29 जुलाई 2026
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पलानी मंदिर भूमि घोटाला: सीबीसीआईडी ने ₹100 करोड़ की धोखाधड़ी में चार आरोपी गिरफ्तार किए

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पलानी मंदिर भूमि घोटाला: सीबीसीआईडी ने ₹100 करोड़ की धोखाधड़ी में चार आरोपी गिरफ्तार किए

सारांश

तमिलनाडु सीबीसीआईडी ने पलानी के दंडपाणि स्वामी मठ की ₹100 करोड़ मूल्य की भूमि को जाली दस्तावेजों से निजी नामों पर ट्रांसफर कराने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। 82 लोगों से पूछताछ के बाद हुई इस गिरफ्तारी में सरकारी अधिकारियों की संलिप्तता की भी जांच जारी है।

मुख्य बातें

सीबीसीआईडी ने 29 जुलाई को पलानी मंदिर भूमि घोटाले में चार आरोपियों — वेल्लाथुराई, अनवरदीन, मुरुगाडोस और सेतुपति — को गिरफ्तार किया।
मामला डिंडीगुल जिले के दंडपाणि स्वामी मठ की लगभग ₹100 करोड़ मूल्य की भूमि के कथित जालसाजीपूर्ण हस्तांतरण से जुड़ा है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, अदालती आदेशों के बावजूद जाली दस्तावेजों के माध्यम से संपत्ति निजी व्यक्तियों के नाम की गई।
जांच के दौरान अब तक 82 लोगों से पूछताछ हो चुकी है, जिनमें पंजीकरण अधिकारी, दलाल और प्रशासनिक कर्मचारी शामिल हैं।
सब-रजिस्ट्रार जस्टिन मणिकंदन सहित सरकारी अधिकारियों की भूमिका की जांच जारी है; और गिरफ्तारियों की संभावना बनी हुई है।

तमिलनाडु की क्राइम ब्रांच-क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीबीसीआईडी) ने 29 जुलाई को डिंडीगुल जिले के प्रसिद्ध पलानी मंदिर से संबद्ध दंडपाणि स्वामी मठ की लगभग ₹100 करोड़ मूल्य की भूमि के कथित धोखाधड़ीपूर्ण हस्तांतरण मामले में चार व्यक्तियों को गिरफ्तार किया। जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपियों ने जाली दस्तावेजों के ज़रिये सक्रिय अदालती आदेशों का उल्लंघन करते हुए मठ की बहुमूल्य संपत्ति को निजी नामों पर स्थानांतरित कराया।

गिरफ्तार आरोपी कौन हैं

सीबीसीआईडी ने बुधवार को वेल्लाथुराई, अनवरदीन, मुरुगाडोस और सेतुपति को औपचारिक रूप से हिरासत में लिया। वेल्लाथुराई तिरुप्पुर जिले के उडुमलपेट क्षेत्र के पप्पनकुलम के निवासी हैं, जबकि सेतुपति पलानी के हैं। मुरुगाडोस का संबंध मंदिर ट्रस्ट से बताया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद पलानी मंदिर की तलहटी में पार्क रोड स्थित दंडपाणि स्वामी मठ की भूमि के एक हिस्से से जुड़ा है। जांचकर्ताओं के अनुसार, लगभग ₹100 करोड़ मूल्य की इस संपत्ति को कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से निजी व्यक्तियों के नाम पर दर्ज करा दिया गया। एक शिकायत के बाद यह कथित घोटाला प्रकाश में आया, जिसके बाद सीबीसीआईडी ने विस्तृत जांच शुरू की।

जांच का दायरा

सीबीसीआईडी अधिकारियों ने बताया कि अब तक 82 लोगों से पूछताछ की जा चुकी है — इनमें कोर्ट मामले के पक्षकार, दस्तावेज पंजीकरण अधिकारी, विक्रेता, भूमि लेन-देन से लाभान्वित व्यक्ति, गवाह, दलाल, क्लर्क और प्रशासनिक कर्मचारी शामिल हैं। जांच के दौरान एजेंसी ने सब-रजिस्ट्रार जस्टिन मणिकंदन सहित मंदिर प्रशासन, राजस्व विभाग और पंजीकरण विभाग के अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की है।

सरकारी अधिकारियों पर संदेह

जांचकर्ता यह निर्धारित करने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या सरकारी अधिकारियों ने मंदिर संपत्ति के अवैध हस्तांतरण में सक्रिय सहयोग किया या इसे जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया। एजेंसी ने कथित साजिश और भूमि हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेजी एवं मौखिक साक्ष्य भी एकत्र किए हैं।

आगे की कार्यवाही

चारों गिरफ्तार आरोपियों को संबंधित अदालत में पेश किए जाने की उम्मीद है। सीबीसीआईडी ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस कथित भूमि हड़प और दस्तावेज जालसाजी में सरकारी अधिकारियों सहित अन्य व्यक्ति भी संलिप्त थे या नहीं। जांच आगे बढ़ने के साथ और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संस्थागत विफलता का मामला हो सकता है। 82 लोगों से पूछताछ के बाद भी जांच अधूरी बताई जा रही है — असली परीक्षा यह होगी कि क्या एजेंसी सत्ता के करीबी लोगों तक भी पहुंचती है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पलानी मंदिर भूमि घोटाला क्या है?
यह मामला डिंडीगुल जिले के पलानी मंदिर से जुड़े दंडपाणि स्वामी मठ की लगभग ₹100 करोड़ मूल्य की भूमि के कथित धोखाधड़ीपूर्ण हस्तांतरण से संबंधित है। जांचकर्ताओं के अनुसार, सक्रिय अदालती आदेशों का उल्लंघन करते हुए जाली दस्तावेजों के ज़रिये यह संपत्ति निजी व्यक्तियों के नाम की गई।
सीबीसीआईडी ने किन चार लोगों को गिरफ्तार किया है?
गिरफ्तार किए गए चारों आरोपी हैं — वेल्लाथुराई (तिरुप्पुर जिले के उडुमलपेट क्षेत्र के पप्पनकुलम निवासी), अनवरदीन, मुरुगाडोस (मंदिर ट्रस्ट से संबद्ध) और सेतुपति (पलानी निवासी)। इन्हें 29 जुलाई को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया।
क्या इस मामले में सरकारी अधिकारी भी संदेह के घेरे में हैं?
हां, जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि मंदिर प्रशासन, राजस्व विभाग और पंजीकरण विभाग के अधिकारियों ने इस कथित अवैध हस्तांतरण में सहयोग किया या इसे नज़रअंदाज़ किया। सब-रजिस्ट्रार जस्टिन मणिकंदन की भूमिका की भी विशेष रूप से जांच की जा रही है।
अब तक जांच में कितने लोगों से पूछताछ हुई है?
सीबीसीआईडी ने अब तक 82 लोगों से पूछताछ की है, जिनमें कोर्ट मामले के पक्षकार, दस्तावेज पंजीकरण अधिकारी, भूमि लेन-देन से लाभान्वित व्यक्ति, गवाह, दलाल, क्लर्क और प्रशासनिक कर्मचारी शामिल हैं।
आगे इस मामले में क्या होने की उम्मीद है?
चारों गिरफ्तार आरोपियों को संबंधित अदालत में पेश किया जाएगा। सीबीसीआईडी ने संकेत दिया है कि जांच अभी जारी है और अन्य संलिप्त व्यक्तियों की पहचान होने पर और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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