भरत तिवारी फर्जी एनकाउंटर: रोहिणी आचार्य का सवाल — आरोपी एसडीपीओ राजेश शर्मा को नई पोस्टिंग क्यों?
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्य ने 3 जुलाई 2025 को बिहार सरकार पर तीखा हमला बोला, जब उन्होंने भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में नामजद आरोपी जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को नई जिम्मेदारी दिए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने इसे आरोपी अधिकारी को 'पुरस्कृत' किए जाने जैसा बताते हुए मुख्यमंत्री, बिहार सरकार और पुलिस महानिदेशक से जवाब माँगा।
मामले की पृष्ठभूमि
भरत तिवारी कथित तौर पर जवईनिया गाँव के गरीब विस्थापितों की लड़ाई लड़ने वाले और भोजपुर प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने की बात करने वाले एक सामाजिक कार्यकर्ता थे। उनकी कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद परिजनों ने प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसमें लगभग आधा दर्जन पुलिसकर्मियों को नामजद आरोपी बनाया गया है। घटना को लगभग एक पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
रोहिणी आचार्य के आरोप
रोहिणी आचार्य ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आरोपी पुलिस अधिकारी को नई जिम्मेदारी सौंपा जाना 'हैरान करने वाला फैसला' है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के इस कदम से मृतक के परिजनों और ग्रामीणों के उन आरोपों को बल मिलता है, जिनके अनुसार कथित फर्जी मुठभेड़ को सत्ता के शीर्ष स्तर, पुलिस के उच्चाधिकारियों और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की सहमति प्राप्त थी।
उन्होंने यह आशंका भी जताई कि जाँच में देरी और आरोपियों की गिरफ्तारी न होने के पीछे किसी बड़े नाम को बचाने की कोशिश हो सकती है।
मोबाइल फोन और पारदर्शिता का मुद्दा
रोहिणी आचार्य ने अपनी पोस्ट में भरत तिवारी के मोबाइल फोन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि घटना के लगभग एक पखवाड़े बाद भी पुलिस ने मृतक का मोबाइल फोन परिजनों को नहीं सौंपा है। उन्होंने सवाल किया कि आरोपियों से अब तक पूछताछ क्यों नहीं की गई और मामले की जाँच इतनी धीमी गति से तथा बिना पारदर्शिता के क्यों आगे बढ़ रही है।
सरकार की चुप्पी पर सवाल
रोहिणी आचार्य ने मुख्यमंत्री, बिहार सरकार और पुलिस महानिदेशक से सीधे जवाब माँगा है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष पहले से ही राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार को घेरे हुए है। गौरतलब है कि बिहार में पुलिस एनकाउंटर की विश्वसनीयता को लेकर यह पहला विवाद नहीं है। आरोपी अधिकारी की नई पोस्टिंग ने इस मामले को एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में ला दिया है।
अब देखना यह होगा कि बिहार सरकार इन सवालों का जवाब देती है या मामले को नजरअंदाज करने की कोशिश करती है।