सूखा बैठक में काजू-बादाम विवाद: CM फडणवीस ने कहा — संकट में संवेदनशीलता ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के नांदेड़ में 19 सितंबर 2026 को मराठवाड़ा के गंभीर कृषि संकट की समीक्षा के लिए बुलाई गई एक आधिकारिक बैठक उस समय विवादों में घिर गई, जब बैठक के दौरान मंत्रियों, नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों को काजू-बादाम खाते हुए दिखाने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। सूखे से तबाह किसानों की पीड़ा के बीच यह दृश्य सामने आने पर जनता में तीखी नाराज़गी उभरी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में मीडिया से बात करते हुए प्रशासन को संकट के समय अधिक संवेदनशीलता बरतने की सलाह दी।
विवाद की पृष्ठभूमि
बैठक जिला नियोजन भवन, नांदेड़ में आयोजित की गई थी, जिसका उद्देश्य मराठवाड़ा क्षेत्र में फसलों को हुए नुकसान और कृषि संकट की स्थिति का आकलन करना था। जैसे ही बैठक का वीडियो सार्वजनिक हुआ, वैसे ही प्रशासनिक संवेदनहीनता के आरोप लगने लगे। गौरतलब है कि मराठवाड़ा महाराष्ट्र का वह क्षेत्र है जो पिछले कई वर्षों से अनियमित मानसून और पानी की कमी से जूझता रहा है।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि आधिकारिक बैठकों में ड्राई फ्रूट्स उपलब्ध कराना सामान्य प्रशासनिक परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा, 'आधिकारिक बैठकों में ड्राई फ्रूट्स उपलब्ध कराना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। कोई भी सूखे की स्थिति का मज़ाक उड़ाने के लिए जानबूझकर ऐसा नहीं करता। हालांकि, प्रशासन को ज़मीनी हालात को ध्यान में रखकर अधिक संवेदनशीलता से काम करना चाहिए। ऐसी परिस्थितियों में इस तरह की व्यवस्था से बचना चाहिए।' फडणवीस की यह स्वीकृति कि ऐसी व्यवस्था से बचना चाहिए था, विपक्ष के लिए एक खुला द्वार बन गई।
शिवसेना मंत्री का बयान
शिवसेना के मंत्री संजय शिरसाट पहले से तय कार्यक्रमों के कारण इस बैठक में शामिल नहीं हुए थे। उन्होंने कहा, 'मैं पहले से तय कार्यक्रमों के कारण बैठक में शामिल नहीं हुआ। कृषि मंत्री दत्ता भरणे उपस्थित अधिकारियों के साथ जिम्मेदारी संभाल रहे थे। काजू-बादाम की व्यवस्था अधिकारी करते हैं, लेकिन जनता की आलोचना जनप्रतिनिधियों को झेलनी पड़ती है। मैं इस मामले में संभागीय आयुक्त को सख्त निर्देश दूंगा।' शिरसाट की टिप्पणी ने अप्रत्यक्ष रूप से यह संकेत दिया कि ज़िम्मेदारी प्रशासनिक तंत्र पर है, न कि जनप्रतिनिधियों पर।
विपक्ष का हमला
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्यभर में सूखे का संकट बेहद गंभीर है, लेकिन सरकार कोई गंभीरता नहीं दिखा रही और काजू-बादाम खाने में व्यस्त है। उन्होंने माँग की कि राज्य सरकार को सूखे की स्थिति पर चर्चा करने और किसानों को ठोस राहत देने के लिए तुरंत विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब मराठवाड़ा में लगातार दूसरे वर्ष फसल नुकसान के आँकड़े चिंताजनक हैं।
राहत उपायों की घोषणा
मुख्यमंत्री फडणवीस ने विवाद के बीच सरकार के आपात राहत कदमों का भी ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि कैबिनेट मंत्रियों को अपने-अपने जिलों में ज़मीनी स्तर पर स्थिति की समीक्षा करने की ज़िम्मेदारी दी गई है और शुरुआती समीक्षा व नुकसान के आकलन एक सप्ताह के भीतर पूरे किए जाएंगे, ताकि आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया तेज़ की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि कर्ज़माफी की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और लाभार्थियों की तीन सूचियाँ पहले ही जारी हो चुकी हैं, बाकी प्राथमिकता के आधार पर तैयार की जा रही हैं।
अल नीनो के खतरे के मद्देनज़र शुरू किए गए चारा विकास कार्यक्रम के तहत अधिक प्रभावित इलाकों में पशुओं के लिए चारे और पीने के पानी की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा, खड़ी फसलों को बचाने के लिए शाम के समय अतिरिक्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है — विशेषकर उन सिंगल-फेज क्षेत्रों में जहाँ कुओं में अभी भी पानी उपलब्ध है। प्रमुख जलाशयों में मौजूद पानी को पीने के लिए संरक्षित रखा जा रहा है, ताकि आगामी महीनों में जल संकट न गहराए।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि संकट प्रबंधन में नीतिगत घोषणाओं से परे प्रतीकात्मक संवेदनशीलता भी उतनी ही ज़रूरी है — विशेषकर तब, जब जन-भावना और मीडिया की नज़र दोनों एक साथ तेज़ हों।