13 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ईडी ने मदनपुर खादर जमीन घोटाले में ₹45.84 करोड़ की संपत्ति कुर्क, तरबिया फाउंडेशन समेत 4 पर आरोप-पत्र दाखिल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ईडी ने मदनपुर खादर जमीन घोटाले में ₹45.84 करोड़ की संपत्ति कुर्क, तरबिया फाउंडेशन समेत 4 पर आरोप-पत्र दाखिल

सारांश

ईडी ने नई दिल्ली के मदनपुर खादर में जाली जीपीए और मृत मालिकों के नकली हस्ताक्षरों के जरिए जमीन हड़पने के मामले में ₹45.84 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है। तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन और जवाद अहमद सिद्दीकी समेत चार आरोपियों के खिलाफ साकेत की पीएमएलए अदालत में आरोप-पत्र दाखिल हो चुका है।

मुख्य बातें

ईडी ने मदनपुर खादर गाँव, नई दिल्ली की खसरा संख्या 792 वाली जमीन — मूल्य ₹45.84 करोड़ — कुर्क की।
अपराध से अर्जित संपत्ति का कुल मूल्य लगभग ₹47.76 करोड़ आंका गया।
आरोपी: एम/एस तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन , जवाद अहमद सिद्दीकी , विनोद कुमार और श्रीओम चौहान — सभी पहले से गिरफ्तार।
जांच के अनुसार, 7 जनवरी 2024 की तारीख वाले जीपीए जाली थे; मूल मालिक 2004 से भी पहले दिवंगत हो चुके थे।
साकेत की विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल; आगे की जांच जारी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नई दिल्ली के मदनपुर खादर गाँव में जमीन के जालसाजी से अधिग्रहण से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ₹45.84 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है और साकेत की विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत (पीसी) दाखिल की है। एम/एस तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन, जवाद अहमद सिद्दीकी, विनोद कुमार और श्रीओम चौहान — चारों आरोपियों को जांच के दौरान पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने यह जांच दिल्ली पुलिस द्वारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकियों (एफआईआर) के आधार पर शुरू की। ये एफआईआर मदनपुर खादर गाँव की खसरा संख्या 792 वाली जमीन के कथित धोखाधड़ीपूर्ण अधिग्रहण से संबंधित थीं। जांच एजेंसी के अनुसार, इस अधिग्रहण में जाली जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) और मनगढ़ंत स्वामित्व दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।

जालसाजी का तरीका

ईडी की जांच में सामने आया कि जिन जीपीए के आधार पर यह जमीन एम/एस तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन को हस्तांतरित की गई, उन पर 7 जनवरी 2024 की तारीख अंकित थी — जबकि जमीन के कई मूल मालिक वर्ष 2004 से भी दशकों पहले दिवंगत हो चुके थे। जांच के अनुसार, जवाद अहमद सिद्दीकी और अन्य आरोपियों ने मिलकर मृत मालिकों के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान जाली बनाने की साजिश रची थी।

इसके अलावा, जांच में यह भी उजागर हुआ कि ये जीपीए वास्तव में वर्ष 2012-13 में — यानी संपत्ति हस्तांतरण से ठीक पहले — फर्जी तरीके से तैयार किए गए थे। अवैध कब्जे को वैध लेनदेन का रूप देने के लिए जवाद अहमद सिद्दीकी ने बैंकिंग लेनदेन का दिखावा भी किया और भारी मात्रा में नकद लेनदेन किए।

कुर्की और अपराध से अर्जित संपत्ति

ईडी के अनुसार, इस मामले में अपराध से अर्जित संपत्ति (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का कुल मूल्य लगभग ₹47.76 करोड़ आंका गया है। एजेंसी ने उस जमीन को कुर्क कर लिया है जिसका मूल्य ₹45.84 करोड़ है और जिस पर जवाद अहमद सिद्दीकी तथा एम/एस तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन का अवैध कब्जा था। यह कुर्की मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है।

आगे की जांच जारी

ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आगे की जांच अभी जारी है। साकेत की विशेष पीएमएलए अदालत में दाखिल अभियोजन शिकायत के बाद अब मामला न्यायिक प्रक्रिया में प्रवेश कर चुका है। आने वाले दिनों में अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपों की विस्तृत जांच होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जब तक भूमि रजिस्ट्री प्रणाली में डिजिटल सत्यापन और मृत्यु रिकॉर्ड से स्वचालित मिलान अनिवार्य नहीं होता, ऐसे मामले सामने आते रहेंगे।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने मदनपुर खादर जमीन मामले में क्या कार्रवाई की है?
ईडी ने नई दिल्ली के मदनपुर खादर गाँव की खसरा संख्या 792 वाली जमीन — मूल्य ₹45.84 करोड़ — को पीएमएलए, 2002 के तहत कुर्क किया है। साथ ही साकेत की विशेष पीएमएलए अदालत में तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन समेत चार आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है।
इस मामले में किन लोगों को गिरफ्तार किया गया है?
जांच के दौरान ईडी ने चार आरोपियों — एम/एस तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन, जवाद अहमद सिद्दीकी, विनोद कुमार और श्रीओम चौहान — को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। अब इन्हीं के खिलाफ अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया गया है।
जमीन हड़पने में किस तरह की जालसाजी की गई थी?
जांच के अनुसार, आरोपियों ने उन मूल मालिकों के नाम पर जाली जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) तैयार किए जो वर्ष 2004 से भी दशकों पहले दिवंगत हो चुके थे। इन मृत मालिकों के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान नकली बनाए गए और अवैध कब्जे को वैध दिखाने के लिए बैंकिंग लेनदेन का दिखावा भी किया गया।
इस मामले में अपराध से अर्जित संपत्ति का मूल्य कितना है?
ईडी के अनुसार, इस मामले में अपराध से अर्जित संपत्ति (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का कुल मूल्य लगभग ₹47.76 करोड़ आंका गया है, जिसमें से ₹45.84 करोड़ मूल्य की जमीन कुर्क की जा चुकी है।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
साकेत की विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल होने के बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया में है। ईडी ने स्पष्ट किया है कि आगे की जांच अभी जारी है और नए तथ्य सामने आने पर अतिरिक्त कार्रवाई संभव है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले