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महाराष्ट्र में ईंधन संकट: CM फडणवीस ने जमाखोरों को दी कड़ी चेतावनी, संभाजीनगर में 363 पंप बंद

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महाराष्ट्र में ईंधन संकट: CM फडणवीस ने जमाखोरों को दी कड़ी चेतावनी, संभाजीनगर में 363 पंप बंद

सारांश

महाराष्ट्र में ईंधन की किल्लत और कीमतों में लगातार चार बार की बढ़ोतरी के बीच CM फडणवीस ने जमाखोरों को कड़ी चेतावनी दी है। संभाजीनगर में कथित तौर पर 363 पंप बंद, जलगांव में लंबी कतारें — और बुवाई के मौसम में डीजल न मिलने से किसान सबसे ज़्यादा प्रभावित।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 25 मई को ईंधन जमाखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार चार बार बढ़ोतरी को वैश्विक संकट का परिणाम बताया गया।
संभाजीनगर में कथित तौर पर 363 पेट्रोल पंप बंद; पंप मालिक संघ ने 60 पंपों के बंद होने की पुष्टि की।
सभी जिला कलेक्टरों को ईंधन आपूर्ति निगरानी और जमाखोरी रोकने के निर्देश जारी।
NCP (SP) विधायक रोहित पवार ने कहा — डीजल न मिलने से बुवाई के मौसम में कृषि कार्य ठप्प ।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार, 25 मई को स्पष्ट चेतावनी दी कि पेट्रोल और डीजल की जमाखोरी करते पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ राज्य सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब महाराष्ट्र के कई जिलों में ईंधन की किल्लत की आशंकाएँ तेज़ हो रही हैं और संभाजीनगर जिले में कथित तौर पर 363 पेट्रोल पंप बंद हो गए हैं।

मुख्यमंत्री की अपील और प्रशासनिक निर्देश

मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, 'मैं नागरिकों से आग्रह करता हूँ कि वे घबराकर पेट्रोल और डीजल की जमाखोरी न करें।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार चार बार की बढ़ोतरी मौजूदा वैश्विक संकट का सीधा परिणाम है। मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को पहले ही ईंधन आपूर्ति प्रबंधन के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी कर दिए हैं। कलेक्टरों को आदेश दिया गया है कि जमाखोरी पर पूरी तरह रोक लगाई जाए और डीजल का वितरण आवश्यकता के अनुसार व्यवस्थित रूप से किया जाए।

कृषि कार्यों पर असर और ज़मीनी स्थिति

फडणवीस ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि बुवाई के मौसम में कई किसान डीजल पर अत्यधिक निर्भर हैं, इसलिए कलेक्टरों को स्थिति पर कड़ी निगरानी रखने और सुनियोजित वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ छिटपुट क्षेत्रों में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हुई है, लेकिन यह घबराहट व्यापक नहीं है। उनके अनुसार, 'छिटपुट क्षेत्रों में हुई घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है, हालांकि हम यह सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं कि ऐसी छोटी-मोटी घटनाएँ भी न हों।'

संभाजीनगर में पंप बंद, जलगांव में लंबी कतारें

संभाजीनगर जिले से मिली रिपोर्टों के अनुसार ईंधन की कमी के कारण कथित तौर पर 363 पेट्रोल पंप बंद हो गए हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालाँकि, पेट्रोल पंप मालिक संघ ने स्पष्ट किया है कि उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले 60 पेट्रोल पंपों ने परिचालन बंद किया है। जलगांव जिले में भी ईंधन का स्टॉक खत्म होने के कारण पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगने की सूचना है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है।

विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) — NCP (SP) — के विधायक रोहित पवार ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उत्पादन स्रोत से ही डीजल और पेट्रोल की आपूर्ति न होने के कारण किसानों को पेट्रोल पंपों पर डीजल नहीं मिल रहा, जिससे बुवाई के मौसम की शुरुआत में ही कृषि कार्य ठप्प हो गया है। रोहित पवार ने आरोप लगाया कि पूरे राज्य में स्थिति एक जैसी है, लेकिन राज्य सरकार अभी तक इस पर समुचित ध्यान नहीं दे पाई है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों की कथित असंवेदनशीलता की तुलना 'रोम के जलने पर नीरो के बाँसुरी बजाने' से की।

आगे क्या होगा

सरकारी सूत्रों के अनुसार जिला कलेक्टरों की निगरानी में ईंधन वितरण को व्यवस्थित करने की कोशिश जारी है। गौरतलब है कि बुवाई का मौसम शुरू होने के साथ डीजल की माँग स्वाभाविक रूप से बढ़ती है, ऐसे में आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी व्यवधान का सीधा असर कृषि उत्पादकता पर पड़ सकता है। राज्य सरकार की अगली कार्रवाई और जिला-स्तरीय रिपोर्टें आने वाले दिनों में स्थिति की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जब आपूर्ति श्रृंखला ही टूटी हो तो जमाखोरी पर कार्रवाई कितनी कारगर होगी। संभाजीनगर में 363 बनाम 60 पंप बंद होने के आँकड़ों का विरोधाभास बताता है कि ज़मीनी स्थिति और सरकारी बयान के बीच खाई है। बुवाई के मौसम में डीजल की किल्लत सिर्फ़ परिवहन समस्या नहीं — यह सीधे खरीफ उत्पादन को खतरे में डालती है, जिसका असर महीनों बाद खाद्य कीमतों पर दिखेगा। जब तक आपूर्ति श्रृंखला की जड़ — यानी उत्पादन स्रोत से वितरण तक की कड़ी — दुरुस्त नहीं होती, तब तक प्रशासनिक निर्देश केवल लक्षण-उपचार बनकर रह जाएँगे।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में ईंधन की कमी का मुख्य कारण क्या है?
मुख्यमंत्री फडणवीस के अनुसार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार चार बार की बढ़ोतरी मौजूदा वैश्विक संकट का सीधा परिणाम है। इसके साथ ही विपक्षी विधायक रोहित पवार का आरोप है कि उत्पादन स्रोत से ही आपूर्ति बाधित है।
संभाजीनगर में कितने पेट्रोल पंप बंद हुए हैं?
रिपोर्टों के अनुसार संभाजीनगर जिले में कथित तौर पर 363 पेट्रोल पंप बंद हो गए हैं। हालाँकि पेट्रोल पंप मालिक संघ ने स्पष्ट किया है कि उनके अधिकार क्षेत्र में 60 पंपों ने परिचालन बंद किया है।
CM फडणवीस ने जिला कलेक्टरों को क्या निर्देश दिए हैं?
मुख्यमंत्री ने सभी जिला कलेक्टरों को ईंधन आपूर्ति पर कड़ी निगरानी रखने, जमाखोरी रोकने और डीजल का वितरण आवश्यकता के अनुसार व्यवस्थित रूप से करने के निर्देश दिए हैं। कृषि कार्यों में डीजल की अत्यधिक निर्भरता को देखते हुए सुनियोजित वितरण सुनिश्चित करने पर विशेष ज़ोर दिया गया है।
किसानों पर ईंधन संकट का क्या असर पड़ रहा है?
बुवाई के मौसम की शुरुआत में डीजल न मिलने से कृषि कार्य ठप्प होने की खबरें हैं। NCP (SP) विधायक रोहित पवार ने कहा कि जलगांव सहित कई जिलों में किसानों को पेट्रोल पंपों पर डीजल नहीं मिल रहा, जिससे खेती का काम प्रभावित हो रहा है।
विपक्ष ने महाराष्ट्र सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
NCP (SP) विधायक रोहित पवार ने आरोप लगाया है कि पूरे राज्य में ईंधन संकट की स्थिति एक जैसी है, लेकिन राज्य सरकार ने समय पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों की कथित असंवेदनशीलता की तुलना 'रोम के जलने पर नीरो के बाँसुरी बजाने' से की।
राष्ट्र प्रेस
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