आदित्य धर ने 'धुरंधर: द रिवेंज' में मेकअप आर्टिस्ट प्रीतिशील की सराहना की
सारांश
Key Takeaways
- टीमवर्क: फिल्म की सफलता में पूरी टीम का योगदान होता है।
- समर्पण: प्रीतिशील का काम और उनका समर्पण प्रशंसा के योग्य है।
- व्यक्तिगत अनुभव: आदित्य धर ने प्रीतिशील के साथ की मुलाकात को महत्वपूर्ण बताया।
मुंबई, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। जब कोई फिल्म सफल होती है, तो इसके पीछे पूरी टीम का योगदान होता है। लेखक फिल्म की कहानी लिखता है, निर्देशक उसे पर्दे पर जीवंत करता है, और मेकअप आर्टिस्ट उनके दृष्टिकोण को सजीव करता है। यही कुछ आदित्य धर की फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' में देखने को मिला।
फिल्म के रिलीज के बाद दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। इसकी सफलता में मेकअप आर्टिस्ट प्रीतिशील का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने सभी कलाकारों को वही लुक दिया, जो फिल्म की आवश्यकता थी। गुरुवार को, निर्देशक आदित्य धर ने इंस्टाग्राम पर प्रीतिशील की सराहना की।
उन्होंने प्रीतिशील की कुछ तस्वीरें साझा कीं, जिसमें वह आदित्य और अन्य कलाकारों के साथ नजर आ रही हैं। निर्देशक ने लिखा, "जब मैंने पहली बार प्रीतिशील का नाम सुना, तो मैं थोड़ी हिचकिचाहट में था, क्योंकि कुछ लोगों ने कहा था कि वह घमंडी और केवल बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करती हैं। लेकिन जब मैंने उनसे मुलाकात की, तो मेरी सारी शंकाएं समाप्त हो गईं।"
आदित्य ने लिखा, "इस मुलाकात ने मुझे यह सिखाया कि दूसरों की बातों पर अपनी राय नहीं बनानी चाहिए। अक्सर ये बातें उन लोगों की होती हैं, जिनका उस व्यक्ति से कोई संबंध नहीं होता है।"
निर्देशक ने प्रीतिशील को न केवल बेहतरीन मेकअप आर्टिस्ट, बल्कि एक सच्चे इंसान के रूप में भी बताया। उन्होंने कहा, "हमारी व्यस्तता के बीच हंसी-मजाक, जिंदगी पर लंबी बातचीत, और हर किरदार पर मेहनत करने की यादें मैं हमेशा संजोकर रखूंगा। उनकी मुस्कान और साथ ने कठिन समय को भी सरल बना दिया।"
आदित्य ने प्रीतिशील की मेहनत की भी सराहना की।उन्होंने बताया कि फिल्म के दोनों भागों में 100 से अधिक किरदारों का मेकअप डिज़ाइन किया गया। कुछ किरदार, जैसे नवाब शफीक और बड़े साब, बेहद जटिल थे। हजारों चेहरों को तैयार किया गया, उम्र को बदला गया और लुक में परिवर्तन किया गया। उनकी टीम ने लगभग 20,000 जूनियर आर्टिस्ट्स को असली और जिंदा दिखाने का कार्य किया।
आदित्य ने लिखा, "जब अन्य क्रू सोने जा रहे थे, प्रीतिशील और उनकी टीम पहले से सेट पर मौजूद होती थीं। जब सभी काम खत्म करके घर जा रहे होते थे, तब भी वह काम कर रही होती थीं। केवल 2-3 घंटे की नींद लेकर बिना किसी शिकायत के लगातार काम करना। यह उनके समर्पण की पराकाष्ठा थी।"
उन्होंने अंत में लिखा, "लेकिन सबसे विशेष बात जो मेरे साथ रही, वह थी उनका इरादा। प्रीतिशील के लिए यह कभी दिखावट का मुद्दा नहीं था। हर किरदार, चाहे छोटा ही क्यों न हो, असली, जिंदा और ईमानदार प्रतीत होना चाहिए। यही उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण था। उन्होंने हर चेहरे को सम्मान दिया, मानो हर एक की अपनी कहानी हो। यह एक बहुत दुर्लभ गुण है।