18 जुलाई 2026
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विक्रम-1 की सफल ऑर्बिटल उड़ान पर PM मोदी ने स्काईरूट को दी बधाई, बोले- 'आत्मनिर्भर भारत की क्षमता साबित'

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विक्रम-1 की सफल ऑर्बिटल उड़ान पर PM मोदी ने स्काईरूट को दी बधाई, बोले- 'आत्मनिर्भर भारत की क्षमता साबित'

सारांश

विक्रम-1 की सफल ऑर्बिटल उड़ान ने भारत के निजी अंतरिक्ष युग की शुरुआत कर दी। स्काईरूट एयरोस्पेस पहले ही प्रयास में ऑर्बिट तक पहुँचने वाली देश की पहली निजी कंपनी बनी। PM मोदी ने इसे 'आत्मनिर्भर भारत' की जीती-जागती मिसाल बताया और मिशन को 'वंदे मातरम मिशन' की संज्ञा दी।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 18 जुलाई 2026 को स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को विक्रम-1 के सफल ऑर्बिटल लॉन्च पर बधाई दी।
स्काईरूट अपने पहले ही प्रयास में रॉकेट को ऑर्बिट तक पहुँचाने वाली भारत की पहली निजी अंतरिक्ष कंपनी बन गई।
PM मोदी ने मिशन को 'वंदे मातरम मिशन' की संज्ञा दी और इसे आत्मनिर्भर भारत की क्षमता का प्रमाण बताया।
टीम के अधिकांश सदस्य 25 से 30 वर्ष की आयु के युवा हैं — प्रधानमंत्री ने इसकी विशेष सराहना की।
सह-संस्थापक पवन चंदना ने बताया कि PM का 'वंदे मातरम' लिखा कार्ड सफलतापूर्वक अंतरिक्ष तक पहुँचा।
यह उपलब्धि भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को वैश्विक वाणिज्यिक बाज़ार में नई पहचान दिलाती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 जुलाई 2026 को निजी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को विक्रम-1 रॉकेट के सफल ऑर्बिटल लॉन्च पर बधाई दी। प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया जिसमें वे स्काईरूट की पूरी टीम से सीधे संवाद करते नज़र आए। यह उपलब्धि इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि स्काईरूट अपने पहले ही प्रयास में रॉकेट को ऑर्बिट तक पहुँचाने वाली भारत की पहली निजी अंतरिक्ष कंपनी बन गई है।

प्रधानमंत्री ने क्या कहा

बधाई कॉल के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'स्काईरूट ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नई शुरुआत की है। कंपनी ने न केवल आसमान में नए अवसरों के द्वार खोले हैं, बल्कि धरती पर भी ऐसी मज़बूत नींव तैयार की है, जो देश के युवाओं को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।'

उन्होंने टीम की युवा संरचना की विशेष सराहना करते हुए कहा, 'मुझे यह देखकर खुशी हुई कि टीम के अधिकांश सदस्य 25 से 30 वर्ष की उम्र के युवा हैं। शुरुआत में चेहरों पर मिशन की चिंता दिखाई दे रही थी, लेकिन सफलता के बाद वही माहौल खुशी और उत्साह में बदल गया।'

मिशन को 'वंदे मातरम मिशन' की संज्ञा

प्रधानमंत्री ने विक्रम-1 मिशन को देश के लिए गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि 'यह केवल एक अंतरिक्ष अभियान नहीं, बल्कि भारत की क्षमता और नई पीढ़ी की ऊर्जा का प्रतीक है।' उन्होंने इस मिशन को एक तरह से 'वंदे मातरम मिशन' की संज्ञा दी — जो भारत की गरिमा को नई ऊँचाइयों तक ले जाने और युवाओं को तकनीक से जोड़ने का काम करेगा।

आत्मनिर्भरता की बात करते हुए मोदी ने कहा, 'एक समय था जब आत्मनिर्भर भारत की बात करने पर कुछ लोग इसका मज़ाक उड़ाते थे, लेकिन आज स्काईरूट जैसी भारतीय कंपनियों ने अपनी क्षमता साबित कर दी है।'

स्काईरूट की ऐतिहासिक उपलब्धि

कॉल के दौरान स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक पवन चंदना और कंपनी की टीम भी मौजूद रही। पवन चंदना ने प्रधानमंत्री से बातचीत को सौभाग्य बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा भेजा गया कार्ड — जिस पर उन्होंने 'वंदे मातरम' लिखा था — सफलतापूर्वक अंतरिक्ष तक पहुँचा। इसी भावना से मिशन की ऑर्बिट को भी जोड़ा गया।

चंदना ने बताया कि स्काईरूट पहली भारतीय निजी कंपनी बन गई है जिसने अपने पहले ही प्रयास में रॉकेट को ऑर्बिट तक पहुँचाने की उपलब्धि हासिल की। उन्होंने इसे पूरी तरह भारतीय डिज़ाइन और भारतीय प्रतिभा की सफलता बताया।

भारत के निजी अंतरिक्ष कार्यक्रम का महत्व

यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार निजी क्षेत्र की भागीदारी से अंतरिक्ष उद्योग को नई गति देने की कोशिश में लगी है। गौरतलब है कि इसरो (ISRO) के दशकों के अनुभव के बाद अब निजी कंपनियाँ भी ऑर्बिटल लॉन्च की क्षमता हासिल कर रही हैं — जो वैश्विक वाणिज्यिक अंतरिक्ष बाज़ार में भारत की स्थिति को मज़बूत करती है।

प्रधानमंत्री ने टीम को आगे बढ़ते रहने का संदेश देते हुए कहा कि सरकार और पूरा देश उनके प्रयासों के साथ खड़ा है। इस तरह की उपलब्धियाँ भारत के युवाओं में नई उम्मीद और आत्मविश्वास पैदा करती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक ऑर्बिटल लॉन्च और एक परिपक्व वाणिज्यिक अंतरिक्ष उद्योग के बीच लंबा रास्ता है। असली कसौटी यह होगी कि स्काईरूट अगले वर्षों में कितनी नियमितता और किफ़ायती दर से लॉन्च कर पाती है — ठीक वैसे जैसे SpaceX ने Falcon 9 से वाणिज्यिक बाज़ार में जगह बनाई। भारत सरकार ने निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष खोला है, पर नीतिगत ढाँचा, बीमा तंत्र और वैश्विक प्रतिस्पर्धा अभी भी बड़ी चुनौतियाँ हैं। 'वंदे मातरम मिशन' जैसी भावनात्मक ब्रांडिंग से आगे बढ़कर सरकार को स्काईरूट जैसी कंपनियों के लिए दीर्घकालिक नीतिगत समर्थन सुनिश्चित करना होगा।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विक्रम-1 रॉकेट क्या है और इसकी सफलता क्यों महत्वपूर्ण है?
विक्रम-1 स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा निर्मित भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट है, जिसने अपने पहले ही प्रयास में सफलतापूर्वक ऑर्बिट तक पहुँचने का कीर्तिमान स्थापित किया। यह भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
PM मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस को किस संदर्भ में बधाई दी?
PM मोदी ने 18 जुलाई 2026 को इंस्टाग्राम पर साझा एक वीडियो के ज़रिए स्काईरूट की टीम से सीधे संवाद किया और विक्रम-1 की सफलता को 'आत्मनिर्भर भारत' की क्षमता का प्रमाण बताया। उन्होंने मिशन को 'वंदे मातरम मिशन' की संज्ञा दी।
स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक कौन हैं?
स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक पवन चंदना हैं, जो बधाई कॉल के दौरान टीम के साथ मौजूद थे। उन्होंने बताया कि PM मोदी का 'वंदे मातरम' लिखा कार्ड सफलतापूर्वक अंतरिक्ष तक पहुँचा।
विक्रम-1 की सफलता भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए क्या मायने रखती है?
यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत का निजी क्षेत्र अब ऑर्बिटल लॉन्च की क्षमता हासिल कर चुका है, जो वैश्विक वाणिज्यिक अंतरिक्ष बाज़ार में भारत की स्थिति को मज़बूत करती है। इसरो के दशकों के अनुभव के बाद निजी कंपनियों का यह कदम भारत के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को नई दिशा देता है।
स्काईरूट की टीम की क्या विशेषता है जिसे PM मोदी ने सराहा?
PM मोदी ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि स्काईरूट टीम के अधिकांश सदस्य 25 से 30 वर्ष की आयु के युवा हैं। उन्होंने कहा कि यह युवा ऊर्जा और वैज्ञानिक दृष्टि भारत की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
राष्ट्र प्रेस
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