टीटीडी घी मिलावट मामला: ईडी ने सुकृति फूड्स के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को गिरफ्तार किया
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) को घी आपूर्ति में मिलावट के बहुचर्चित मामले में सुकृति फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर कैलाश चंद मंगला को गिरफ्तार किया है। मंगला को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत गुरुवार को हिरासत में लिया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, 2019 से 2024 के बीच टीटीडी को धोखाधड़ी से की गई घी आपूर्ति का कुल मूल्य कथित तौर पर लगभग ₹230 करोड़ था।
न्यायालय में पेशी और न्यायिक हिरासत
गिरफ्तारी के बाद कैलाश चंद मंगला को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्थित विशेष न्यायालय (पीएमएलए) के समक्ष पेश किया गया। न्यायालय ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। ईडी ने शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में इस घटनाक्रम की पुष्टि की।
मुख्य घटनाक्रम: मिलावटी घी का निर्माण कैसे हुआ
ईडी जांचकर्ताओं के अनुसार, मिलावटी घी कथित तौर पर परिष्कृत ताड़ के तेल, ताड़ के बीज के तेल, पामोलिन और एमजी-90, मोनोग्लिसराइड्स, मायवेसेट सॉफ्ट 400 तथा एसिटिक एसिड एस्टर जैसे रसायनों के मिश्रण से तैयार किया गया था। इस उत्पाद को बाद में एगमार्क स्पेशल ग्रेड गाय के घी के रूप में प्रस्तुत कर टीटीडी को आपूर्ति की गई, जिसका उपयोग मंदिर की धार्मिक अनुष्ठान प्रक्रियाओं में होता है।
जांच में सामने आया कि मंगला द्वारा निर्मित मिलावटी घी का मूल्य कथित तौर पर लगभग ₹96 करोड़ था, जो कुल ₹230 करोड़ की धोखाधड़ी आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
फर्जी कंपनियों का जाल और रिकॉर्ड में हेराफेरी
ईडी के अनुसार, मंगला ने श्री वैश्नवी डेयरी स्पेशलिटीज प्राइवेट लिमिटेड, मालगंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और ए.आर. डेयरी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड सहित कई फर्जी कंपनियों का उपयोग करते हुए मिलावटी घी की आपूर्ति का समन्वय किया। इन कंपनियों के ज़रिये असली गाय के घी के वैध उत्पादन और आपूर्ति का भ्रम उत्पन्न किया जाता था।
जांचकर्ताओं ने यह भी पाया कि मंगला ने घी और परिष्कृत ताड़ के तेल की खरीद-बिक्री से जुड़े फर्जी रिकॉर्ड तैयार किए और उन्हें बनाए रखा, ताकि मिलावट की वास्तविक प्रकृति को छिपाया जा सके।
जांच का आधार और आरोप
ईडी ने यह जांच तिरुपति पूर्व पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। इस एफआईआर में टीटीडी को मिलावटी घी की फर्जी आपूर्ति से संबंधित आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ईडी के मुताबिक, मंगला इस मामले में सह-साजिशकर्ताओं में से एक था और उसने मिलावट की सामग्री की खरीद और अपने कारखाने में मिलावटी घी के उत्पादन में सक्रिय भूमिका निभाई। गौरतलब है कि यह मामला टीटीडी की धार्मिक प्रतिष्ठा और तिरुपति बालाजी मंदिर में चढ़ाए जाने वाले प्रसाद की पवित्रता से सीधे जुड़ा होने के कारण देशभर में व्यापक आक्रोश का विषय बना रहा है।
आगे क्या होगा
ईडी की जांच अभी जारी है और इस मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। विशेष पीएमएलए न्यायालय में आगे की सुनवाई में मंगला की न्यायिक हिरासत की अवधि पर निर्णय होगा। धार्मिक संस्थाओं से जुड़े इस मामले में दोषसिद्धि की स्थिति में आरोपियों को पीएमएलए के तहत कड़ी सज़ा का सामना करना पड़ सकता है।