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आरा: कथित फर्जी एनकाउंटर पर अश्विनी चौबे ने भरत भूषण तिवारी परिवार से मिलकर माँगी उच्चस्तरीय जाँच

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आरा: कथित फर्जी एनकाउंटर पर अश्विनी चौबे ने भरत भूषण तिवारी परिवार से मिलकर माँगी उच्चस्तरीय जाँच

सारांश

आरा में कथित फर्जी एनकाउंटर का मामला अब राजनीतिक रूप ले चुका है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने पीड़ित परिवार से मिलकर तीन महीने में जाँच पूरी करने, दोषी पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी और मुआवजे की माँग की — और एनडीए के भीतर से ही पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।

मुख्य बातें

पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने 20 जून को आरा में भारत भूषण तिवारी के परिवार से मुलाकात की।
चौबे ने घटना को 'फर्जी एनकाउंटर' बताते हुए संबंधित पुलिसकर्मी पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने और तत्काल गिरफ्तारी की माँग की।
जाँच तीन महीने के भीतर पूरी होनी चाहिए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए — चौबे का आग्रह।
मृतक के खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं था — चौबे का दावा।
पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और झूठे मुकदमों को वापस लेने की भी माँग।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बयान को चौबे ने 'गलत' बताया।

पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने 20 जून को आरा में कथित फर्जी एनकाउंटर में मारे गए भारत भूषण तिवारी के परिवार से मुलाकात की और उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। इस दौरान चौबे ने घटना को 'अत्यंत दुखद, दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय' बताते हुए मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जाँच की माँग की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी पुलिस अधिकारी की भूमिका दोषी पाई जाती है तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

मुख्य घटनाक्रम

मीडिया से बातचीत में चौबे ने कहा कि एक होनहार नौजवान की जिस तरह से हत्या हुई है, उसकी जितनी भी निंदा की जाए वह कम है। उन्होंने माँग की कि संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए और उसकी तत्काल गिरफ्तारी हो। उनके अनुसार, भारत भूषण तिवारी गरीबों, अनुसूचित वर्ग, शोषितों, पीड़ितों, वंचितों तथा बाढ़ प्रभावित लोगों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठा रहे थे।

चौबे ने यह भी दावा किया कि मृतक के खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं था। उन्होंने कहा, 'उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह मामला वास्तविक मुठभेड़ नहीं बल्कि फर्जी मुठभेड़ प्रतीत होता है।' उन्होंने मृतक के मोबाइल फोन की जाँच पर जोर दिया, जिससे कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

जाँच और मुआवजे की माँग

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने माँग की कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जाँच तीन महीने के भीतर पूरी की जाए और जाँच रिपोर्ट जल्द से जल्द सार्वजनिक की जाए। उन्होंने पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिए जाने की भी माँग की। साथ ही, यदि परिवार के खिलाफ कोई झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं तो उन्हें वापस लिया जाना चाहिए।

चौबे ने कहा कि एनडीए सरकार जनता के विश्वास और कड़ी मेहनत से बनी है, इसलिए किसी भी दोषी पुलिसकर्मी को बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि सरकार इस मामले में कानूनी कार्रवाई करेगी।

केंद्रीय मंत्री मांझी के बयान पर प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बयान पर टिप्पणी करते हुए चौबे ने कहा कि पुलिस की इस कार्रवाई को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे बहादुरी या उपलब्धि नहीं कहा जा सकता और यदि ऐसा कोई बयान दिया गया है तो वह गलत है।

आगे क्या होगा

यह मामला बिहार में पुलिस की जवाबदेही और न्यायिक पारदर्शिता के सवालों को एक बार फिर केंद्र में ले आया है। गौरतलब है कि फर्जी एनकाउंटर के आरोप गंभीर संवैधानिक और मानवाधिकार प्रश्न उठाते हैं। पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा या नहीं, यह उच्चस्तरीय जाँच की निष्पक्षता और समयबद्धता पर निर्भर करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए असहज राजनीतिक संकेत है। आलोचकों का कहना है कि बिहार में फर्जी एनकाउंटर के आरोप नए नहीं हैं, लेकिन जाँच की समयसीमा और जवाबदेही का ढाँचा हर बार कमज़ोर साबित हुआ है। तीन महीने की जाँच-सीमा की माँग सराहनीय है, पर बिना स्वतंत्र निगरानी तंत्र के यह भी पिछली घोषणाओं की तरह कागज़ी रह सकती है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत भूषण तिवारी कौन थे और उनकी मौत कैसे हुई?
भारत भूषण तिवारी आरा, बिहार के एक सामाजिक कार्यकर्ता थे जो गरीबों, अनुसूचित वर्ग और बाढ़ प्रभावित लोगों के अधिकारों के लिए काम कर रहे थे। उनकी मौत एक कथित पुलिस एनकाउंटर में हुई, जिसे पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे सहित अनेक लोगों ने फर्जी एनकाउंटर बताया है।
अश्विनी चौबे ने इस मामले में क्या माँगें रखी हैं?
अश्विनी कुमार चौबे ने संबंधित पुलिसकर्मी पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने, तत्काल गिरफ्तारी, तीन महीने के भीतर उच्चस्तरीय जाँच, जाँच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने, पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और झूठे मुकदमों को वापस लेने की माँग की है।
क्या भारत भूषण तिवारी के खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड था?
पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के अनुसार, मृतक भारत भूषण तिवारी के खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं था। हालाँकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बयान पर चौबे ने क्या कहा?
चौबे ने स्पष्ट किया कि पुलिस की इस कार्रवाई को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता और इसे बहादुरी या उपलब्धि नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि जीतन राम मांझी ने ऐसा कोई बयान दिया है तो वह गलत है।
इस मामले की जाँच कब तक पूरी होनी चाहिए?
अश्विनी चौबे ने माँग की है कि उच्चस्तरीय जाँच तीन महीने के भीतर पूरी हो और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। उन्होंने कहा कि न्याय में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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