विक्रम-1 की सफलता पर PM मोदी बोले — 'आत्मनिर्भर भारत का सबूत सामने', स्काईरूट टीम को दिया मिलने का न्योता
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 जुलाई 2026 को निजी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस के रॉकेट 'विक्रम-1' की सफल उड़ान के बाद टीम को फोन पर बधाई दी और इस उपलब्धि को आत्मनिर्भर भारत का जीवंत प्रमाण बताया। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर में मौजूद टीम से सीधी बातचीत में मोदी ने कहा कि यह 'मिशन आगमन' है और इस आगमन को अभी और आगे बढ़ाना है।
युवा टीम ने किया प्रभावित
प्रधानमंत्री मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापकों से बातचीत में कहा, 'सबसे पहले स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को बहुत-बहुत बधाई। मुझे इस सफलता के लिए आनंद है। मैं इस पूरे लॉन्चिंग कार्यक्रम को देख रहा था। आपकी पूरी टीम 20-30 साल की उम्र की दिखती है — यह मुझे और खुशी दे रही थी।' उन्होंने टीम के चेहरे पर पहले छाई चिंता और फिर खुशी के माहौल का ज़िक्र करते हुए इस सफलता को 'महत्वपूर्ण निर्णय' की परिणति बताया।
अंतरिक्ष निजीकरण के फैसले को मिली ताकत
मोदी ने स्वीकार किया कि जब उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र के निजीकरण का निर्णय लिया था, तब अनेक आशंकाएँ सामने थीं। उन्होंने कहा, 'मैं इस दिशा में आगे बढ़ता गया। अब आपके कारण मेरे उस निर्णय को ताकत मिल गई है। देश के नौजवानों पर भरोसा करना चाहिए, उन्हें काम देना चाहिए — और वे करके दिखाते हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत का निजी अंतरिक्ष उद्योग वैश्विक निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
'वंदे मातरम' पहुँचा कक्षा में
स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक नागा भरत डाका ने मोदी को बताया कि उनका भेजा कार्ड — जिस पर 'वंदे मातरम' लिखा था — सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में पहुँच चुका है। इस पर मोदी ने कहा, 'इस बार हमारा देश वंदे मातरम के 150 वर्ष मना रहा है। मैं चाहता था कि इसे एक नए तरीके से मनाएं। वंदे मातरम ही था जिसने देश के नौजवानों को हमेशा देश के लिए जीने-मरने की प्रेरणा दी।' उन्होंने इस मिशन को 'वंदे मातरम मिशन' की संज्ञा देते हुए कहा कि यह भारत माँ की गरिमा को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाने का प्रयास है।
आत्मनिर्भर भारत पर उठे सवालों का जवाब
मोदी ने विक्रम-1 की सफलता को आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा की पुष्टि बताया। उन्होंने कहा, 'जब मैं आत्मनिर्भर भारत की बात करता था, तब नासमझी में कुछ लोग उसका मज़ाक उड़ाते थे। आज आपने सिद्ध कर दिया कि हम इस क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनने में सक्षम हैं। आज सबूत हमारे सामने है।' गौरतलब है कि स्काईरूट एयरोस्पेस भारत की पहली निजी अंतरिक्ष कंपनियों में से एक है जिसने स्वदेशी रॉकेट को कक्षा में स्थापित किया है।
आगे क्या
प्रधानमंत्री ने स्काईरूट टीम को जल्द मुलाकात का निमंत्रण दिया और कहा, 'आप आगे बढ़िए — मैं पूरी तरह आपके साथ हूँ।' विशेषज्ञों का मानना है कि विक्रम-1 की सफलता भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में निवेश और स्टार्टअप गतिविधि को और गति दे सकती है, जो पहले से ही इसरो की नई नीतियों के तहत विस्तार पा रहा है।