12 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मालदा अस्पताल में ८ साल की बच्ची की मौत: लापरवाही के आरोप में परिजनों का विरोध-प्रदर्शन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मालदा अस्पताल में ८ साल की बच्ची की मौत: लापरवाही के आरोप में परिजनों का विरोध-प्रदर्शन

सारांश

मालदा के एक अस्पताल में आठ साल की बच्ची की कथित इलाज में लापरवाही से मौत ने परिजनों को सड़क पर उतार दिया। बिना इलाज रेफर करने और बदसलूकी के आरोपों के बीच डॉक्टर ने सब नकारा — पर सवाल बंगाल की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे हैं।

मुख्य बातें

मालदा जिले के एक सरकारी अस्पताल में आठ साल की बच्ची की मौत 11 अगस्त को हुई।
परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी डॉक्टर सौमेन सॉ ने बिना इलाज के बच्ची को मालदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया।
मामा प्रदीप दास ने शिकायत करने पर डॉक्टर द्वारा बदसलूकी का भी आरोप लगाया; लिखित शिकायत दर्ज।
डॉक्टर सौमेन सॉ ने लापरवाही के आरोपों को 'पूरी तरह झूठे' बताया और जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन पर डाली।
पुलिस ने मौके पर पहुँचकर तनावपूर्ण स्थिति को नियंत्रित किया।

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के एक सरकारी अस्पताल में आठ साल की बच्ची की मौत के बाद मंगलवार, 11 अगस्त को परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। मृतक बच्ची हरीशचंद्रपुर पुलिस स्टेशन क्षेत्र की रहने वाली थी और उसे मालदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ना पड़ा।

घटनाक्रम: कैसे हुई मौत

परिवार के अनुसार, बच्ची को दो दिनों से तेज बुखार था। जब हालत बिगड़ी तो उसे स्थानीय अस्पताल के बाल रोग विभाग में भर्ती कराया गया। परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर सौमेन सॉ ने बिना समुचित उपचार किए बच्ची को मालदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया। रेफर किए जाने के दौरान ही बच्ची की मृत्यु हो गई।

परिजनों का विरोध और आरोप

बच्ची की मौत की खबर फैलते ही परिजन और स्थानीय लोग अस्पताल में एकत्र हो गए और प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने डॉक्टरों, अस्पताल के असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट और प्रशासनिक अधिकारियों से तीखी बहस की। मृतक बच्ची के मामा प्रदीप दास ने आरोप लगाया कि बच्ची को बिना इलाज के ही रेफर किया गया और जब परिवार ने शिकायत करने की कोशिश की तो ड्यूटी डॉक्टर ने उनके साथ बदसलूकी की। परिजनों ने डॉक्टर के विरुद्ध लिखित शिकायत भी दर्ज कराई।

डॉक्टर का पक्ष

आरोपित डॉक्टर सौमेन सॉ ने लापरवाही के सभी आरोपों को 'पूरी तरह झूठे' बताते हुए खारिज किया। स्थानीय मीडिया से बातचीत में उन्होंने इस घटना की जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन पर डाली। मामले की जाँच अभी जारी है और किसी स्वतंत्र चिकित्सा समिति द्वारा अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं दिया गया है।

पुलिस हस्तक्षेप और व्यापक असर

हालात तनावपूर्ण होने पर पुलिस को सूचित किया गया और बल ने मौके पर पहुँचकर स्थिति को नियंत्रण में लिया। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम बंगाल में सरकारी अस्पतालों की सेवा गुणवत्ता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों के परिजनों ने भी इस अवसर पर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की माँग उठाई।

आगे क्या होगा

लिखित शिकायत दर्ज होने के बाद प्रशासन पर जाँच कार्रवाई का दबाव है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों की यह कोई पहली घटना नहीं है। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही को लेकर नागरिक समाज और विपक्ष लगातार आवाज उठाते रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि प्रणालीगत विफलता का संकेत है। डॉक्टर और प्रशासन के बीच जिम्मेदारी की 'पिंग-पॉन्ग' पीड़ित परिवारों के लिए नई नहीं है। असली सवाल यह है कि लिखित शिकायत के बाद राज्य स्वास्थ्य विभाग स्वतंत्र जाँच कराएगा या मामला फाइलों में दब जाएगा।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मालदा अस्पताल में बच्ची की मौत कैसे हुई?
परिजनों के अनुसार, दो दिन से बुखार से पीड़ित आठ साल की बच्ची को स्थानीय अस्पताल के बाल रोग विभाग में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि बिना समुचित इलाज के उसे मालदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया गया और रेफर के दौरान ही उसकी मृत्यु हो गई।
डॉक्टर सौमेन सॉ पर क्या आरोप हैं?
बच्ची के मामा प्रदीप दास ने आरोप लगाया है कि ड्यूटी डॉक्टर सौमेन सॉ ने बच्ची को बिना इलाज रेफर किया और परिजनों के शिकायत करने पर बदसलूकी की। इस संबंध में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। डॉक्टर सौमेन सॉ ने सभी आरोपों को 'पूरी तरह झूठे' बताते हुए जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन पर डाली है।
इस मामले में पुलिस ने क्या कदम उठाए?
अस्पताल में विरोध-प्रदर्शन के दौरान हालात तनावपूर्ण होने पर पुलिस को सूचित किया गया। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर स्थिति को नियंत्रण में लिया। अभी तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
क्या पश्चिम बंगाल में सरकारी अस्पतालों में ऐसी घटनाएँ पहले भी हुई हैं?
हाँ, पश्चिम बंगाल में सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों की यह पहली घटना नहीं है। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही को लेकर नागरिक समाज और विपक्ष लगातार सवाल उठाते रहे हैं।
इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होने की उम्मीद है?
लिखित शिकायत दर्ज होने के बाद अस्पताल प्रशासन और राज्य स्वास्थ्य विभाग पर जाँच का दबाव है। परिजन स्वतंत्र चिकित्सा जाँच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले