भरत तिवारी एनकाउंटर: रोहिणी आचार्य का बिहार सरकार पर हमला, 'पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट छुपाई जा रही है'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की बेटी और पूर्व लोकसभा प्रत्याशी रोहिणी आचार्य ने भरत तिवारी कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में बिहार सरकार की न्यायिक जाँच को 'जनाक्रोश को ठंडा करने की कवायद' बताते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि भरत तिवारी की पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई, जो इस पूरे मामले में संदेह को और गहरा करती है।
एक्स पर उठाए तीखे सवाल
रोहिणी आचार्य ने बुधवार, 24 जून को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के ज़रिए बिहार सरकार को घेरा। उन्होंने लिखा कि न्यायिक जाँच की प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है, जिससे इस 'जघन्य हत्याकांड' के दोषियों की जवाबदेही तय होने में वर्षों का समय लग सकता है। उनके अनुसार, न्यायिक जाँच का यह आदेश वास्तव में जनता के गुस्से को शांत करने की सरकारी रणनीति है, न कि न्याय दिलाने का ईमानदार प्रयास।
पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट और मोबाइल डेटा पर सवाल
रोहिणी ने आरोप लगाया कि पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट सार्वजनिक न करने की आड़ में सरकार और पुलिस किसी को बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि भरत तिवारी के परिजन मृतक के मोबाइल फोन की जानकारी सार्वजनिक किए जाने की माँग कर रहे हैं। परिजनों का दावा है कि मृतक का मोबाइल फोन फिलहाल पुलिस की हिरासत में है और उसमें इस कथित फर्जी मुठभेड़ के आदेश देने वालों से जुड़े अहम साक्ष्य, जानकारियाँ और व्हाट्सएप चैट मौजूद हो सकती हैं।
रोहिणी ने आशंका जताई कि कहीं 'काली करतूत' को छुपाने के लिए मोबाइल फोन में मौजूद डेटा और व्हाट्सएप चैट को नष्ट तो नहीं कर दिया गया। पुलिस की इस मामले पर चुप्पी को उन्होंने संदेहास्पद बताया।
न्यायिक याचिकाओं में अहम दस्तावेज़
रोहिणी आचार्य के अनुसार, इस मामले से जुड़ी कई याचिकाएँ विभिन्न न्यायालयों में दायर हैं। उन याचिकाओं की कानूनी मज़बूती के लिए पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट एक अनिवार्य दस्तावेज़ है। ऐसे में रिपोर्ट को सार्वजनिक न करना न केवल संदेह को गहरा करता है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को भी बाधित करता है।
परिजनों और हाशिए के वर्गों के लिए न्याय की माँग
पिछले लोकसभा चुनाव में सारण सीट से RJD के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी रोहिणी ने कहा कि भरत तिवारी दलितों, वंचितों, शोषितों और हाशिए पर खड़े वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए जान गंवाने वाले व्यक्ति थे। उनके परिजनों को न्याय दिलाने के लिए ज़मीन पर कई लोग संघर्षरत हैं, लेकिन सरकार अब तक सबसे बुनियादी सवालों का जवाब देने से बच रही है।
सरकार से माँग
रोहिणी आचार्य ने माँग की कि बिहार सरकार न्यायिक जाँच के साथ-साथ पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट, मोबाइल डेटा की स्थिति और मामले से जुड़े सभी अहम दस्तावेज़ तत्काल सार्वजनिक करे, ताकि भरत तिवारी के परिजनों को न्याय मिल सके और पूरे मामले की निष्पक्ष सच्चाई सामने आ सके। यह मामला बिहार में पुलिस जवाबदेही और एनकाउंटर की पारदर्शिता पर एक बड़े सवाल के रूप में उभर रहा है।