बंधु बाबा पर ईडी का शिकंजा: ₹36.90 करोड़ की संपत्तियां अटैच, 6 आरोपियों पर चार्जशीट दाखिल
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई जोनल कार्यालय ने 18 जुलाई 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए अशोक कुमार एकनाथ खरात उर्फ बंधु बाबा, उनकी पत्नी कल्पना खरात और चार अन्य आरोपियों के खिलाफ मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल की। अब तक इस मामले में कुल ₹36.90 करोड़ की संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज की जा चुकी हैं।
मुख्य घटनाक्रम
15 जुलाई 2026 को ईडी ने पीएमएलए की धारा-5 के तहत खरात और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज ₹19.20 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया। इससे पहले अप्रैल और मई 2026 में आरोपी व उनके सहयोगियों से जुड़े परिसरों, बैंक लॉकरों और वाहनों की तलाशी के दौरान पीएमएलए की धारा-17 के तहत ₹17.70 करोड़ की संपत्तियां जब्त अथवा फ्रीज की गई थीं।
इससे पहले 19 मई 2026 को ईडी ने पीएमएलए की धारा-19 के तहत अशोककुमार एकनाथ खरात को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था, और तब से वे न्यायिक हिरासत में हैं।
धोखाधड़ी का तरीका
ईडी की जांच के अनुसार, अशोककुमार खरात कथित तौर पर स्वयं को भगवान शिव का अवतार और दैवीय शक्तियों से संपन्न बताकर श्रद्धालुओं का विश्वास अर्जित करते थे। आरोप है कि उन्होंने लोगों को 'अवतार पूजा' कराने, गंभीर बीमारियों के उपचार, दुर्भाग्य निवारण तथा व्यापार और जीवन में सफलता दिलाने का झांसा देकर बड़ी मात्रा में धन और संपत्तियां हासिल कीं।
एजेंसी के मुताबिक, जबरन वसूली, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी के जरिए अर्जित इस अवैध कमाई को बाद में मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से वैध बनाने का प्रयास किया गया। यह जांच महाराष्ट्र के वाडा, शिरडी, सिन्नर और राहाता पुलिस थानों में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी।
मनी लॉन्ड्रिंग का नेटवर्क
जांच में सामने आया कि अपराध से अर्जित धन को छिपाने के लिए दो सहकारी क्रेडिट सोसायटियों का उपयोग किया गया। एक कर्मचारी की कथित मिलीभगत से अनेक बैंक खातों का धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से संचालन किया गया। इसके अलावा भारी मात्रा में नकदी जमा करने और निकालने — जिसमें विभिन्न निवेशों की मैच्योरिटी से प्राप्त राशि भी शामिल थी — के लिए कई बेनामी खातों का इस्तेमाल किया गया।
ईडी के अनुसार, इस तरह तैयार किए गए फंड को आरोपी के भरोसेमंद सहयोगियों के पास रखा गया और बाद में नासिक, अहमदनगर, सोलापुर, पुणे तथा मुंबई में परिवार के सदस्यों के नाम पर अचल संपत्तियां खरीदने में निवेश किया गया।
आम जनता पर असर
यह मामला उन हज़ारों श्रद्धालुओं की ठगी से जुड़ा है, जिन्होंने धार्मिक आस्था के नाम पर अपनी मेहनत की कमाई गंवाई। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में धर्म की आड़ में वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है। ईडी की यह कार्रवाई संगठित धार्मिक ठगी नेटवर्क के खिलाफ बढ़ती जवाबदेही का संकेत है।
क्या होगा आगे
ईडी के अनुसार, मामले की जांच अभी भी जारी है और एजेंसी इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों तथा संपत्तियों की भी पड़ताल कर रही है। विशेष पीएमएलए अदालत में दाखिल चार्जशीट पर आगे की सुनवाई से मामले की दिशा तय होगी।