पीएसीएल लिमिटेड मामले में ईडी ने दिल्ली-पंजाब में 5046 करोड़ की 126 संपत्तियां कुर्क कीं
सारांश
Key Takeaways
- ईडी ने 5046 करोड़ रुपये की 126 संपत्तियां कुर्क कीं।
- यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत की गई है।
- पीएसीएल लिमिटेड ने 48,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटाए।
- सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को समिति गठित करने का निर्देश दिया था।
- कुल 22,656.91 करोड़ रुपये की संपत्तियां अब तक कुर्क की गई हैं।
नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल लिमिटेड) के संबंध में एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई करते हुए 5046.91 करोड़ रुपये की 126 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। ये संपत्तियां मुख्य रूप से पंजाब और दिल्ली में स्थित हैं और इन्हें निवेशकों के धन से खरीदा गया है।
ईडी ने इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के द्वारा 19 फरवरी 2014 को दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दर्ज की गई थी। सीबीआई ने इस मामले में 33 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र और पूरक आरोप पत्र भी दाखिल किए हैं। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम 2002 के तहत की गई है।
जांच में यह सामने आया है कि पीएसीएल लिमिटेड और इससे जुड़ी कंपनियों ने एक अवैध सामूहिक निवेश योजना के माध्यम से देशभर में लाखों लोगों से 48,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई। निवेशकों को कृषि भूमि खरीदने और विकास के नाम पर लुभाया गया, जिससे उन्हें 'कैश डाउन पेमेंट' और किस्तों के माध्यम से निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया। कई भ्रामक दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर कराए गए। अधिकांश मामलों में निवेशकों को भूमि का वास्तविक कब्जा नहीं दिया गया और उनकी रकम भी वापस नहीं की गई।
ईडी के अनुसार, इस धोखाधड़ी को छिपाने के लिए कई मुखौटा कंपनियों और 'रिवर्स सेल ट्रांजेक्शन' का सहारा लिया गया। इससे अवैध रूप से अर्जित धन को इधर-उधर स्थानांतरित कर वैध दिखाने की कोशिश की गई।
इस मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में सेबी को पूर्व मुख्य न्यायाधीश आर एम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का निर्देश दिया था, ताकि पीएसीएल लिमिटेड की संपत्तियों की बिक्री कर निवेशकों को उनका पैसा लौटाया जा सके। हालांकि, जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी की संपत्तियों का अवैध उपयोग जारी था, जिसके संबंध में पंजाब, जयपुर और बेंगलुरु में अतिरिक्त एफआईआर भी दर्ज की गईं।
ईडी ने 2016 में ईसीआईआर दर्ज किया और 2018 में अपनी पहली अभियोजन शिकायत दाखिल की। इसके बाद 2022, 2025 और 2026 में चार पूरक शिकायतें भी दायर की गईं। विशेष पीएमएलए अदालत ने इन सभी पर संज्ञान लिया है।
ईडी के अधिकारियों ने बताया कि अब तक इस मामले में कुल 22,656.91 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे भी कार्रवाई की संभावना है।