18 सितंबर 2026
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महाराष्ट्र सूखा संकट: फडणवीस बोले — सरकार तैयार है, पवार के सुझावों का स्वागत

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महाराष्ट्र सूखा संकट: फडणवीस बोले — सरकार तैयार है, पवार के सुझावों का स्वागत

सारांश

महाराष्ट्र में सूखे का संकट राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों मोर्चों पर गर्म है। शरद पवार के पत्र के जवाब में CM फडणवीस ने सरकारी तैयारी का भरोसा दिलाया, लेकिन तत्काल सूखा घोषणा पर चुप्पी बरकरार है। किसानों के लिए ₹50,000 प्रति हेक्टेयर की माँग अभी भी लंबित है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 18 सितंबर 2026 को कहा कि महाराष्ट्र सरकार सूखे से निपटने के लिए पूरी तरह सक्रिय है।
NDRF प्रोटोकॉल के तहत 5 अक्टूबर से फसल क्षति आकलन (पंचनामा) केंद्र को भेजे जाएंगे।
कृषि ऋण माफी कार्यक्रम के तहत तीन लाभार्थी सूचियाँ प्रकाशित; अतिरिक्त सूचियाँ तैयार हो रही हैं।
विदर्भ और मराठवाड़ा में सोयाबीन, कपास, बाजरा सहित कई फसलें बर्बाद; कीट प्रकोप भी बढ़ा।
शरद पवार ने ₹50,000 प्रति हेक्टेयर किसान सहायता और भूमिहीन मज़दूरों के लिए ₹25,000 के पैकेज की माँग की।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पूर्ण सरकारी सहायता का आश्वासन दिया।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार सूखे की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सक्रिय है और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) व समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख शरद पवार के सुझावों का रचनात्मक स्वागत करती है। फडणवीस ने यह बयान पवार के उस पत्र के जवाब में दिया, जिसमें महाराष्ट्र में सूखे जैसी स्थिति पर तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की माँग की गई थी।

कैबिनेट बैठक में हुई औपचारिक चर्चा

मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में सूखे की समग्र स्थिति और संभावित वित्तीय सहायता पर विस्तृत चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का कृषि ऋण माफी कार्यक्रम सक्रिय रूप से लागू है और तीन लाभार्थियों की सूचियाँ पहले ही प्रकाशित की जा चुकी हैं।

सभी पात्र किसानों को सहायता सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त सूचियाँ तैयार की जा रही हैं। इसके साथ ही, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) प्रोटोकॉल के अनुसार 5 अक्टूबर से किए गए फसल क्षति आकलन (पंचनामा) केंद्रीय वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए प्रस्तुत किए जाएँगे।

चारा शिविर और पेयजल व्यवस्था

फडणवीस ने यह भी बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में चारा शिविरों और पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासन इस मुद्दे का राजनीतिकरण किए बिना हर रचनात्मक सुझाव को शामिल करने के लिए तत्पर है।

उपमुख्यमंत्री शिंदे का आश्वासन

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र में वर्षा की स्थिति की समीक्षा करते हुए सूखाग्रस्त किसानों को आश्वस्त किया कि सरकार पूर्ण सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने स्वीकार किया कि विदर्भ और मराठवाड़ा के कुछ हिस्सों में सूखे के कारण खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं।

शिंदे ने बताया कि वास्तविक नुकसान के आधार पर सहायता वितरित करने के लिए फसल क्षति का आकलन किया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब मराठवाड़ा और विदर्भ में अपर्याप्त मानसून ने कृषि संकट को गहरा बना दिया है।

पवार की माँगें और जमीनी हकीकत

पवार ने अपने पत्र में खड़ी फसलों की बर्बादी, पेयजल की कमी और पशुओं के लिए चारे की तंगी पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस वर्ष राज्य के अधिकांश हिस्सों में पर्याप्त वर्षा न होने के कारण सोयाबीन, कपास, बाजरा, मक्का, अरहर, मूंग और उड़द जैसी फसलें सूख गई हैं और कीटों का प्रकोप भी बढ़ा है।

पवार ने औपचारिक प्रक्रियात्मक मानदंडों को दरकिनार करते हुए तत्काल सूखा घोषित करने, सबसे अधिक प्रभावित तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित करने और राहत उपाय बिना विलंब लागू करने की माँग की। उन्होंने प्रभावित किसानों के लिए कम से कम ₹50,000 प्रति हेक्टेयर की वित्तीय सहायता, भूमिहीन कृषि श्रमिक परिवारों के लिए ₹25,000 का विशेष सहायता पैकेज और नई फसल के लिए ऋण सुनिश्चित करने हेतु कृषि ऋण माफी को तत्काल लागू करने की भी माँग की।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति हर कुछ वर्षों में एक बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती बनकर उभरती है। NDRF प्रोटोकॉल के तहत पंचनामा प्रक्रिया पूरी होने के बाद केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता की उम्मीद जताई जा रही है। राज्य सरकार के अगले कदम — विशेषकर सूखा घोषणा और राहत वितरण की समयसीमा — तय करेंगे कि किसानों तक सहायता कितनी जल्दी पहुँचती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पवार की सबसे ज़रूरी माँग — तत्काल सूखा घोषणा — पर सरकार की चुप्पी उल्लेखनीय है। NDRF पंचनामा 5 अक्टूबर से शुरू होगा, यानी केंद्रीय सहायता में और हफ्तों की देरी तय है — जबकि खेत अभी सूख रहे हैं। महाराष्ट्र में सूखा राहत की यह धीमी प्रशासनिक प्रक्रिया नई नहीं है; 2018-19 और 2023 में भी यही पैटर्न देखा गया था जब राहत देर से आई और किसानों का नुकसान हो चुका था। असली सवाल यह है कि ₹50,000 प्रति हेक्टेयर की माँग पर सरकार का रुख कब स्पष्ट होगा।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति पर सरकार क्या कदम उठा रही है?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अनुसार, राज्य सरकार ने कृषि ऋण माफी कार्यक्रम सक्रिय किया है, चारा शिविर और पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था की जा रही है, और NDRF प्रोटोकॉल के तहत 5 अक्टूबर से फसल नुकसान का पंचनामा केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
शरद पवार ने महाराष्ट्र सूखे पर क्या माँगें रखी हैं?
पवार ने तत्काल सूखा घोषणा, प्रभावित किसानों को ₹50,000 प्रति हेक्टेयर सहायता, भूमिहीन कृषि मज़दूरों के लिए ₹25,000 का विशेष पैकेज और कृषि ऋण माफी को तत्काल लागू करने की माँग की है। उन्होंने औपचारिक प्रक्रियाओं को दरकिनार कर बिना विलंब राहत देने पर जोर दिया।
महाराष्ट्र के किन क्षेत्रों में सूखे का सबसे अधिक असर है?
विदर्भ और मराठवाड़ा सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र हैं, जहाँ सोयाबीन, कपास, बाजरा, मक्का, अरहर, मूंग और उड़द जैसी खड़ी फसलें सूख गई हैं। इन क्षेत्रों में पेयजल की कमी और पशुओं के लिए चारे की तंगी भी गंभीर समस्या बन गई है।
NDRF पंचनामा क्या है और इससे किसानों को कैसे मदद मिलेगी?
NDRF (राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष) प्रोटोकॉल के तहत फसल क्षति का आकलन पंचनामा कहलाता है। 5 अक्टूबर से शुरू होने वाले इन पंचनामों को केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा, जिसके आधार पर केंद्रीय वित्तीय सहायता जारी की जाएगी।
कृषि ऋण माफी कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति क्या है?
मुख्यमंत्री फडणवीस के अनुसार, कृषि ऋण माफी कार्यक्रम सक्रिय रूप से लागू है और तीन लाभार्थी सूचियाँ पहले ही प्रकाशित की जा चुकी हैं। सभी पात्र किसानों को लाभ मिले, इसके लिए अतिरिक्त सूचियाँ तैयार की जा रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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