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दिल्ली रियल एस्टेट घोटाला: ईओडब्ल्यू ने 9 मामलों के घोषित अपराधी शिव नंदन सिंह यादव को फरीदाबाद से दबोचा

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दिल्ली रियल एस्टेट घोटाला: ईओडब्ल्यू ने 9 मामलों के घोषित अपराधी शिव नंदन सिंह यादव को फरीदाबाद से दबोचा

सारांश

सात साल की फरारी के बाद दिल्ली ईओडब्ल्यू ने रियल एस्टेट घोटालेबाज शिव नंदन सिंह यादव को फरीदाबाद से दबोचा। 'कृष्ण कुंज टाउनशिप' के नाम पर सैकड़ों निवेशकों से ठगी के 9 मामलों में 2023 में घोषित अपराधी करार दिए गए इस आरोपी की गिरफ्तारी से पीड़ितों को न्याय की उम्मीद जगी है।

मुख्य बातें

दिल्ली ईओडब्ल्यू ने 12 जून 2026 को रियल एस्टेट धोखाधड़ी के 9 मामलों के घोषित अपराधी शिव नंदन सिंह यादव को फरीदाबाद, हरियाणा से गिरफ्तार किया।
आरोपी ने कंपनी जीआरपीएल ग्लोब रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड के ज़रिए 2013 में 'कृष्ण कुंज टाउनशिप' के नाम पर 10.26 एकड़ भूमि पर 496 प्लॉट बेचने का झूठा वादा किया था।
आरोपी 2019 से फरार था; 2023 में अदालत ने सभी 9 मामलों में उसे घोषित अपराधी करार दिया था।
गिरफ्तारी दल में एसआई प्रवीण कुमार , मोहित , कुलदीप और एएसआई दिलीप सिंह शामिल थे।
ईओडब्ल्यू घोटाले के पूरे नेटवर्क, अन्य संलिप्त व्यक्तियों और ठगी की रकम का पता लगाने में जुटी है।

दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) ने 12 जून 2026 को रियल एस्टेट धोखाधड़ी के 9 मामलों में न्यायालय द्वारा घोषित अपराधी शिव नंदन सिंह यादव को फरीदाबाद, हरियाणा से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी 2019 से फरार था और 2023 में अदालत ने उसे सभी मामलों में घोषित अपराधी करार दिया था। यह गिरफ्तारी ईओडब्ल्यू की लंबी निगरानी और तकनीकी विश्लेषण का परिणाम बताई जा रही है।

घोटाले का मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, शिव नंदन सिंह यादव ने अपनी कंपनी जीआरपीएल ग्लोब रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड के ज़रिए वर्ष 2013 में हरियाणा के ग्रेटर फरीदाबाद स्थित तिलोरी खादर गाँव में 'कृष्ण कुंज टाउनशिप' नामक आवासीय परियोजना की शुरुआत की थी। कंपनी ने 10.26 एकड़ भूमि पर 496 रिहायशी प्लॉट विकसित करने का दावा किया और आकर्षक विज्ञापनों तथा झूठे आश्वासनों के सहारे निवेशकों से भारी रकम जमा की।

आरोप है कि न तो संबंधित भूमि कानूनी रूप से उपलब्ध थी और न ही परियोजना में कोई वास्तविक विकास कार्य हुआ। इस प्रकार सैकड़ों निवेशकों को गंभीर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। वर्ष 2019 में दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट के शाहदरा ज़िले में कुल 9 एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें धोखाधड़ी का तरीका एक समान पाया गया।

फरारी और गिरफ्तारी

यादव 2019 से ही फरार था। बार-बार की गई छापेमारी और खोजबीन के बावजूद वह पुलिस की पकड़ से बचता रहा। वर्ष 2023 में अदालत ने सभी 9 मामलों में उसे घोषित अपराधी करार दिया। इसके बाद ईओडब्ल्यू ने निगरानी तेज़ की और खुफिया जानकारी व तकनीकी विश्लेषण के आधार पर 12 जून 2026 को फरीदाबाद से उसे सफलतापूर्वक गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी दल में एसआई प्रवीण कुमार, मोहित, कुलदीप और एएसआई दिलीप सिंह शामिल रहे।

जाँच की स्थिति

ईओडब्ल्यू के अनुसार, आरोपी से पूछताछ जारी है। पुलिस इस घोटाले के पूरे नेटवर्क, अन्य संलिप्त व्यक्तियों और धोखाधड़ी से अर्जित धनराशि का पता लगाने में जुटी है। साथ ही अन्य पीड़ित निवेशकों की पहचान का कार्य भी तेज़ किया गया है।

आम निवेशकों पर असर

यह मामला उन सैकड़ों निवेशकों से जुड़ा है जिन्होंने 'कृष्ण कुंज टाउनशिप' में अपनी जीवन भर की बचत लगाई थी। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली-एनसीआर में अधूरे आवासीय प्रोजेक्टों को लेकर निवेशकों की शिकायतें पहले से ही बड़ी संख्या में लंबित हैं। इस गिरफ्तारी से पीड़ितों को न्याय की उम्मीद जगी है।

आगे क्या होगा

ईओडब्ल्यू के अधिकारियों के अनुसार, आरोपी को शीघ्र न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा। जाँच में घोटाले से जुड़े अन्य आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले का त्वरित निपटारा रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेशकों के विश्वास को बहाल करने में सहायक हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 2019 से फरार एक घोषित अपराधी को पकड़ने में चार साल क्यों लगे। दिल्ली-एनसीआर में अधूरे रियल एस्टेट प्रोजेक्टों की शिकायतें हज़ारों में हैं, और अधिकांश मामलों में पीड़ित निवेशक वर्षों तक न्याय की प्रतीक्षा करते रहते हैं। गिरफ्तारी स्वागतयोग्य है, पर पीड़ितों को वास्तविक राहत तब मिलेगी जब ठगी की रकम की वसूली और मुआवज़े की प्रक्रिया तेज़ होगी — जो अक्सर दीर्घकालिक न्यायिक प्रक्रियाओं में उलझ जाती है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिव नंदन सिंह यादव को किस मामले में गिरफ्तार किया गया है?
शिव नंदन सिंह यादव को रियल एस्टेट धोखाधड़ी के 9 मामलों में गिरफ्तार किया गया है। उस पर आरोप है कि उसने 'कृष्ण कुंज टाउनशिप' के नाम पर सैकड़ों निवेशकों से भारी रकम ठगी, जबकि न भूमि कानूनी थी और न ही कोई विकास कार्य हुआ।
'कृष्ण कुंज टाउनशिप' घोटाला क्या है?
यह 2013 में हरियाणा के ग्रेटर फरीदाबाद के तिलोरी खादर गाँव में शुरू की गई एक कथित फर्जी आवासीय परियोजना है। जीआरपीएल ग्लोब रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने 10.26 एकड़ भूमि पर 496 प्लॉट बेचने का दावा किया, लेकिन निवेशकों को न प्लॉट मिले और न रकम वापस।
आरोपी कितने समय से फरार था और उसे कब घोषित अपराधी घोषित किया गया?
शिव नंदन सिंह यादव 2019 से फरार था। वर्ष 2023 में कड़कड़डूमा कोर्ट ने उसे सभी 9 मामलों में घोषित अपराधी करार दिया था। अंततः 12 जून 2026 को फरीदाबाद से उसे गिरफ्तार किया गया।
इस मामले में पीड़ित निवेशकों को आगे क्या राहत मिल सकती है?
ईओडब्ल्यू अब घोटाले के नेटवर्क, अन्य संलिप्त व्यक्तियों और ठगी की रकम का पता लगाने में जुटी है। अन्य पीड़ितों की पहचान का कार्य भी तेज़ किया गया है। आरोपी को शीघ्र न्यायालय में पेश किए जाने की उम्मीद है, जिसके बाद मुआवज़े की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
दिल्ली ईओडब्ल्यू क्या है और इसकी भूमिका क्या है?
दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) आर्थिक अपराधों की जाँच के लिए विशेष रूप से गठित इकाई है। यह रियल एस्टेट धोखाधड़ी, बैंक घोटाले और वित्तीय अपराधों की जाँच करती है तथा फरार आरोपियों की तलाश में तकनीकी और खुफिया संसाधनों का उपयोग करती है।
राष्ट्र प्रेस
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