ईडी ने जालंधर से अजय सहगल को किया गिरफ्तार, सनटेक सिटी CLU घोटाले में ₹200 करोड़ की धोखाधड़ी
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 23 मई 2026 को जालंधर से इंडियन कोऑपरेटिव हाउसिंग बिल्डिंग सोसाइटी के सचिव अजय सहगल को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी सनटेक सिटी रियल एस्टेट परियोजना के लिए पंजाब सरकार से फर्जी सहमति पत्रों के ज़रिये भूमि उपयोग परिवर्तन (CLU) हासिल करने से जुड़े धनशोधन मामले में की गई है, जिसमें ₹200 करोड़ से अधिक की अवैध बिक्री का आरोप है।
मुख्य घटनाक्रम
ईडी ने यह जांच पंजाब पुलिस द्वारा किसानों की शिकायत के आधार पर दर्ज एफआईआर के बाद शुरू की। जांच में सामने आया कि अजय सहगल ने 15 भूमि मालिकों की 30.5 एकड़ ज़मीन के संबंध में उनके जाली हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान से फर्जी सहमति पत्र तैयार किए। इन्हीं दस्तावेज़ों के आधार पर आरोपी संस्था और व्यक्तियों को सनटेक सिटी मेगा रियल एस्टेट परियोजना विकसित करने की अनुमति मिली।
आरोपों के अनुसार, सहगल ने इसी फर्जी CLU का उपयोग करके ला कैनेला आवासीय बहुमंजिला परिसर और डिस्ट्रिक्ट 7 वाणिज्यिक परिसर भी विकसित किए। इन परियोजनाओं में इकाइयाँ रेरा (RERA) पंजीकरण और अनुमोदन मिलने से पहले ही बेची जा रही थीं।
तलाशी में नकदी फेंकने का चौंकाने वाला मामला
ईडी ने इसी मामले में 7 मई को इंडियन कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी और एबीएस टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े 8 परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान कारोबारी नितिन गोहेल की बालकनी से ₹21 लाख नकद सड़क पर फेंके गए, जो जाली के नीचे से बिखर गए। ईडी अधिकारियों ने बाद में यह नकदी बरामद कर ली।
GMADA और सरकारी अधिकारियों की भूमिका की जांच
जांच में यह भी उजागर हुआ कि अजय सहगल ने आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के लिए आरक्षित भूखंड आज तक ग्रेटर मोहाली क्षेत्र विकास प्राधिकरण (GMADA) के एस्टेट ऑफिसर को हस्तांतरित नहीं किए। इसके अलावा, उच्च न्यायालय में हुई चर्चाओं के विपरीत, पंजाब क्षेत्रीय और नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम की धारा 90 के तहत कार्रवाई करने के बजाय धारा 85 के तहत केवल 30 एकड़ भूमि के लिए आंशिक CLU रद्द किया गया — जिससे सनटेक सिटी को शेष स्टॉक बेचने में मदद मिली।
DTCP और GMADA के अन्य वरिष्ठ और सरकारी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। ईडी के अनुसार इन अधिकारियों ने रिश्वत लेकर सनटेक सिटी सहित कई डेवलपर्स को अवैध मंजूरियाँ दीं।
आम जनता और किसानों पर असर
इस घोटाले में 15 किसानों और भूमि मालिकों की 30.5 एकड़ ज़मीन उनकी जानकारी और सहमति के बिना इस्तेमाल की गई। इन अवैध और अनधिकृत परियोजनाओं से आरोपियों ने ₹200 करोड़ से अधिक की बिक्री की, जबकि वास्तविक भूमि मालिक अपने अधिकारों से वंचित रहे। यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में रियल एस्टेट क्षेत्र में अनियमितताओं को लेकर पहले से ही चिंताएँ व्यक्त की जा रही थीं।
आगे क्या होगा
ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में और गिरफ्तारियाँ की जाएंगी। एजेंसी GMADA और नगर एवं ग्रामीण नियोजन विभाग के उन अधिकारियों तक पहुँचने की प्रक्रिया में है जिन्होंने कथित तौर पर रिश्वत के बदले इस धोखाधड़ी में सहयोग दिया। गौरतलब है कि यह मामला पंजाब के रियल एस्टेट क्षेत्र में प्रशासनिक मिलीभगत की व्यापक जांच का हिस्सा बनता जा रहा है।