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अहमदाबाद रियल एस्टेट धोखाधड़ी: ईडी ने ₹129.80 करोड़ की संपत्तियां कुर्क कीं, 250+ निवेशक पीड़ित

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अहमदाबाद रियल एस्टेट धोखाधड़ी: ईडी ने ₹129.80 करोड़ की संपत्तियां कुर्क कीं, 250+ निवेशक पीड़ित

सारांश

अहमदाबाद में रियल एस्टेट के नाम पर 54% से 100% रिटर्न का झांसा देकर सैकड़ों निवेशकों को ठगने के मामले में ईडी ने ₹129.80 करोड़ की संपत्तियां कुर्क कर लीं। न रेरा पंजीकरण, न एनए अनुमति — फिर भी परियोजनाएं बेची गईं। यह कार्रवाई गुजरात में अनियंत्रित रियल एस्टेट धोखाधड़ी पर कड़े सवाल उठाती है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 14 अगस त 2026 को पीएमएलए की धारा 5(1) के तहत ₹129.80 करोड़ की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कीं।
कुर्की रोनक रवजीभाई सोनानी , विपुलभाई गोरधनभाई गंगानी और केशव नारायण ग्रुप से जुड़ी संपत्तियों पर की गई।
छारोड़ी परियोजना में 250 से अधिक और अक्षर अनंत परियोजना में 44 से अधिक निवेशकों से धन लिया गया, लेकिन न फ्लैट मिले न राशि वापस हुई।
आरोपियों ने 54% से 100% सुनिश्चित रिटर्न का वादा किया; परियोजनाएं रेरा पंजीकरण और एनए अनुमति के बिना प्रचारित की गईं।
जांच अहमदाबाद के चार पुलिस स्टेशनों में दर्ज पांच एफआईआर के आधार पर शुरू हुई; बीएनएस 2023 के तहत आरोपपत्र दाखिल।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अहमदाबाद के एक बड़े रियल एस्टेट धोखाधड़ी मामले में ₹129.80 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर ली हैं। यह कार्रवाई 14 अगस्त को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 5(1) के तहत की गई। कुर्क की गई संपत्तियां कथित तौर पर रोनक रवजीभाई सोनानी, विपुलभाई गोरधनभाई गंगानी, केशव नारायण ग्रुप और अन्य संबद्ध व्यक्तियों से जुड़ी हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

जांच की नींव अहमदाबाद के डीसीबी पुलिस स्टेशन, सैटेलाइट पुलिस स्टेशन, नवरंगपुरा पुलिस स्टेशन और बोपल पुलिस स्टेशन में दर्ज पांच एफआईआर पर रखी गई थी। ईडी के अहमदाबाद जोनल कार्यालय ने 17 अगस्त को जारी आधिकारिक बयान में इस कुर्की कार्रवाई की पुष्टि की। आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपपत्र भी दाखिल किए जा चुके हैं।

धोखाधड़ी का तरीका

ईडी के अनुसार, आरोपियों ने घर खरीदारों, छोटे निवेशकों, व्यापारियों और मध्यम वर्गीय परिवारों को अपना निशाना बनाया। उन्होंने अपनी रियल एस्टेट परियोजनाओं को वैध और आकर्षक निवेश अवसर के रूप में प्रस्तुत किया तथा फ्लैट व दुकानें प्री-लॉन्च कीमतों पर बेचने का प्रस्ताव दिया।

आरोपियों ने निवेशकों को 54% से 100% तक सुनिश्चित रिटर्न का वादा किया। हालांकि, ईडी की जांच में सामने आया कि इन परियोजनाओं का प्रचार आवश्यक नॉन-एग्रीकल्चर (एनए) अनुमति और रेरा पंजीकरण के बिना किया गया था — जो भारत में रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए अनिवार्य कानूनी शर्तें हैं।

दो प्रमुख परियोजनाओं में ठगी

छारोड़ी परियोजना में लगभग 250 खरीदारों और निवेशकों से धन जुटाया गया। खरीदारों को बताया गया था कि रेरा पंजीकरण और एनए अनुमति की प्रक्रिया जारी है, लेकिन बाद में परियोजना की जमीन महेंद्रभाई पटेल, आशीष विष्णुभाई पटेल और अन्य को बेच या ट्रांसफर कर दी गई।

शेला स्थित अक्षर अनंत परियोजना में 44 से अधिक निवेशकों से पैसा लिया गया। परियोजना को वास्तविक दिखाने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) और अन्य दस्तावेज जारी किए गए, लेकिन बाद में परियोजना बंद कर जमीन पुरव रमेशचंद्र पटेल, दिप्रजवीरसिंह विक्रमसिंह झाला और महेंद्रसिंह प्रद्युमनसिंह चुडासमा सहित अन्य को ट्रांसफर कर दी गई। पीड़ितों को न वादा किए गए फ्लैट-दुकानें मिलीं, न जमा राशि वापस हुई।

धन शोधन की कार्यप्रणाली

ईडी के अनुसार, आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से पहले निवेशकों को झूठे वादों से आकर्षित किया, फिर उनसे प्राप्त धन को अन्यत्र स्थानांतरित किया और उससे खरीदी गई संपत्तियों को छिपाने का प्रयास किया। वास्तविक भुगतान के बिना फर्जी बिक्री दस्तावेजों के माध्यम से संपत्तियां तीसरे पक्ष के नाम की गईं और पंजीकृत दस्तावेजों में काल्पनिक भुगतान का विवरण दर्ज किया गया ताकि लेनदेन वैध दिखे।

आगे की जांच

यह कुर्की अस्थायी है और पीएमएलए के तहत सक्षम न्यायाधिकरण द्वारा इसकी समीक्षा होगी। ईडी का मामला अभी जांच के चरण में है और आगे और कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह मामला गुजरात में रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेशक सुरक्षा की कमियों को एक बार फिर रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि राज्य की रेरा और नगर नियोजन एजेंसियां इन परियोजनाओं को इतने लंबे समय तक बिना अनुमति के चलते क्यों नहीं रोक पाईं। 250 से अधिक पीड़ितों की संख्या बताती है कि यह कोई छोटा या अचानक हुआ घोटाला नहीं था — यह सुनियोजित था। संपत्ति कुर्की न्याय की दिशा में पहला कदम है, लेकिन पीड़ितों को वास्तविक राहत तभी मिलेगी जब कुर्क संपत्तियों का मुआवजे में रूपांतरण तेज़ी से हो।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद रियल एस्टेट धोखाधड़ी मामले में ईडी ने क्या कार्रवाई की?
ईडी ने 14 अगस्त को पीएमएलए, 2002 की धारा 5(1) के तहत ₹129.80 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कीं। यह संपत्तियां रोनक रवजीभाई सोनानी, विपुलभाई गोरधनभाई गंगानी और केशव नारायण ग्रुप से जुड़ी बताई गई हैं।
इस मामले में कितने निवेशक प्रभावित हुए हैं?
ईडी के अनुसार, छारोड़ी परियोजना में लगभग 250 खरीदारों और निवेशकों से धन जुटाया गया, जबकि शेला स्थित अक्षर अनंत परियोजना में 44 से अधिक लोगों से निवेश लिया गया। इन सभी को न वादा किए गए फ्लैट या दुकानें मिलीं और न ही जमा राशि वापस की गई।
आरोपियों ने निवेशकों को कैसे ठगा?
आरोपियों ने 54% से 100% तक सुनिश्चित रिटर्न का वादा कर प्री-लॉन्च कीमतों पर फ्लैट और दुकानें बेचीं। परियोजनाएं रेरा पंजीकरण और एनए अनुमति के बिना प्रचारित की गईं, और बाद में निवेशकों का धन अन्यत्र स्थानांतरित कर परियोजनाओं की जमीन तीसरे पक्ष को बेच दी गई।
इस जांच की शुरुआत कैसे हुई?
जांच अहमदाबाद के डीसीबी, सैटेलाइट, नवरंगपुरा और बोपल पुलिस स्टेशनों में दर्ज पांच एफआईआर के आधार पर शुरू हुई। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपपत्र भी दाखिल किए गए हैं।
अस्थायी कुर्की के बाद आगे क्या होगा?
पीएमएलए के प्रावधानों के अनुसार, इस अस्थायी कुर्की की समीक्षा सक्षम न्यायाधिकरण द्वारा की जाएगी। ईडी की जांच अभी जारी है और मामले में आगे और कार्रवाई संभव है।
राष्ट्र प्रेस
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