कोलकाता में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मर्लिन प्रोजेक्ट्स पर ईडी की छापेमारी
सारांश
Key Takeaways
- मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों की जांच चल रही है।
- मर्लिन प्रोजेक्ट्स के निदेशकों पर धोखाधड़ी का आरोप है।
- ईडी ने सात स्थानों पर छापेमारी की।
- नकली दस्तावेजों के जरिए जमीन का हड़पना।
- भविष्य में नियमों को कड़ाई से लागू किया जाएगा।
कोलकाता, ८ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित मामले में मर्लिन प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में कंपनी के निदेशक सुशील मोहता और साकेत मोहता समेत अन्य व्यक्तियों पर आरोप है कि उन्होंने जमीन हड़पने और निवेशकों को गुमराह करने के लिए बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की।
जांच के दौरान, ईडी ने सात अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी ली। आरोप है कि मोहता बंधुओं और उनके सहयोगियों ने नकली दस्तावेजों का सहारा लेकर जमीन की झूठी टाइटल चेन बनाई और कई जमीन के टुकड़े हड़प लिए, जिनमें सरकारी संपत्ति भी शामिल है।
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने इन हड़पी गई जमीनों का उपयोग कर बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की। नकली दस्तावेजों के बल पर खुद को कानूनी मालिक बताकर उन्होंने लोगों से प्रोजेक्ट्स में निवेश के लिए भारी रकम प्राप्त की, जो वास्तव में मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से अवैध रूप से जुटाई गई थी।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस प्रकार की धोखाधड़ी ने न केवल निवेशकों को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि सरकारी संपत्ति का भी दुरुपयोग किया है। मर्लिन प्रोजेक्ट्स लिमिटेड का मामला रियल एस्टेट और निवेश के क्षेत्र में निगरानी और नियमों की आवश्यकता को फिर से उजागर करता है।
ईडी का उद्देश्य है कि मामले की गहराई में जाकर नकली दस्तावेजों और अवैध लेन-देन की पूरी जांच की जाए। इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी को रोकने के लिए नियमों को कड़ाई से लागू किया जा सके।
वहीं, सुशील मोहता और साकेत मोहता के खिलाफ आरोपों की जांच जारी है और ईडी ने कहा है कि दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामले में आगामी हफ्तों में और खुलासे होने की संभावना है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन और निवेश से संबंधित मामलों में किस प्रकार की गड़बड़ी की गई थी।