7 अगस्त 2026
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अलवर के निशु अस्पताल का लाइसेंस रद्द: बिना डॉक्टर डिलीवरी कराने से प्रसूता की मौत, FIR के आदेश

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अलवर के निशु अस्पताल का लाइसेंस रद्द: बिना डॉक्टर डिलीवरी कराने से प्रसूता की मौत, FIR के आदेश

सारांश

अलवर के निशु अस्पताल में 4 अगस्त को बिना डॉक्टर के नर्सिंग स्टाफ ने डिलीवरी कराई, जिससे प्रसूता अंजुम की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर FIR का आदेश दिया और संचालक व नर्स दोनों के खिलाफ पेशेवर कार्रवाई की सिफारिश की।

मुख्य बातें

4 अगस्त 2026 को अलवर के निशु अस्पताल में बिना डॉक्टर की देखरेख के नर्सिंग स्टाफ द्वारा डिलीवरी कराने से प्रसूता अंजुम (पिंकी) की मौत हो गई।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव गायत्री राठौड़ ने 7 अगस्त को अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर FIR दर्ज करने का आदेश दिया।
अस्पताल संचालक भुवनेश कुमार शर्मा के खिलाफ मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को पत्र लिखा गया; नर्स रफिकन बानो के खिलाफ नर्सिंग काउंसिल को कार्रवाई की सिफारिश।
क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत अस्पताल के सभी कामकाज तत्काल प्रभाव से बंद।
राठौड़ ने हाई-रिस्क प्रेगनेंसी मामलों में लापरवाही पर अजमेर डिवीजन के जॉइंट डायरेक्टर को नोटिस जारी करने के भी आदेश दिए।

राजस्थान के अलवर जिले के नागला रायसिस स्थित निशु अस्पताल में 4 अगस्त 2026 को एक प्रसूता की मौत हो गई, जब किसी योग्य डॉक्टर की अनुपस्थिति में नर्सिंग स्टाफ ने डिलीवरी कराई। इस घटना के बाद राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने 7 अगस्त को अस्पताल का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया और FIR दर्ज करने का आदेश दिया।

घटना का विवरण

साहिल खान की पत्नी अंजुम (पिंकी) को 4 अगस्त को प्रसव के लिए निशु अस्पताल में भर्ती कराया गया था। स्वास्थ्य विभाग की जाँच में सामने आया कि नर्सिंग स्टाफ की सदस्य रफिकन बानो ने किसी प्रशिक्षित चिकित्सक की देखरेख के बिना डिलीवरी कराई, जिसके बाद महिला की मौत हो गई। विभाग के अनुसार, अस्पताल में उस समय कोई क्वालिफाइड डॉक्टर मौजूद नहीं था।

विभागीय कार्रवाई

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव गायत्री राठौड़ ने स्वास्थ्य भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा बैठक में यह मामला सामने आने पर तत्काल निर्देश जारी किए। जाँच में अनियमितताएँ पाए जाने के बाद क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के प्रावधानों के तहत निशु अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया गया और उसके सभी कामकाज को तत्काल बंद करने का आदेश दिया गया।

विभाग ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर अस्पताल संचालक भुवनेश कुमार शर्मा के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की है। साथ ही नर्सिंग काउंसिल को भी पत्र भेजकर रफिकन बानो के खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाने की सिफारिश की गई है।

व्यापक निर्देश और समीक्षा

प्रधान सचिव गायत्री राठौड़ ने समीक्षा बैठक में प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर्स, चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर्स तथा मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों को निर्देश दिया कि हाई-रिस्क प्रेगनेंसी के मामलों को पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ संभाला जाए। गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य जाँच का अद्यतन रिकॉर्ड रखने और डेटा समय पर पोर्टल पर अपलोड करने के भी निर्देश दिए गए।

राठौड़ ने अजमेर डिवीजन में हाई-रिस्क प्रेगनेंसी के मामलों में लापरवाही बरतने पर संबंधित डिवीजनल जॉइंट डायरेक्टर को नोटिस जारी करने का भी आदेश दिया। यह निर्देश इस बात का संकेत है कि विभाग केवल इस एक अस्पताल तक सीमित नहीं, बल्कि राज्यव्यापी मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम उठा रहा है।

बायोमेडिकल उपकरणों पर भी चर्चा

समीक्षा बैठक में सरकारी अस्पतालों में बायोमेडिकल उपकरणों की स्थिति पर भी विचार-विमर्श हुआ। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि अतिरिक्त, निष्क्रिय और मरम्मत योग्य उपकरणों की जानकारी ई-उपकरण पोर्टल पर अपडेट की जाए। मेंटेनेंस एजेंसियों को पुनः उपयोग योग्य चिकित्सा उपकरणों की बिना देरी मरम्मत करने के निर्देश दिए गए ताकि अस्पतालों के संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो सके।

आगे क्या होगा

निशु अस्पताल के संचालक भुवनेश कुमार शर्मा और नर्स रफिकन बानो के खिलाफ FIR दर्ज होने की प्रक्रिया जारी है। मेडिकल काउंसिल और नर्सिंग काउंसिल की कार्रवाई के बाद इन दोनों के पेशेवर पंजीकरण पर भी संकट गहरा सकता है। यह मामला राजस्थान में निजी स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन लाइसेंस रद्द जैसी कार्रवाई अपवाद बनी रहती है। असली सवाल यह है कि क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत नियमित निरीक्षण की व्यवस्था इतनी कमज़ोर क्यों है कि किसी महिला की जान जाने के बाद ही खामियाँ उजागर होती हैं। मातृ मृत्यु दर में कमी के सरकारी दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच यह खाई तब तक नहीं पटेगी, जब तक निजी स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी प्रतिक्रियात्मक नहीं बल्कि निवारक बनाई जाए।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अलवर के निशु अस्पताल में क्या हुआ था?
4 अगस्त 2026 को अलवर के नागला रायसिस स्थित निशु अस्पताल में साहिल खान की पत्नी अंजुम (पिंकी) को प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था। जाँच के अनुसार, किसी योग्य डॉक्टर की अनुपस्थिति में नर्सिंग स्टाफ की सदस्य रफिकन बानो ने डिलीवरी कराई, जिसके बाद महिला की मौत हो गई।
निशु अस्पताल का लाइसेंस क्यों रद्द किया गया?
स्वास्थ्य विभाग की जाँच में अस्पताल में गंभीर अनियमितताएँ पाई गईं — मुख्य रूप से यह कि डॉक्टर की अनुपस्थिति में नर्सिंग स्टाफ ने प्रसव कराया। इसके आधार पर क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर सभी कामकाज तत्काल बंद करने का आदेश दिया गया।
इस मामले में किन लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है?
अस्पताल संचालक भुवनेश कुमार शर्मा के खिलाफ मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को पत्र लिखा गया है। नर्स रफिकन बानो के खिलाफ नर्सिंग काउंसिल को अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है। साथ ही, पुलिस में FIR दर्ज करने के भी आदेश जारी किए गए हैं।
राजस्थान स्वास्थ्य विभाग ने इस घटना के बाद क्या व्यापक निर्देश दिए?
प्रधान सचिव गायत्री राठौड़ ने हाई-रिस्क प्रेगनेंसी मामलों में पूरी संवेदनशीलता बरतने, गर्भवती महिलाओं का अद्यतन रिकॉर्ड रखने और डेटा समय पर पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए। अजमेर डिवीजन में लापरवाही पर जॉइंट डायरेक्टर को नोटिस जारी करने का भी आदेश दिया गया।
क्या ऐसे मामलों में निजी अस्पतालों की जाँच का कोई तंत्र है?
क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत निजी अस्पतालों के लाइसेंस और संचालन की निगरानी का प्रावधान है। इस मामले में विभाग ने मातृ मृत्यु की समीक्षा बैठक के दौरान घटना की जानकारी मिलने पर तत्काल जाँच शुरू की और कार्रवाई की।
राष्ट्र प्रेस
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