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मणिपुर: ईडी ने बिरला एम्पोरियम मामले में ₹3.92 करोड़ की 13 संपत्तियाँ जब्त कीं, कुल जब्ती ₹65.5 करोड़ पहुँची

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मणिपुर: ईडी ने बिरला एम्पोरियम मामले में ₹3.92 करोड़ की 13 संपत्तियाँ जब्त कीं, कुल जब्ती ₹65.5 करोड़ पहुँची

सारांश

मणिपुर में ईडी की बड़ी कार्रवाई — बिरला एम्पोरियम और इरा फाइनेंस मामले में ₹3.92 करोड़ की 13 और संपत्तियाँ जब्त। कुल जब्ती ₹65.5 करोड़ पहुँची। 5,511 निवेशकों से ₹253 करोड़ की ठगी का आरोप, विशेष पीएमएलए न्यायालय संज्ञान ले चुका है।

मुख्य बातें

ईडी के इम्फाल उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने ₹3.92 करोड़ मूल्य की 13 अचल संपत्तियाँ पीएमएलए के तहत अस्थायी रूप से कुर्क कीं।
संपत्तियाँ थौबल , इम्फाल पूर्व और इम्फाल पश्चिम जिलों में स्थित हैं और कर्मचारियों के नाम पर पंजीकृत हैं।
युमनाम इराबंता सिंह और सहयोगियों पर 5,511 निवेशकों से ₹253 करोड़ की अनधिकृत जमा योजना चलाने का आरोप।
इस मामले में ईडी की कुल जब्ती अब 219 संपत्तियाँ और ₹65.5 करोड़ हो गई है।
विशेष पीएमएलए न्यायालय, इम्फाल ने 18 अगस्त 2025 को अभियोजन शिकायत का संज्ञान लिया; आगे की जाँच जारी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इम्फाल उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने मेसर्स बिरला एम्पोरियम प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स इरा फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े धन शोधन मामले में ताज़ा कार्रवाई करते हुए ₹3.92 करोड़ मूल्य की 13 अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है। इस मामले में ईडी की कुल जब्ती अब ₹65.5 करोड़ मूल्य की 219 अचल संपत्तियों तक पहुँच गई है।

कहाँ स्थित हैं जब्त संपत्तियाँ

ताज़ा कुर्क की गई 13 संपत्तियाँ मणिपुर के थौबल, इम्फाल पूर्व और इम्फाल पश्चिम जिलों में स्थित हैं। जाँच के अनुसार ये संपत्तियाँ कंपनी के कर्मचारियों और उससे जुड़े व्यक्तियों के नाम पर पंजीकृत हैं — जो कथित तौर पर अपराध की आय को छुपाने की एक सुनियोजित कोशिश थी।

मामले की पृष्ठभूमि और आरोप

ईडी ने यह जाँच इम्फाल स्थित सीआईडी (अपराध शाखा) द्वारा धारा 420 और धारा 120-बी (भारतीय दंड संहिता, 1860) के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की थी। जाँच में सामने आया कि युमनाम इराबंता सिंह और उनके सहयोगियों द्वारा नियंत्रित इन दोनों कंपनियों ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) अथवा किसी राज्य प्राधिकरण से बिना किसी पंजीकरण के एक अनधिकृत और अनियमित जमा योजना संचालित की, जो बैंक या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) की भाँति काम कर रही थी।

आरोप है कि इन संस्थाओं ने लगभग 5,511 निवेशकों को प्रतिमाह 3 से 5 प्रतिशत के अत्यधिक रिटर्न का प्रलोभन देकर कुल ₹253 करोड़ एकत्र किए। इसके अलावा, संपत्ति के बदले लगभग ₹100 करोड़ के ऋण भी दिए गए। प्राप्त राशि को संपत्तियों, शेयर बाज़ार और विदेशी मुद्रा निवेश में लगाया गया। ऋणों को सुरक्षित करने के लिए उधारकर्ताओं की संपत्तियाँ विक्रय विलेख के माध्यम से निदेशकों और कर्मचारियों के नाम पर हस्तांतरित कर दी गईं।

अब तक की कुल कार्रवाई

गौरतलब है कि इस मामले में ईडी पहले ही ₹61.6 करोड़ मूल्य की 206 संपत्तियाँ जब्त कर चुकी है, जिन्हें पीएमएलए के न्याय निर्णायक प्राधिकरण द्वारा पुष्टि भी मिल चुकी है। ताज़ा जब्ती के साथ कुल आँकड़ा 219 संपत्तियाँ और ₹65.5 करोड़ हो गया है।

न्यायिक प्रक्रिया की स्थिति

6 जून 2025 को इम्फाल स्थित विशेष पीएमएलए न्यायालय में अभियोजन शिकायत दर्ज की गई थी, जिसका संज्ञान 18 अगस्त 2025 को लिया गया। मामले में आगे की जाँच जारी है और आने वाले समय में और कार्रवाइयों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

511 पीड़ित निवेशकों को उनकी रकम कब और कैसे वापस मिलेगी — जब्त संपत्तियों की नीलामी से लेकर मुआवज़े तक की प्रक्रिया अक्सर वर्षों खिंचती है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेसर्स बिरला एम्पोरियम प्राइवेट लिमिटेड मामले में ईडी ने क्या कार्रवाई की है?
ईडी ने पीएमएलए, 2002 के तहत ₹3.92 करोड़ मूल्य की 13 अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त की हैं। इस मामले में अब तक कुल 219 संपत्तियाँ और ₹65.5 करोड़ की जब्ती हो चुकी है।
बिरला एम्पोरियम और इरा फाइनेंस पर क्या आरोप हैं?
आरोप है कि इन कंपनियों ने RBI, SEBI या किसी राज्य प्राधिकरण से बिना पंजीकरण के अनधिकृत जमा योजना चलाई और 5,511 निवेशकों से 3-5% मासिक रिटर्न का वादा कर ₹253 करोड़ एकत्र किए। संपत्ति के बदले ₹100 करोड़ के ऋण भी दिए गए।
इस मामले में न्यायिक कार्यवाही कहाँ तक पहुँची है?
6 जून 2025 को इम्फाल स्थित विशेष पीएमएलए न्यायालय में अभियोजन शिकायत दर्ज हुई थी, जिसका संज्ञान 18 अगस्त 2025 को लिया गया। मामले की आगे की जाँच जारी है।
जब्त संपत्तियाँ किनके नाम पर थीं?
जाँच के अनुसार ये संपत्तियाँ कंपनी के कर्मचारियों और संबद्ध व्यक्तियों के नाम पर पंजीकृत थीं। उधारकर्ताओं की संपत्तियाँ विक्रय विलेख के ज़रिए निदेशकों और कर्मचारियों के नाम हस्तांतरित की गई थीं।
इस मामले में कितने निवेशक प्रभावित हुए हैं?
कथित तौर पर लगभग 5,511 निवेशक इस अनधिकृत जमा योजना से प्रभावित हुए हैं, जिनसे कुल ₹253 करोड़ एकत्र किए गए थे।
राष्ट्र प्रेस
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