19 सितंबर 2026
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महाराष्ट्र के सूखे पर CM फडणवीस का बड़ा बयान: किसानों को हर संभव सहायता, 5 अक्टूबर से पंचनामा

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महाराष्ट्र के सूखे पर CM फडणवीस का बड़ा बयान: किसानों को हर संभव सहायता, 5 अक्टूबर से पंचनामा

सारांश

महाराष्ट्र में लंबे समय से बारिश न होने से विदर्भ और मराठवाड़ा की खड़ी फसलें सूख गई हैं। CM फडणवीस ने किसानों को हर संभव मदद का वादा किया है, 5 अक्टूबर से पंचनामा शुरू होगा और NDRF के तहत केंद्रीय राहत का रास्ता खुलेगा — लेकिन असली परीक्षा अमल की गति में है।

मुख्य बातें

CM देवेंद्र फडणवीस ने 19 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार सूखे से प्रभावित किसानों को हर संभव सहायता देगी।
5 अक्टूबर से NDRF के नियमों के तहत पंचनामा (फसल नुकसान का आकलन) शुरू होगा।
फसल ऋण माफी योजना के तहत लाभार्थियों की तीन सूचियाँ पहले ही जारी; शेष सूचियाँ शीघ्र आएंगी।
विदर्भ और मराठवाड़ा के कुछ हिस्सों में खड़ी फसलें सूख गईं; सिंचाई किसानों के लिए शाम की अतिरिक्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी स्थिति की समीक्षा कर किसानों को पूर्ण सहायता का भरोसा दिलाया।
शरद पवार के पत्र का स्वागत करते हुए CM ने मुद्दे को राजनीतिक रंग दिए बिना सहयोग का आश्वासन दिया।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार, 19 सितंबर 2026 को नागपुर से स्पष्ट किया कि लंबे समय से बारिश न होने के कारण राज्य के कई जिलों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं, जिससे फसलों को भारी नुकसान हुआ है और कृषि उत्पादन में गंभीर कमी की आशंका है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार प्रभावित किसानों को हर संभव सहायता प्रदान करेगी।

मुख्य घटनाक्रम और सरकारी कदम

हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में सभी मंत्रियों को अपने-अपने जिलों में फसलों की स्थिति का व्यक्तिगत आकलन करने के निर्देश दिए गए। सरकार अगले सप्ताह प्रारंभिक समीक्षा करेगी, जिसके बाद औपचारिक नुकसान आकलन — पंचनामा — की प्रक्रिया शुरू होगी। 5 अक्टूबर से राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के नियमों के अनुसार फसल नुकसान का पंचनामा किया जाएगा, ताकि केंद्रीय आर्थिक सहायता प्राप्त की जा सके।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि फसल ऋण माफी योजना की प्रक्रिया जारी है। लाभार्थियों की तीन सूचियाँ पहले ही जारी की जा चुकी हैं और शेष सूचियों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

चारा और पेयजल की व्यवस्था

अल नीनो के संभावित प्रभाव को पहले से भाँपते हुए प्रशासन ने चारे की खेती पहले ही शुरू कर दी थी। अब प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत चारा पहुँचाने की व्यवस्था की गई है। पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भी विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि विदर्भ और मराठवाड़ा के कुछ हिस्सों में लंबे समय से वर्षा न होने के कारण खड़ी फसलें सूख गई हैं।

कुएँ से सिंचाई करने वाले किसानों के लिए राज्य सरकार ने शाम के समय अतिरिक्त बिजली आपूर्ति की व्यवस्था की है, ताकि वे अपनी बची हुई फसलों को बचा सकें। सिंगल-फेज बिजली आपूर्ति वाले क्षेत्रों में भी निर्बाध बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

विपक्ष की आलोचना और सरकार की प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों की आलोचना पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि सूखा राहत कार्यों के लिए सरकारी प्रस्ताव (GR) और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) पहले से निर्धारित हैं। उन्होंने कहा कि NDRF से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए इन तय दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य है, और साथ ही राज्य सरकार अपने स्तर पर भी किसानों को सहायता पहुँचा रही है।

यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राज्य में सूखा घोषित करने और तत्काल राहत राशि देने की माँग की थी। शनिवार को उनके पत्र का स्वागत करते हुए फडणवीस ने कहा कि राज्य प्रशासन इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दिए बिना सकारात्मक सुझावों को अपनाने के लिए तैयार है।

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का आश्वासन

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी महाराष्ट्र में वर्षा की स्थिति की समीक्षा की और सूखे से प्रभावित किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार उन्हें अकेला नहीं छोड़ेगी। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में पूरी सहायता सुनिश्चित की जाएगी। शिंदे ने स्पष्ट किया कि फसलों को हुए वास्तविक नुकसान के आधार पर ही सहायता दी जाएगी और इसके लिए पंचनामे की प्रक्रिया जारी है।

आगे की राह

सरकार की अगले सप्ताह प्रारंभिक समीक्षा और 5 अक्टूबर से शुरू होने वाले पंचनामे की प्रक्रिया यह तय करेगी कि किसानों को केंद्रीय सहायता कितनी जल्दी मिल पाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि विदर्भ और मराठवाड़ा में कृषि संकट की गहराई पंचनामे के नतीजों के बाद ही स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन महाराष्ट्र में सूखा राहत की असली रफ्तार हमेशा घोषणाओं से पीछे रही है — पंचनामे से लेकर NDRF की मंजूरी और फिर किसान के खाते तक पैसा पहुँचने में महीनों लग जाते हैं। शरद पवार के पत्र का राजनीतिक स्वागत करना और साथ ही 'GR और SOP के दायरे में रहने' की बात करना एक सावधानीपूर्ण संतुलन है — इसका अर्थ यह भी है कि अतिरिक्त विवेकाधीन राहत की जगह सीमित है। विदर्भ और मराठवाड़ा बार-बार कृषि संकट की चपेट में आते हैं; ऋण माफी सूचियों की 'तीन किस्तें' और 'बाकी जल्द' वाली भाषा बताती है कि वादे अभी भी पूरी तरह अमल में नहीं आए हैं।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति कितनी गंभीर है?
महाराष्ट्र के कई जिलों में लंबे समय से बारिश न होने के कारण सूखे जैसे हालात बन गए हैं। विदर्भ और मराठवाड़ा के कुछ हिस्सों में खड़ी फसलें सूख गई हैं और कृषि उत्पादन में कमी की गंभीर आशंका है।
पंचनामा कब और कैसे होगा?
5 अक्टूबर 2026 से NDRF के नियमों के अनुसार फसल नुकसान का औपचारिक आकलन — पंचनामा — शुरू होगा। इस पंचनामे के आधार पर केंद्र सरकार से आर्थिक सहायता प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा।
किसानों को तुरंत क्या राहत मिल रही है?
सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत चारा पहुँचाने और पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के कदम उठाए हैं। कुएँ से सिंचाई करने वाले किसानों के लिए शाम के समय अतिरिक्त बिजली आपूर्ति की व्यवस्था भी की गई है ताकि वे बची हुई फसलें बचा सकें।
फसल ऋण माफी योजना का क्या हाल है?
राज्य सरकार की फसल ऋण माफी योजना के तहत लाभार्थियों की तीन सूचियाँ पहले ही जारी की जा चुकी हैं। CM फडणवीस ने कहा है कि शेष सूचियाँ शीघ्र पूरी की जाएंगी ताकि सभी पात्र किसानों को सहायता मिल सके।
शरद पवार की माँग पर सरकार का क्या रुख है?
NCP (शरद पवार गुट) प्रमुख शरद पवार ने पत्र लिखकर सूखा घोषित करने और तत्काल राहत राशि देने की माँग की थी। CM फडणवीस ने पत्र का स्वागत किया और कहा कि राज्य प्रशासन मुद्दे को राजनीतिक रंग दिए बिना सकारात्मक सुझावों को अपनाने के लिए तैयार है, लेकिन NDRF की प्रक्रिया के अनुसार ही केंद्रीय सहायता मिल सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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