भरत तिवारी कथित एनकाउंटर: भोजपुर में महापंचायत, प्रशांत किशोर ने 15 दिन का अल्टीमेटम दिया
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर मामले ने 24 जून 2026 को जनआक्रोश का व्यापक रूप ले लिया, जब स्थानीय मंदिर परिसर में आयोजित महापंचायत सह श्रद्धांजलि सभा में भोजपुर और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े। जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने सभा में चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर न्यायिक जांच की औपचारिक घोषणा नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
महापंचायत का घटनाक्रम
बुधवार, 24 जून को बिलौटी गांव के एक मंदिर परिसर में आयोजित इस सभा में भरत भूषण तिवारी के समर्थन में नारे लगाए गए। वक्ताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग रखी। बिलौटी गांव से लेकर मुख्य सड़क और हाईवे तक भरत तिवारी के पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें उन्हें 'शहीद' बताते हुए इंसाफ की मांग की गई है।
प्रशांत किशोर की मांगें और अल्टीमेटम
जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर पटना से सीधे बिलौटी गांव पहुंचे और भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि कोई भी पुलिसकर्मी बिना ऊपर से आदेश के गोली नहीं चला सकता और इस मामले में पुलिस को कार्रवाई का आदेश किस स्तर से मिला था, इसकी जांच होनी चाहिए।
किशोर ने मांग की कि न्यायिक जांच के दायरे में केवल स्थानीय पुलिस अधिकारी ही नहीं, बल्कि गृह विभाग, डीजीपी और मामले से जुड़े सभी जिम्मेदार अधिकारियों को भी शामिल किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल संबंधित दारोगा और डीएसपी को निलंबित कर देने से न्याय नहीं होता — जनता को न्याय होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए। सरकार को 15 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी गई कि समयसीमा के भीतर ठोस कार्रवाई न हुई तो आंदोलनकारी पटना कूच करेंगे और सरकार का घेराव करेंगे।
सरकार और प्रशासन पर सवाल
सभा को संबोधित करने वाले अन्य वक्ताओं ने भी राज्य सरकार और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। वक्ताओं ने कहा कि भरत भूषण तिवारी और उनके परिवार को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा और जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास का भी घेराव किया जाएगा। समर्थकों का कहना है कि भरत तिवारी जिन मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे थे, उन पर सरकार को जवाब देना चाहिए।
व्यापक सामाजिक और राजनीतिक असर
महापंचायत में भोजपुर और आसपास के जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश के कुछ ब्राह्मण समाज संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए, जो इस मामले के सामाजिक विस्तार को रेखांकित करता है। गौरतलब है कि भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर को लेकर इलाके में पहले से ही तनाव और आक्रोश का माहौल था। महापंचायत के बाद इस मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है और आने वाले दिनों में सियासी हलचल और तेज होने के आसार हैं।
आगे क्या होगा
प्रशांत किशोर द्वारा दिए गए 15 दिन के अल्टीमेटम की समयसीमा समाप्त होने तक सरकार की प्रतिक्रिया इस आंदोलन की दिशा तय करेगी। यदि न्यायिक जांच की घोषणा नहीं हुई तो पटना कूच और सरकार घेराव की चेतावनी को अमल में लाया जा सकता है, जिससे बिहार में राजनीतिक तापमान और बढ़ सकता है।