महाराष्ट्र में 17% कम बारिश से सूखे जैसे हालात, फडणवीस सरकार ने शुरू किया पंचनामा
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के कई जिलों में इस मानसून सत्र में 17 फीसदी कम बारिश के कारण सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे अमरावती, विदर्भ और पश्चिम महाराष्ट्र के किसान सबसे अधिक प्रभावित हैं। शिवसेना के प्रवक्ता अरुण सावंत ने 24 सितंबर 2026 को जानकारी दी कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मंत्रियों को प्रभावित इलाकों में भेजा है और एक सप्ताह के भीतर पंचनामा रिपोर्ट आने के बाद मुआवजा देने का निर्णय लिया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
सावंत के अनुसार, कई इलाकों में 51 दिनों से अधिक समय से बारिश नहीं हुई है, जिसके कारण फसलें उपज नहीं सकीं और किसानों की परेशानी चरम पर है। उन्होंने कहा, 'अमरावती, विदर्भ और पश्चिम महाराष्ट्र के कई इलाकों को इससे जूझना पड़ रहा है। किसानों को इससे तकलीफ हो रही है।'
किसानों के मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था की भी चिंता जताई गई है और सरकार ने इस दिशा में भी कदम उठाने का संकेत दिया है।
सरकार की प्रतिक्रिया
सावंत ने बताया कि महायुति सरकार ने कलेक्टर से लेकर तहसीलदार तक सभी अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कर नुकसान का त्वरित पंचनामा तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मंत्री व्यक्तिगत रूप से किसानों से मिलकर उनकी समस्याएँ समझ रहे हैं। उन्होंने कहा, 'महायुति सरकार आपके साथ डटकर खड़ी है।'
विपक्ष पर आरोप
सावंत ने विपक्षी दलों पर सूखे की परिस्थिति का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, 'ऐसे वक्त में जो राजनीति कर रहे हैं, उसे तुरंत बंद कीजिए। नहीं, तो यही किसान आपको आने वाले समय में बाहर का रास्ता दिखा देंगे।' उन्होंने विपक्ष को नेतृत्वहीन भी करार दिया।
SIR विवाद पर सावंत का रुख
सावंत ने चुनाव आयोग (ECI) और एसआईआर (SIR) मामले पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ECI के तीनों चुनाव आयुक्तों ने आपसी मतभेदों के बावजूद सर्वसम्मत प्रक्रिया से एसआईआर पर निर्णय लिया, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था में मत-भिन्नता की गुंजाइश को दर्शाता है। उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे एसआईआर को लेकर जनता में भ्रम फैला रहे हैं।
क्या होगा आगे
सरकार के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर सभी प्रभावित जिलों की पंचनामा रिपोर्ट तैयार होने के बाद मुआवजे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब खरीफ फसल के लिए यह अवधि अत्यंत संवेदनशील मानी जाती है और देरी का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ सकता है।