ईडी ने 'भगवान शिव का अवतार' बताने वाले अशोक खरात को किया गिरफ्तार, ₹13.92 करोड़ नकद और मर्सिडीज जब्त
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई जोनल कार्यालय ने 19 मई 2026 को खुद को भगवान शिव का अवतार बताने वाले अशोक कुमार एकनाथ खरात उर्फ 'कैप्टन' को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया। आरोपी पर आरोप है कि उसने धार्मिक आस्था और अलौकिक शक्तियों का भय दिखाकर कई पीड़ितों से करोड़ों रुपए की अवैध वसूली की और उस रकम को मनी लॉन्ड्रिंग के ज़रिए छिपाया। पीएमएलए कोर्ट, मुंबई ने उसे 26 मई 2026 तक सात दिनों की ईडी हिरासत में भेज दिया है।
मामले का पृष्ठभूमि और एफआईआर
ईडी की यह जांच नासिक के सरकारवाड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर से शुरू हुई, जिसमें आरोपी और उसके सहयोगियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 और महाराष्ट्र मानव बलि तथा अन्य अमानवीय, दुष्ट और अघोरी प्रथाएँ एवं काला जादू रोकथाम और उन्मूलन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज था। बाद में शिरडी और राहाता पुलिस स्टेशन, अहिल्यानगर में दर्ज एफआईआर को भी पीएमएलए जांच में शामिल कर लिया गया।
कैसे चलता था वसूली का रैकेट
जांच एजेंसी के अनुसार, अशोक कुमार खरात खुद को भगवान शिव का अवतार और दिव्य शक्तियों का धारक बताता था। वह कथित तौर पर लोगों के मन में मृत्यु, काला जादू और अनिष्ट का भय पैदाकर उन्हें भावनात्मक रूप से नियंत्रित करता था। मनगढ़ंत अनुष्ठानों, तथाकथित धार्मिक उपायों और 'अवतार पूजा' के नाम पर वह पीड़ितों से बड़ी मात्रा में नकद और कीमती संपत्तियाँ हड़प लेता था।
एक विशेष मामले में एक शिकायतकर्ता से कथित तौर पर लगभग ₹5.62 करोड़ वसूले गए। ईडी का दावा है कि यह रकम आरोपी के निर्देश पर एक लग्जरी मर्सिडीज कार की खरीद, विदेश यात्राओं, अमेरिका में चिकित्सा उपचार और फार्महाउस संपत्तियों के विकास पर खर्च की गई।
मनी लॉन्ड्रिंग का जाल
पीएमएलए जांच में सामने आया कि कथित वसूली और धोखाधड़ी से अर्जित 'अपराध की आय' को कई बैंक खातों, सहकारी ऋण समितियों (पतसंस्थाओं), चल एवं अचल संपत्तियों तथा प्रॉक्सी खातों के माध्यम से घुमाया गया। आरोपी ने दो सहकारी क्रेडिट सोसाइटियों के ज़रिए बेनामी खाते और फिक्स्ड डिपॉजिट संचालित किए — भारी मात्रा में नकद जमाकर उसे एफडी में बदला जाता था और बाद में नकद के रूप में निकाल लिया जाता था। जांच में यह भी उजागर हुआ कि खरात अपने मोबाइल नंबर और नॉमिनी विवरण से इन खातों पर नियंत्रण रखता था।
छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ
ईडी ने पीएमएलए की धारा 17 के तहत 13 अप्रैल, 14 अप्रैल, 17 अप्रैल, 23 अप्रैल, 5 मई और 18 मई 2026 को आरोपी और उसके सहयोगियों से जुड़े आवासीय एवं व्यावसायिक परिसरों, बैंक लॉकरों और वाहनों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया। इन छापों में निम्नलिखित बरामद और जब्त किया गया:
₹13.92 करोड़ नकद; 5,500 अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा (लगभग ₹5.11 लाख); करीब ₹1.12 करोड़ के सोने-चांदी के आभूषण; ₹2.25 करोड़ की बैंक जमा राशि फ्रीज़; एक मर्सिडीज कार जब्त व फ्रीज़। इसके अलावा आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड भी ज़ब्त किए गए।
आगे की जांच और संभावित खुलासे
ईडी के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है और मामले में और खुलासे होने की संभावना है। गौरतलब है कि यह मामला महाराष्ट्र में धार्मिक ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग के उन मामलों की श्रृंखला में नया है, जहाँ 'अवतार' या 'दिव्य शक्ति' का दावा कर आर्थिक शोषण किया जाता है। आने वाले दिनों में अदालती सुनवाई और जांच की दिशा यह तय करेगी कि इस नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं।