ईडी ने जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स और एमडी किशन मोदी के खिलाफ PMLA के तहत आरोप पत्र दाखिल किया
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय ने 11 मई 2026 को जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रबंध निदेशक किशन मोदी के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों के तहत आधिकारिक आरोप पत्र दाखिल किया। भोपाल स्थित विशेष PMLA न्यायालय ने पूर्व संज्ञान सुनवाई के बाद इन आरोपों का औपचारिक संज्ञान लिया है। यह मामला डेयरी उद्योग में बड़े पैमाने पर मिलावट और संगठित वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ा है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला हबीबगंज पुलिस थाने और भोपाल की आर्थिक अपराध शाखा में कंपनी के निदेशकों और अधिकारियों के खिलाफ दर्ज कई प्राथमिकी (FIR) से उत्पन्न हुआ। जाँच में सामने आया कि कंपनी अपने मिल्क मैजिक ब्रांड के तहत मिलावटी डेयरी उत्पाद निर्मित और वितरित कर रही थी। ईडी ने जाँच के शुरुआती चरण में आरोपियों से जुड़ी अचल संपत्तियों को जब्त करने के लिए एक अस्थायी कुर्की आदेश भी जारी किया था।
मिलावट और धोखाधड़ी का तरीका
ईडी के अनुसार, कंपनी ने डेयरी उत्पादों में प्राकृतिक मिल्क फैट की जगह पाम ऑयल और अन्य हानिकारक पदार्थों का उपयोग किया। ये मिलावटी उत्पाद न केवल घरेलू बाज़ारों में व्यापक रूप से वितरित किए गए, बल्कि विदेशों में भी निर्यात किए गए — जिससे उपभोक्ताओं के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न हुआ। जाँच में यह भी पता चला कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुगम बनाने के लिए कंपनी ने प्रतिष्ठित संस्थानों से कथित तौर पर प्राप्त जाली प्रयोगशाला परीक्षण रिपोर्टें निर्यात निरीक्षण एजेंसी को प्रस्तुत की थीं। संबंधित प्रयोगशालाओं ने जाँच के दौरान पुष्टि की कि ये रिपोर्टें वास्तव में मनगढ़ंत थीं।
आपराधिक आय और मनी लॉन्ड्रिंग
ईडी के अनुसार, मिलावटी उत्पादों के धोखाधड़ीपूर्ण निर्यात के ज़रिए कंपनी ने लगभग ₹19.69 करोड़ की आपराधिक आय अर्जित की। यह राशि विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरित की गई और इसे PMLA के तहत औपचारिक रूप से आपराधिक आय (Proceeds of Crime) के रूप में मान्यता दी गई है। गौरतलब है कि इस प्रकार की संगठित खाद्य मिलावट और उससे जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में ईडी की कार्रवाई हाल के वर्षों में तेज़ हुई है।
न्यायालय की कार्रवाई और आगे की राह
भोपाल स्थित विशेष PMLA न्यायालय द्वारा आरोपों का संज्ञान लिए जाने के बाद अब मामले की नियमित सुनवाई शुरू होगी। यह मामला खाद्य सुरक्षा और वित्तीय अपराध — दोनों मोर्चों पर एक साथ लड़ी जा रही कानूनी लड़ाई का उदाहरण है, और आने वाले समय में इसके नतीजे डेयरी उद्योग में नियामक सख्ती की दिशा तय कर सकते हैं।