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ईडी ने जालंधर से अजय सहगल को किया गिरफ्तार, सनटेक सिटी CLU घोटाले में ₹200 करोड़ की धोखाधड़ी

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ईडी ने जालंधर से अजय सहगल को किया गिरफ्तार, सनटेक सिटी CLU घोटाले में ₹200 करोड़ की धोखाधड़ी

सारांश

ईडी ने जालंधर से अजय सहगल को गिरफ्तार किया है — 15 किसानों की 30.5 एकड़ ज़मीन पर जाली हस्ताक्षर से CLU हासिल कर ₹200 करोड़ से अधिक की अवैध बिक्री का आरोप। GMADA और सरकारी अधिकारियों की रिश्वत में भूमिका की जांच जारी, और गिरफ्तारियाँ संभव।

मुख्य बातें

ईडी ने 23 मई 2026 को जालंधर से अजय सहगल (सचिव, इंडियन कोऑपरेटिव हाउसिंग बिल्डिंग सोसाइटी) को गिरफ्तार किया।
आरोप: 15 भूमि मालिकों की 30.5 एकड़ ज़मीन पर जाली हस्ताक्षर से फर्जी सहमति पत्र बनाकर सनटेक सिटी के लिए CLU हासिल किया।
अवैध परियोजनाओं से ₹200 करोड़ से अधिक की बिक्री; RERA पंजीकरण से पहले ही इकाइयाँ बेची गईं।
7 मई को 8 परिसरों पर तलाशी; कारोबारी नितिन गोहेल की बालकनी से ₹21 लाख नकद सड़क पर फेंके गए।
GMADA और DTCP के वरिष्ठ अधिकारियों की रिश्वत में भूमिका की जांच जारी; और गिरफ्तारियाँ संभव।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 23 मई 2026 को जालंधर से इंडियन कोऑपरेटिव हाउसिंग बिल्डिंग सोसाइटी के सचिव अजय सहगल को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी सनटेक सिटी रियल एस्टेट परियोजना के लिए पंजाब सरकार से फर्जी सहमति पत्रों के ज़रिये भूमि उपयोग परिवर्तन (CLU) हासिल करने से जुड़े धनशोधन मामले में की गई है, जिसमें ₹200 करोड़ से अधिक की अवैध बिक्री का आरोप है।

मुख्य घटनाक्रम

ईडी ने यह जांच पंजाब पुलिस द्वारा किसानों की शिकायत के आधार पर दर्ज एफआईआर के बाद शुरू की। जांच में सामने आया कि अजय सहगल ने 15 भूमि मालिकों की 30.5 एकड़ ज़मीन के संबंध में उनके जाली हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान से फर्जी सहमति पत्र तैयार किए। इन्हीं दस्तावेज़ों के आधार पर आरोपी संस्था और व्यक्तियों को सनटेक सिटी मेगा रियल एस्टेट परियोजना विकसित करने की अनुमति मिली।

आरोपों के अनुसार, सहगल ने इसी फर्जी CLU का उपयोग करके ला कैनेला आवासीय बहुमंजिला परिसर और डिस्ट्रिक्ट 7 वाणिज्यिक परिसर भी विकसित किए। इन परियोजनाओं में इकाइयाँ रेरा (RERA) पंजीकरण और अनुमोदन मिलने से पहले ही बेची जा रही थीं।

तलाशी में नकदी फेंकने का चौंकाने वाला मामला

ईडी ने इसी मामले में 7 मई को इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी और एबीएस टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े 8 परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान कारोबारी नितिन गोहेल की बालकनी से ₹21 लाख नकद सड़क पर फेंके गए, जो जाली के नीचे से बिखर गए। ईडी अधिकारियों ने बाद में यह नकदी बरामद कर ली।

GMADA और सरकारी अधिकारियों की भूमिका की जांच

जांच में यह भी उजागर हुआ कि अजय सहगल ने आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के लिए आरक्षित भूखंड आज तक ग्रेटर मोहाली क्षेत्र विकास प्राधिकरण (GMADA) के एस्टेट ऑफिसर को हस्तांतरित नहीं किए। इसके अलावा, उच्च न्यायालय में हुई चर्चाओं के विपरीत, पंजाब क्षेत्रीय और नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम की धारा 90 के तहत कार्रवाई करने के बजाय धारा 85 के तहत केवल 30 एकड़ भूमि के लिए आंशिक CLU रद्द किया गया — जिससे सनटेक सिटी को शेष स्टॉक बेचने में मदद मिली।

DTCP और GMADA के अन्य वरिष्ठ और सरकारी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। ईडी के अनुसार इन अधिकारियों ने रिश्वत लेकर सनटेक सिटी सहित कई डेवलपर्स को अवैध मंजूरियाँ दीं।

आम जनता और किसानों पर असर

इस घोटाले में 15 किसानों और भूमि मालिकों की 30.5 एकड़ ज़मीन उनकी जानकारी और सहमति के बिना इस्तेमाल की गई। इन अवैध और अनधिकृत परियोजनाओं से आरोपियों ने ₹200 करोड़ से अधिक की बिक्री की, जबकि वास्तविक भूमि मालिक अपने अधिकारों से वंचित रहे। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में रियल एस्टेट क्षेत्र में अनियमितताओं को लेकर पहले से ही चिंताएँ व्यक्त की जा रही थीं।

आगे क्या होगा

ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में और गिरफ्तारियाँ की जाएंगी। एजेंसी GMADA और नगर एवं ग्रामीण नियोजन विभाग के उन अधिकारियों तक पहुँचने की प्रक्रिया में है जिन्होंने कथित तौर पर रिश्वत के बदले इस धोखाधड़ी में सहयोग दिया। गौरतलब है कि यह मामला पंजाब के रियल एस्टेट क्षेत्र में प्रशासनिक मिलीभगत की व्यापक जांच का हिस्सा बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पंजाब के रियल एस्टेट-प्रशासन गठजोड़ की परत-दर-परत उधड़ती कहानी है। GMADA और DTCP जैसे नियामक निकायों में कथित रिश्वतखोरी यह सवाल उठाती है कि CLU जैसी मंजूरियाँ किसकी निगरानी में दी जाती हैं। धारा 90 की जगह धारा 85 के तहत आंशिक CLU रद्द करने का निर्णय — जो डेवलपर को शेष स्टॉक बेचने की छूट देता है — उच्च न्यायालय की चर्चाओं के विपरीत है और यह दर्शाता है कि नियामक कार्रवाई कभी-कभी जवाबदेही की आड़ में राहत बन जाती है। असली परीक्षा यह है कि क्या ईडी की जांच केवल निचले स्तर के आरोपियों तक सीमित रहेगी या GMADA के वरिष्ठ अधिकारी भी जवाबदेह होंगे।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अजय सहगल को ईडी ने किस मामले में गिरफ्तार किया है?
अजय सहगल को सनटेक सिटी रियल एस्टेट परियोजना के लिए 15 किसानों की 30.5 एकड़ ज़मीन पर जाली हस्ताक्षर से फर्जी सहमति पत्र बनाकर CLU हासिल करने और धनशोधन के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इन अवैध परियोजनाओं से ₹200 करोड़ से अधिक की बिक्री का आरोप है।
सनटेक सिटी CLU घोटाला क्या है?
सनटेक सिटी CLU घोटाले में आरोप है कि इंडियन कोऑपरेटिव हाउसिंग बिल्डिंग सोसाइटी ने भूमि मालिकों के जाली हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान से फर्जी सहमति पत्र तैयार किए और पंजाब सरकार से भूमि उपयोग परिवर्तन (CLU) की अनुमति ली। इस अनुमति के आधार पर ला कैनेला आवासीय परिसर और डिस्ट्रिक्ट 7 वाणिज्यिक परिसर जैसी परियोजनाएँ विकसित की गईं।
GMADA की इस मामले में क्या भूमिका है?
ईडी की जांच में सामने आया है कि GMADA और DTCP के वरिष्ठ अधिकारियों ने कथित तौर पर रिश्वत लेकर सनटेक सिटी सहित कई डेवलपर्स को अवैध मंजूरियाँ दीं। इसके अलावा, आरोपी ने आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के लिए आरक्षित भूखंड GMADA को हस्तांतरित नहीं किए। इन अधिकारियों की भूमिका की जांच जारी है।
7 मई की तलाशी में क्या मिला?
7 मई को ईडी ने इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी और एबीएस टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े 8 परिसरों पर तलाशी चलाई। तलाशी के दौरान कारोबारी नितिन गोहेल की बालकनी से ₹21 लाख नकद सड़क पर फेंके गए, जिन्हें बाद में ईडी अधिकारियों ने बरामद किया।
क्या इस मामले में और गिरफ्तारियाँ होंगी?
ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में और गिरफ्तारियाँ की जाएंगी। एजेंसी GMADA और नगर एवं ग्रामीण नियोजन विभाग के उन अधिकारियों तक पहुँचने की प्रक्रिया में है जिन्होंने कथित तौर पर रिश्वत के बदले इस धोखाधड़ी में सहयोग किया।
राष्ट्र प्रेस
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