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भरत तिवारी एनकाउंटर: भोजपुर में पुलिस अधिकारियों पर हत्या की FIR, DSP-थानाध्यक्ष नामजद

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भरत तिवारी एनकाउंटर: भोजपुर में पुलिस अधिकारियों पर हत्या की FIR, DSP-थानाध्यक्ष नामजद

सारांश

भरत तिवारी एनकाउंटर अब सिर्फ विवाद नहीं — आपराधिक मामला बन गया है। माँ आशा देवी के आवेदन पर DSP और थानाध्यक्ष समेत कई पुलिसकर्मियों पर हत्या की FIR दर्ज हुई है। आरोप है कि आत्मसमर्पण के बाद भी पाँच गोलियाँ मारी गईं। पाँच पुलिसकर्मी पहले से निलंबित, अब न्यायिक जांच भी जारी है।

मुख्य बातें

शाहपुर थाना में सोमवार को मृतक भरत तिवारी की माँ आशा देवी के आवेदन पर BNS की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज।
DSP राजेश शर्मा (जगदीशपुर) और थानाध्यक्ष राजेश मालाकार (शाहपुर) नामजद आरोपी।
माँ का आरोप — 17 जून को आत्मसमर्पण के बाद भी भरत तिवारी को पाँच गोलियाँ मारी गईं।
पिता काशीनाथ तिवारी को कथित तौर पर दो दिन थाने में बंद रखा गया।
एनकाउंटर के बाद पाँच पुलिसकर्मी पहले ही निलंबित; जांच इंस्पेक्टर संजीव कुमार को सौंपी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच कराने का आदेश दिया।

बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी उर्फ भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सोमवार को नया और महत्वपूर्ण मोड़ आया, जब मृतक की माँ आशा देवी के आवेदन पर शाहपुर थाना में पुलिस अधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई। 17 जून की मुठभेड़ में भरत तिवारी की मौत के बाद से परिजन और राजनीतिक दल लगातार पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते रहे थे।

किन अधिकारियों पर दर्ज हुई FIR

एफआईआर में जगदीशपुर के एसडीपीओ (डीएसपी) राजेश शर्मा और शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार को नामजद आरोपी बनाया गया है। मुठभेड़ के दौरान मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों को भी एफआईआर में आरोपित किया गया है। मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है और जांच इंस्पेक्टर संजीव कुमार को सौंपी गई है।

माँ का आरोप — आत्मसमर्पण के बाद भी चलाई गोलियाँ

आशा देवी के आवेदन में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उनके अनुसार, 17 जून की सुबह डीएसपी और थानाध्यक्ष के नेतृत्व में पुलिस टीम उनके घर पहुँची और भरत तिवारी को जवईनिया बाढ़ विस्थापित भूमि क्षेत्र में ले गई। आवेदन में दावा किया गया है कि घटनास्थल पर भरत तिवारी ने पुलिस के सामने अपना हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उसे धक्का देकर एक गड्ढे में गिराया और पाँच गोलियाँ मारीं, जिससे उसकी मौत हो गई।

आशा देवी ने यह भी आरोप लगाया है कि भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी को शाहपुर पुलिस ने दो दिनों तक थाने में बंद रखा। गौरतलब है कि भरत तिवारी कथित तौर पर उस क्षेत्र की समस्याओं को फेसबुक लाइव के माध्यम से लगातार उठा रहे थे।

राजनीतिक हलचल और जांच का आदेश

एनकाउंटर के बाद से ही परिजनों, स्थानीय लोगों और विभिन्न राजनीतिक दलों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे, जिससे राज्य की राजनीति गरमा गई थी। बढ़ते विवाद को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने का आदेश दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में पुलिस एनकाउंटर की विश्वसनीयता पहले से ही जांच के दायरे में है।

निलंबन और आगे की कार्रवाई

उल्लेखनीय है कि एनकाउंटर के तत्काल बाद शाहपुर के थानाध्यक्ष राजेश मालाकार समेत पाँच पुलिसकर्मियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। अब हत्या की प्राथमिकी दर्ज होने के बाद इस मामले ने कानूनी रूप से और गंभीर मोड़ ले लिया है। जांच एजेंसियों पर निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर सभी की नजरें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यदि जांच में सिद्ध होता है, तो यह 'एनकाउंटर' की आड़ में न्यायेतर हत्या की श्रेणी में आएगा। मुख्यमंत्री द्वारा सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच का आदेश राजनीतिक दबाव को दर्शाता है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह जांच स्वतंत्र और समयबद्ध होगी। बिहार में पूर्व के एनकाउंटर मामलों में जांच की गति और परिणाम संतोषजनक नहीं रहे हैं — इस बार जनता और न्यायपालिका दोनों की नजर होगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भरत तिवारी एनकाउंटर मामला क्या है?
बिहार के भोजपुर जिले में 17 जून को पुलिस मुठभेड़ में भरत भूषण तिवारी उर्फ भरत तिवारी की मौत हो गई थी। परिजनों और राजनीतिक दलों ने शुरू से इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे।
FIR में किन पुलिस अधिकारियों को नामजद किया गया है?
FIR में जगदीशपुर के DSP राजेश शर्मा और शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार को नामजद आरोपी बनाया गया है। मुठभेड़ में मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों को भी आरोपित किया गया है।
माँ आशा देवी का मुख्य आरोप क्या है?
आशा देवी का आरोप है कि भरत तिवारी ने घटनास्थल पर हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उसे गड्ढे में गिराकर पाँच गोलियाँ मारीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पति काशीनाथ तिवारी को दो दिन थाने में बंद रखा गया।
इस मामले की जांच कौन कर रहा है?
FIR की जांच इंस्पेक्टर संजीव कुमार को सौंपी गई है। इसके अलावा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूरे एनकाउंटर मामले की जांच हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने का अलग आदेश दिया है।
एनकाउंटर के बाद अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
एनकाउंटर के तत्काल बाद शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार समेत पाँच पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। अब हत्या की FIR दर्ज होने के बाद मामला आपराधिक जांच के दायरे में भी आ गया है।
राष्ट्र प्रेस
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