरफ्तार किया जाए और कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। जब तक गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक मैं पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो सकता।'

उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली प्रवास के दौरान कोई नेता या अधिकारी उनसे मिलने नहीं आया। चंदन तिवारी ने कहा कि उन्हें बिहार सरकार से न्याय की उम्मीद कम है, किंतु भारत सरकार से वे न्याय की अपेक्षा रखते हैं।

चश्मदीद गवाह ललिता देवी का बयान

गांव की निवासी ललिता देवी ने आयोग के समक्ष दावा किया कि उन्होंने अपनी आँखों से देखा कि पुलिस ने भरत तिवारी को गोली मारी। उनके अनुसार, घटना के दौरान भरत तिवारी ने कुछ मांगें रखी थीं और जब एक अधिकारी ने उन्हें पूरा करने का आश्वासन दिया, तो उन्होंने अपनी पिस्तौल फेंक दी।

ललिता देवी ने कथित तौर पर बताया कि इसके बाद पुलिस ने वह पिस्तौल उठाकर भरत तिवारी को तीन गोलियाँ मार दीं। उन्होंने दावा किया कि गोली लगने के बावजूद भरत तिवारी ने नारे लगाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसके बाद प्रशासन ने उन्हें गुस्से में गाड़ी में धकेल दिया।

ललिता देवी ने बताया कि भरत तिवारी ने गांव के लिए कई काम किए थे और स्थानीय लोगों के बीच उनकी अलग पहचान थी।

न्यायिक जांच आयोग की भूमिका

यह ध्यान देने योग्य है कि इस एनकाउंटर की संवेदनशीलता को देखते हुए न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया था। आयोग परिजनों, ग्रामीणों और अन्य गवाहों के बयान दर्ज कर रहा है। आयोग ने परिजनों को जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया है, हालाँकि अभी तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।

आगे क्या होगा

परिजनों और ग्रामीणों के बयान दर्ज होने के बाद अब आयोग अपनी जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। चंदन तिवारी ने स्पष्ट किया है कि जब तक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती, परिवार को न्याय नहीं मिला मानेंगे। मामले में बिहार सरकार और केंद्र सरकार दोनों पर दबाव बढ़ता दिख रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ न्यायिक जांच आयोगों का गठन तो होता है, पर दोषियों पर कार्रवाई प्रायः वर्षों तक लंबित रहती है। चंदन तिवारी का यह कहना कि उन्हें बिहार सरकार से न्याय की उम्मीद कम है, राज्य की कानून-व्यवस्था में जनता के घटते भरोसे का प्रतिबिंब है। ललिता देवी जैसी चश्मदीद गवाहों के बयान आयोग की विश्वसनीयता की असली परीक्षा होंगे — सवाल यह है कि क्या आयोग की सिफारिशें महज रिपोर्ट बनकर रह जाएँगी, या वास्तविक कानूनी कार्रवाई में तब्दील होंगी।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भरत तिवारी एनकाउंटर मामला क्या है?
भरत तिवारी एनकाउंटर मामला बिहार के आरा से जुड़ा एक विवादित पुलिस एनकाउंटर है, जिसमें परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि भरत तिवारी को आत्मसमर्पण के बाद भी गोली मारी गई। इस मामले की जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया है।
न्यायिक जांच आयोग के सामने 14 जुलाई को क्या हुआ?
14 जुलाई को भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी और गांव की निवासी ललिता देवी ने आयोग के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए। दोनों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की और आयोग को घटना का विस्तृत विवरण दिया।
चंदन तिवारी ने आयोग के सामने क्या दावा किया?
चंदन तिवारी ने दावा किया कि उनके भाई भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण किया था, फिर भी उन्हें आगे ले जाकर गोली मार दी गई। उन्होंने आयोग से करीब 30 मिनट बात की और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।
ललिता देवी ने एनकाउंटर के बारे में क्या बताया?
ललिता देवी ने कथित तौर पर बताया कि उन्होंने अपनी आँखों से देखा कि भरत तिवारी ने पिस्तौल फेंक दी थी, लेकिन इसके बाद भी पुलिस ने उन्हें तीन गोलियाँ मारीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बाद में प्रशासन ने उन्हें गाड़ी में धकेल दिया।
परिजनों को न्याय की उम्मीद कहाँ से है?
चंदन तिवारी ने स्पष्ट किया कि उन्हें बिहार सरकार से न्याय की उम्मीद कम है, लेकिन भारत सरकार से वे न्याय की अपेक्षा रखते हैं। उनका कहना है कि जब तक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती, परिवार संतुष्ट नहीं होगा।
राष्ट्र प्रेस
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