10 अगस्त 2026
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भरत तिवारी एनकाउंटर: रोहिणी आचार्य का बिहार सरकार पर हमला, 'पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट छुपाई जा रही है'

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भरत तिवारी एनकाउंटर: रोहिणी आचार्य का बिहार सरकार पर हमला, 'पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट छुपाई जा रही है'

सारांश

भरत तिवारी कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में रोहिणी आचार्य ने बिहार सरकार की न्यायिक जाँच को 'जनाक्रोश ठंडा करने की कवायद' बताया। उन्होंने पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट और मृतक के मोबाइल डेटा को तत्काल सार्वजनिक करने की माँग की, और आशंका जताई कि अहम साक्ष्य नष्ट किए जा सकते हैं।

मुख्य बातें

रोहिणी आचार्य ने 24 जून को एक्स पर पोस्ट कर बिहार सरकार की न्यायिक जाँच को 'जनाक्रोश ठंडा करने की कवायद' बताया।
भरत तिवारी की पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई, जो कई न्यायालयों में दायर याचिकाओं के लिए अनिवार्य दस्तावेज़ है।
मृतक का मोबाइल फोन पुलिस की हिरासत में है; परिजनों का दावा है कि उसमें अहम व्हाट्सएप चैट और साक्ष्य हो सकते हैं।
रोहिणी ने आशंका जताई कि मोबाइल डेटा नष्ट किया जा सकता है और पुलिस इस पर चुप्पी साधे हुए है।
सरकार से माँग — पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट, मोबाइल डेटा और सभी अहम दस्तावेज़ तत्काल सार्वजनिक किए जाएँ।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की बेटी और पूर्व लोकसभा प्रत्याशी रोहिणी आचार्य ने भरत तिवारी कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में बिहार सरकार की न्यायिक जाँच को 'जनाक्रोश को ठंडा करने की कवायद' बताते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि भरत तिवारी की पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई, जो इस पूरे मामले में संदेह को और गहरा करती है।

एक्स पर उठाए तीखे सवाल

रोहिणी आचार्य ने बुधवार, 24 जून को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के ज़रिए बिहार सरकार को घेरा। उन्होंने लिखा कि न्यायिक जाँच की प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है, जिससे इस 'जघन्य हत्याकांड' के दोषियों की जवाबदेही तय होने में वर्षों का समय लग सकता है। उनके अनुसार, न्यायिक जाँच का यह आदेश वास्तव में जनता के गुस्से को शांत करने की सरकारी रणनीति है, न कि न्याय दिलाने का ईमानदार प्रयास।

पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट और मोबाइल डेटा पर सवाल

रोहिणी ने आरोप लगाया कि पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट सार्वजनिक न करने की आड़ में सरकार और पुलिस किसी को बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि भरत तिवारी के परिजन मृतक के मोबाइल फोन की जानकारी सार्वजनिक किए जाने की माँग कर रहे हैं। परिजनों का दावा है कि मृतक का मोबाइल फोन फिलहाल पुलिस की हिरासत में है और उसमें इस कथित फर्जी मुठभेड़ के आदेश देने वालों से जुड़े अहम साक्ष्य, जानकारियाँ और व्हाट्सएप चैट मौजूद हो सकती हैं।

रोहिणी ने आशंका जताई कि कहीं 'काली करतूत' को छुपाने के लिए मोबाइल फोन में मौजूद डेटा और व्हाट्सएप चैट को नष्ट तो नहीं कर दिया गया। पुलिस की इस मामले पर चुप्पी को उन्होंने संदेहास्पद बताया।

न्यायिक याचिकाओं में अहम दस्तावेज़

रोहिणी आचार्य के अनुसार, इस मामले से जुड़ी कई याचिकाएँ विभिन्न न्यायालयों में दायर हैं। उन याचिकाओं की कानूनी मज़बूती के लिए पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट एक अनिवार्य दस्तावेज़ है। ऐसे में रिपोर्ट को सार्वजनिक न करना न केवल संदेह को गहरा करता है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को भी बाधित करता है।

परिजनों और हाशिए के वर्गों के लिए न्याय की माँग

पिछले लोकसभा चुनाव में सारण सीट से RJD के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी रोहिणी ने कहा कि भरत तिवारी दलितों, वंचितों, शोषितों और हाशिए पर खड़े वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए जान गंवाने वाले व्यक्ति थे। उनके परिजनों को न्याय दिलाने के लिए ज़मीन पर कई लोग संघर्षरत हैं, लेकिन सरकार अब तक सबसे बुनियादी सवालों का जवाब देने से बच रही है।

सरकार से माँग

रोहिणी आचार्य ने माँग की कि बिहार सरकार न्यायिक जाँच के साथ-साथ पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट, मोबाइल डेटा की स्थिति और मामले से जुड़े सभी अहम दस्तावेज़ तत्काल सार्वजनिक करे, ताकि भरत तिवारी के परिजनों को न्याय मिल सके और पूरे मामले की निष्पक्ष सच्चाई सामने आ सके। यह मामला बिहार में पुलिस जवाबदेही और एनकाउंटर की पारदर्शिता पर एक बड़े सवाल के रूप में उभर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

चाहे कारण कुछ भी हो, न्यायिक पारदर्शिता के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है। मृतक के मोबाइल फोन में मौजूद संभावित साक्ष्यों की सुरक्षा को लेकर कोई आधिकारिक बयान न आना, जाँच की विश्वसनीयता पर सीधा असर डालता है। यह मामला केवल एक एनकाउंटर की जाँच नहीं है — यह बिहार में पुलिस जवाबदेही और राजनीतिक इच्छाशक्ति की परीक्षा है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भरत तिवारी कथित फर्जी मुठभेड़ मामला क्या है?
यह बिहार में एक कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ का मामला है जिसमें भरत तिवारी की मौत हुई। मामले में बिहार सरकार ने न्यायिक जाँच के आदेश दिए हैं, लेकिन विपक्ष और परिजन पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट सार्वजनिक न होने पर सवाल उठा रहे हैं।
रोहिणी आचार्य ने क्या माँग की है?
रोहिणी आचार्य ने बिहार सरकार से भरत तिवारी की पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट, मृतक के मोबाइल फोन का डेटा और मामले से जुड़े सभी अहम दस्तावेज़ तत्काल सार्वजनिक करने की माँग की है। उनका कहना है कि ये दस्तावेज़ न्यायालयों में दायर याचिकाओं के लिए भी ज़रूरी हैं।
मृतक भरत तिवारी का मोबाइल फोन क्यों अहम है?
परिजनों का दावा है कि भरत तिवारी का मोबाइल फोन पुलिस की हिरासत में है और उसमें इस कथित फर्जी मुठभेड़ के आदेश देने वालों से जुड़े साक्ष्य, जानकारियाँ और व्हाट्सएप चैट हो सकती हैं। रोहिणी आचार्य ने आशंका जताई है कि यह डेटा नष्ट किया जा सकता है।
बिहार सरकार की न्यायिक जाँच पर विपक्ष को क्या आपत्ति है?
विपक्ष का तर्क है कि न्यायिक जाँच की प्रक्रिया लंबी होती है, जिससे दोषियों की जवाबदेही तय होने में वर्षों लग सकते हैं। रोहिणी आचार्य ने इसे 'जनाक्रोश को ठंडा करने की कवायद' बताया है, न कि न्याय दिलाने का वास्तविक प्रयास।
इस मामले में न्यायालयों में क्या चल रहा है?
रोहिणी आचार्य के अनुसार, भरत तिवारी मामले से जुड़ी कई याचिकाएँ विभिन्न न्यायालयों में दायर हैं। इन याचिकाओं की कानूनी मज़बूती के लिए पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट एक अनिवार्य दस्तावेज़ है, जिसे अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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