महाराष्ट्र ईंधन संकट: CM फडणवीस की कालाबाजारी पर कड़ी चेतावनी, किसानों को डीजल आपूर्ति के निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार, 23 मई को शिरडी में पत्रकारों से बात करते हुए स्वीकार किया कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति बाधित हुई है। उन्होंने बताया कि कुछ क्षेत्रों में ईंधन की मांग में अचानक 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो कृत्रिम कमी या जमाखोरी का संकेत हो सकती है।
मुख्यमंत्री की चेतावनी और निर्देश
फडणवीस ने कृषि जरूरतों की आड़ में ईंधन की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों और संभागीय आयुक्तों को निर्देश दिया है कि स्थिति पर कड़ी नजर रखी जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसानों को आगामी फसल के लिए डीजल की निर्बाध आपूर्ति मिलती रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा, 'हम अपने वार्षिक ईंधन खपत के पैटर्न पर बारीकी से नजर रखते हैं। जब कुछ क्षेत्रों में मांग में अप्रत्याशित रूप से 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि होती है, तो यह कुछ गड़बड़ का संकेत देता है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि जमाखोरी या घबराहट में खरीदारी के कारण वास्तविक किसानों को परेशानी न हो।'
राशनिंग प्रोटोकॉल लागू
आपूर्ति असंतुलन से निपटने के लिए कई जिला कलेक्टरों ने पहले ही राशनिंग प्रोटोकॉल लागू कर दिए हैं। इसके तहत थोक डीजल वितरित करने से पहले वाहन पंजीकरण प्रमाण पत्र की जांच अनिवार्य की गई है। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि इस सत्यापन प्रक्रिया को अन्य प्रभावित जिलों में भी लागू किया जा सकता है।
संकट की पृष्ठभूमि
यह स्थिति ऐसे समय में उत्पन्न हुई है जब पश्चिम एशिया के ऊर्जा संकट से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला संबंधी चिंताओं के कारण मई के पहले पखवाड़े में व्यापक अफरा-तफरी देखी गई। मांग में अचानक आई इस उछाल ने स्थानीय आपूर्ति तंत्र पर भारी दबाव डाला है, जिसके चलते ग्रामीण जिलों के कई पेट्रोल पंप अस्थायी रूप से खाली हो गए। गौरतलब है कि यह संकट खरीफ बुवाई के मौसम की दहलीज पर आया है, जब किसानों को सिंचाई और कृषि मशीनरी के लिए डीजल की सर्वाधिक जरूरत होती है।
सरकार का आश्वासन
इससे एक दिन पहले, शुक्रवार को महाराष्ट्र के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने जनता को आश्वस्त किया था कि राज्य में पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है। हालाँकि, मुख्यमंत्री का शनिवार का बयान इस बात की पुष्टि करता है कि ग्रामीण स्तर पर वितरण व्यवस्था में गंभीर खामियाँ बनी हुई हैं।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार जिला स्तर पर वाहन-आधारित सत्यापन प्रणाली को व्यापक रूप से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान जारी रहा, तो राज्य को केंद्र सरकार से अतिरिक्त आवंटन की माँग करनी पड़ सकती है। किसान संगठनों की नजर अब इस बात पर है कि सरकार के निर्देश जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से अमल में आते हैं।