14 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

लाडा-सारली हाईवे मुआवजा घोटाला: ईडी ने न्याकपो यांगफो की ₹2.69 करोड़ की संपत्तियां कुर्क कीं

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
लाडा-सारली हाईवे मुआवजा घोटाला: ईडी ने न्याकपो यांगफो की ₹2.69 करोड़ की संपत्तियां कुर्क कीं

सारांश

अरुणाचल प्रदेश की लाडा-सारली फ्रंटियर हाईवे परियोजना में कथित मुआवजा घोटाले की जांच में ईडी ने ₹2.69 करोड़ की संपत्तियां कुर्क कीं। आरोपी ने मुआवजा मिलने के अगले ही दिन जमीन खरीदी — वित्तीय कड़ी अब सीधी और स्पष्ट।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय ने 14 अगस्त 2026 को न्याकपो यांगफो की ₹2.69 करोड़ मूल्य की दो अचल संपत्तियां पीएमएलए के तहत कुर्क कीं।
कुर्क संपत्तियों में तारासो गांव की 7,950 वर्ग मीटर जमीन ( ₹1.59 करोड़ ) और चेस्सा गांव की 3,440 वर्ग मीटर जमीन व दो मछली तालाब ( ₹1.10 करोड़ ) शामिल हैं।
आरोपी को परियोजना के तहत कुल ₹3.36 करोड़ मुआवजा मिला, जिसमें से लगभग ₹3.25 करोड़ अतिरिक्त या अपात्र बताया गया है।
मुआवजा मिलने के अगले ही दिन संपत्ति खरीद — 6 जून 2025 और 23 जुलाई 2025 — ने अपराध-धन का सीधा संबंध स्थापित किया।
जांच अरुणाचल प्रदेश भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की एफआईआर पर आधारित; अन्य लाभार्थियों और अधिकारियों की जांच जारी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अरुणाचल प्रदेश की लाडा-सारली फ्रंटियर हाईवे परियोजना से जुड़े कथित मुआवजा घोटाले में 14 अगस्त 2026 को बड़ी प्रवर्तन कार्रवाई करते हुए आरोपी न्याकपो यांगफो की ₹2.69 करोड़ मूल्य की दो अचल संपत्तियों को धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) के तहत अस्थायी रूप से कुर्क किया है। ईडी के ईटानगर सब-जोनल कार्यालय ने यह कार्रवाई परियोजना के पैकेज-4 और पैकेज-5 के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण मुआवजे के आकलन और वितरण में कथित अनियमितताओं के आधार पर की है।

कुर्क संपत्तियों का विवरण

ईडी द्वारा कुर्क की गई संपत्तियों में पपुम पारे जिले के बालिजन सर्किल स्थित तारासो गांव में 7,950 वर्ग मीटर भूमि शामिल है, जिसकी अनुमानित कीमत ₹1.59 करोड़ आंकी गई है। इसके अलावा चेस्सा गांव में 3,440 वर्ग मीटर भूमि और दो मछली तालाब भी कुर्क किए गए हैं, जिनका मूल्य लगभग ₹1.10 करोड़ बताया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि और जांच का आधार

ईडी ने यह जांच अरुणाचल प्रदेश भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, ईटानगर द्वारा दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) के आधार पर शुरू की थी। उस एफआईआर में कई सरकारी अधिकारियों और निजी लाभार्थियों पर भूमि अधिग्रहण मुआवजे के आकलन, स्वीकृति और भुगतान में व्यापक अनियमितता तथा सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे।

जांच में सामने आया कि न्याकपो यांगफो परियोजना के लाभार्थियों में शामिल था और उसे पैकेज-IV तथा पैकेज-V के तहत कुल ₹3.36 करोड़ का मुआवजा प्राप्त हुआ था। तथ्य खोज समिति और पुनः सत्यापन प्रक्रिया के दौरान तैयार लाभार्थी-वार तुलनात्मक रिपोर्ट में पाया गया कि उसे लगभग ₹3.25 करोड़ का अतिरिक्त अथवा अपात्र मुआवजा दिया गया। यह अतिरिक्त भुगतान बांस, अन्य सामान्य पेड़ों तथा एसपीटी भवन के नाम पर किया गया था, जो भौतिक सत्यापन के दौरान मौके पर मौजूद नहीं पाए गए।

मुआवजे और संपत्ति खरीद का सीधा संबंध

ईडी की जांच में एक महत्वपूर्ण वित्तीय कड़ी सामने आई है। 5 जून 2025 को न्याकपो यांगफो को ₹1.89 करोड़ का मुआवजा मिला और ठीक अगले दिन 6 जून 2025 को उसने ₹1.59 करोड़ खर्च कर तारासो गांव में 7,950 वर्ग मीटर जमीन खरीद ली। इसी प्रकार 22 जुलाई 2025 को ₹1.46 करोड़ का अतिरिक्त मुआवजा प्राप्त होने के अगले ही दिन 23 जुलाई 2025 को उसने ₹1.10 करोड़ में चेस्सा गांव में जमीन और दो मछली तालाब खरीदे।

ईडी ने दावा किया है कि कथित अपराध से अर्जित धन और इन संपत्तियों की खरीद के बीच सीधा और स्पष्ट वित्तीय संबंध स्थापित होता है। इसी आधार पर पीएमएलए के तहत कुल ₹2.69 करोड़ मूल्य की इन संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है।

आगे की जांच का दायरा

ईडी के अनुसार मामले में शामिल अन्य लाभार्थियों की भूमिका की जांच भी जारी है, जिन्हें परियोजना के तहत कथित रूप से अतिरिक्त या अपात्र मुआवजा मिला था। जांच के दायरे में संबंधित सरकारी अधिकारी भी शामिल हैं। गौरतलब है कि यह मामला उत्तर-पूर्व भारत की एक रणनीतिक सीमावर्ती सड़क परियोजना से जुड़ा है, जिससे इसकी संवेदनशीलता और बढ़ जाती है। आने वाले हफ्तों में ईडी की जांच के और भी नतीजे सामने आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सुनियोजित धनशोधन की ओर इशारा करता है — और यह पहली बार नहीं है कि किसी सीमावर्ती बुनियादी ढांचा परियोजना में भूमि अधिग्रहण मुआवजे की आड़ में सार्वजनिक धन की लूट का आरोप लगा हो। असली सवाल यह है कि ₹3.25 करोड़ का कथित अपात्र भुगतान किन अधिकारियों की स्वीकृति से हुआ और वे अब तक जांच के दायरे से बाहर क्यों हैं। तथ्य खोज समिति की रिपोर्ट पहले से मौजूद थी — फिर भी भुगतान रोका नहीं गया। यह प्रशासनिक विफलता उतनी ही गंभीर है जितना कि व्यक्तिगत धोखाधड़ी।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लाडा-सारली फ्रंटियर हाईवे मुआवजा घोटाला क्या है?
यह अरुणाचल प्रदेश की लाडा-सारली फ्रंटियर हाईवे परियोजना के पैकेज-4 और पैकेज-5 के तहत भूमि अधिग्रहण मुआवजे के आकलन और वितरण में कथित अनियमितताओं का मामला है। आरोप है कि कई लाभार्थियों और सरकारी अधिकारियों ने मिलकर ऐसी संपत्तियों और संरचनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये का मुआवजा हड़पा जो भौतिक सत्यापन में मौके पर मौजूद नहीं पाई गईं।
ईडी ने न्याकपो यांगफो की संपत्तियां क्यों कुर्क कीं?
ईडी के अनुसार न्याकपो यांगफो को परियोजना के तहत लगभग ₹3.25 करोड़ का अतिरिक्त या अपात्र मुआवजा मिला और उसने यह राशि मिलने के अगले ही दिन संपत्तियां खरीदीं। इस सीधे वित्तीय संबंध के आधार पर पीएमएलए के तहत ₹2.69 करोड़ मूल्य की दो संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की गई हैं।
कुर्क की गई संपत्तियां कहाँ स्थित हैं और उनकी कीमत क्या है?
कुर्क की गई संपत्तियों में पपुम पारे जिले के तारासो गांव में 7,950 वर्ग मीटर जमीन (₹1.59 करोड़) और चेस्सा गांव में 3,440 वर्ग मीटर जमीन व दो मछली तालाब (₹1.10 करोड़) शामिल हैं। दोनों संपत्तियों का कुल मूल्य ₹2.69 करोड़ आंका गया है।
इस मामले में जांच की शुरुआत कैसे हुई?
ईडी ने यह जांच अरुणाचल प्रदेश भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, ईटानगर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की। उस एफआईआर में कई सरकारी अधिकारियों और निजी लाभार्थियों पर मुआवजे के आकलन, स्वीकृति और भुगतान में व्यापक अनियमितता के आरोप लगाए गए थे।
क्या इस मामले में और लोगों पर भी कार्रवाई होगी?
ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में शामिल अन्य लाभार्थियों और संबंधित सरकारी अधिकारियों की जांच जारी है। जिन लोगों को कथित रूप से अतिरिक्त या अपात्र मुआवजा मिला, उन सभी को जांच के दायरे में लिया गया है और आगे और कार्रवाई की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले