ईडी की बड़ी कार्रवाई: भूमि घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग में दो मास्टरमाइंड गिरफ्तार, संपत्तियाँ फ्रीज
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 15 मई 2025 को करोड़ों रुपये के भूमि घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दो कथित मास्टरमाइंड — जी राम चंद्र मोहन और आकाश मालवीय — को गिरफ्तार किया। नई दिल्ली स्थित पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष अदालत ने दोनों आरोपियों को ईडी की हिरासत में भेज दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी के अनुसार, यह मामला स्पिरिचुअल रीजनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एसआरएमएफ) की संपत्तियों की कथित फर्जी बिक्री से जुड़ा है। एसआरएमएफ वर्ष 1963 में पंजीकृत एक चैरिटेबल सोसायटी है। जाँच में सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के ज़रिये ट्रस्ट की सैकड़ों करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियाँ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ — तीन राज्यों में — अवैध रूप से बेच दीं।
आरोपियों की भूमिका
ईडी के मुताबिक, मुख्य आरोपी जी राम चंद्र मोहन ने वर्ष 2010 में खुद को एसआरएमएफ का कोषाध्यक्ष बताकर एक फर्जी संस्था बनाई, नकली पैन कार्ड हासिल किया — जिसे बाद में आयकर विभाग ने फर्जी घोषित कर निष्क्रिय कर दिया — और अवैध रूप से बैंक खाते खोलकर अपराध की आय को स्थानांतरित किया।
वहीं, आकाश मालवीय ने कथित तौर पर खुद को संस्था का कार्यकारी सदस्य बताकर फर्जी बिक्री दस्तावेजों पर अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता की भूमिका निभाई।
तीसरे आरोपी और कंपनी पर कार्रवाई
जाँच में यह भी सामने आया कि कंपनी एम/एस सिंहवाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक प्रदीप सिंह ने इस घोटाले में सक्रिय भूमिका निभाई। यह जानते हुए भी कि ज़मीन एसआरएमएफ की है और आरोपियों के पास उसे बेचने का कोई वैध अधिकार नहीं, उन्होंने जानबूझकर इन सौदों में भाग लिया। इतना ही नहीं, बिक्री के तुरंत बाद उन्होंने ज़मीन के हिस्से तीसरे पक्ष को भी बेच दिए।
ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 17(1ए) के तहत प्रदीप सिंह और उनकी कंपनी की बैंक जमा, लॉकर तथा लग्जरी वाहनों — टोयोटा हाइब्रिड, लैंड रोवर डिफेंडर और महिंद्रा थार रॉक्स — को फ्रीज कर दिया है।
छापेमारी और जाँच की शुरुआत
ईडी ने 14-15 मई को व्यापक छापेमारी के बाद यह गिरफ्तारियाँ कीं। जाँच एजेंसी ने 7 मई को दर्ज ईसीआईआर के आधार पर यह जाँच शुरू की थी, जो विभिन्न एफआईआर से जुड़ी है। इन एफआईआर में धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी पहचान और आपराधिक विश्वासघात जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
आगे की जाँच
ईडी का कहना है कि मामले में आगे की जाँच जारी है। यह मामला इस लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें एक पंजीकृत चैरिटेबल ट्रस्ट की संपत्तियों को फर्जी पहचान और दस्तावेजों के ज़रिये कई राज्यों में बेचने का सुनियोजित षड्यंत्र सामने आया है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों या संपत्तियों की कुर्की की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।