ईडी ने मदनपुर खादर जमीन घोटाले में ₹45.84 करोड़ की संपत्ति कुर्क, तरबिया फाउंडेशन समेत 4 पर आरोप-पत्र दाखिल
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नई दिल्ली के मदनपुर खादर गाँव में जमीन के जालसाजी से अधिग्रहण से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ₹45.84 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है और साकेत की विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत (पीसी) दाखिल की है। एम/एस तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन, जवाद अहमद सिद्दीकी, विनोद कुमार और श्रीओम चौहान — चारों आरोपियों को जांच के दौरान पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने यह जांच दिल्ली पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकियों (एफआईआर) के आधार पर शुरू की। ये एफआईआर मदनपुर खादर गाँव की खसरा संख्या 792 वाली जमीन के कथित धोखाधड़ीपूर्ण अधिग्रहण से संबंधित थीं। जांच एजेंसी के अनुसार, इस अधिग्रहण में जाली जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) और मनगढ़ंत स्वामित्व दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
जालसाजी का तरीका
ईडी की जांच में सामने आया कि जिन जीपीए के आधार पर यह जमीन एम/एस तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन को हस्तांतरित की गई, उन पर 7 जनवरी 2024 की तारीख अंकित थी — जबकि जमीन के कई मूल मालिक वर्ष 2004 से भी दशकों पहले दिवंगत हो चुके थे। जांच के अनुसार, जवाद अहमद सिद्दीकी और अन्य आरोपियों ने मिलकर मृत मालिकों के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान जाली बनाने की साजिश रची थी।
इसके अलावा, जांच में यह भी उजागर हुआ कि ये जीपीए वास्तव में वर्ष 2012-13 में — यानी संपत्ति हस्तांतरण से ठीक पहले — फर्जी तरीके से तैयार किए गए थे। अवैध कब्जे को वैध लेनदेन का रूप देने के लिए जवाद अहमद सिद्दीकी ने बैंकिंग लेनदेन का दिखावा भी किया और भारी मात्रा में नकद लेनदेन किए।
कुर्की और अपराध से अर्जित संपत्ति
ईडी के अनुसार, इस मामले में अपराध से अर्जित संपत्ति (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का कुल मूल्य लगभग ₹47.76 करोड़ आंका गया है। एजेंसी ने उस जमीन को कुर्क कर लिया है जिसका मूल्य ₹45.84 करोड़ है और जिस पर जवाद अहमद सिद्दीकी तथा एम/एस तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन का अवैध कब्जा था। यह कुर्की मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है।
आगे की जांच जारी
ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आगे की जांच अभी जारी है। साकेत की विशेष पीएमएलए अदालत में दाखिल अभियोजन शिकायत के बाद अब मामला न्यायिक प्रक्रिया में प्रवेश कर चुका है। आने वाले दिनों में अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपों की विस्तृत जांच होने की संभावना है।