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पॉश कानून में बड़ा सुधार: NCW की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक में गिग वर्कर्स और डिजिटल उत्पीड़न को दायरे में लाने की सिफारिश

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पॉश कानून में बड़ा सुधार: NCW की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक में गिग वर्कर्स और डिजिटल उत्पीड़न को दायरे में लाने की सिफारिश

सारांश

पॉश कानून बना था दफ्तरों के लिए — लेकिन अब कार्यस्थल बदल चुका है। NCW की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक में गिग वर्कर्स, वर्चुअल उत्पीड़न और AI-जनित सामग्री को कानून के दायरे में लाने की माँग उठी। सिफारिश रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने 17-18 जुलाई 2026 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में पॉश एक्ट पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम का समापन किया।
गिग वर्कर्स , प्लेटफॉर्म वर्कर्स और संविदा कर्मियों को पॉश कानून के तहत प्रभावी सुरक्षा देने पर विशेष जोर दिया गया।
ई-मेल, वर्चुअल मीटिंग, सोशल मीडिया और AI से होने वाले डिजिटल उत्पीड़न को कानूनी दायरे में लाने की सिफारिश की गई।
केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी और NCW अध्यक्ष विजया रहाटकर ने उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की।
NCW ने IC और LC के लिए जाँच प्रक्रिया पर विस्तृत हैंडबुक जारी की।
सभी सुझावों को मिलाकर व्यापक सिफारिश रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी।

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने 17-18 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम का समापन किया, जिसमें कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 — जिसे पॉश एक्ट के नाम से जाना जाता है — के प्रभावी क्रियान्वयन पर केंद्रित विमर्श हुआ। इस कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, न्यायपालिका, कानूनी विशेषज्ञों, उद्योग जगत और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का स्वरूप और उद्देश्य

पहले दिन 17 जुलाई को राष्ट्रीय जागरूकता कार्यक्रम और दूसरे दिन 18 जुलाई को राष्ट्रीय परामर्श (नेशनल कंसल्टेशन) आयोजित किया गया। उद्घाटन सत्र में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी और NCW अध्यक्ष विजया रहाटकर उपस्थित रहीं। इस आयोजन का मूल उद्देश्य पॉश अधिनियम को बदलते कार्यस्थलों और नई डिजिटल चुनौतियों के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाना था।

गिग वर्कर्स और डिजिटल उत्पीड़न पर विशेष जोर

राष्ट्रीय परामर्श के दौरान उभरे प्रमुख मुद्दों में गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स, घर से काम करने वाले कर्मचारियों और संविदा कर्मियों को पॉश कानून के तहत अधिक प्रभावी सुरक्षा देने की आवश्यकता प्रमुख रही। विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि वर्तमान कानूनी ढाँचा मुख्यतः पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंधों पर आधारित है, जबकि गिग अर्थव्यवस्था में लाखों महिलाएँ इस सुरक्षा से वंचित हैं।

इसके साथ ही ई-मेल, प्रोफेशनल मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, वर्चुअल मीटिंग, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार आपत्तिजनक सामग्री के माध्यम से होने वाले यौन उत्पीड़न से निपटने के लिए कानूनी और संस्थागत व्यवस्था को मजबूत बनाने पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।

आंतरिक समितियों की स्वतंत्रता और नई चुनौतियाँ

बैठक में आंतरिक शिकायत समितियों (IC) की स्वतंत्रता और प्रभावशीलता बढ़ाने, बाहरी सदस्यों की भूमिका और वित्तीय सहयोग पर भी चर्चा हुई। को-वर्किंग स्पेस, स्पोर्ट्स अकादमी, आवासीय सोसायटी और साझा कार्यालयों जैसे गैर-पारंपरिक कार्यस्थलों में पॉश कानून के बेहतर क्रियान्वयन को लेकर भी सुझाव दिए गए। जवाबदेही, निगरानी व्यवस्था और शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण को सुनिश्चित करने के उपायों पर भी विचार किया गया।

NCW अध्यक्ष का संदेश

NCW अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि पॉश अधिनियम केवल एक कानूनी व्यवस्था नहीं, बल्कि कामकाजी महिलाओं को यह भरोसा दिलाने वाला कानून है कि उनकी गरिमा, अधिकार और आकांक्षाओं की रक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि हाइब्रिड वर्क मॉडल, वर्क फ्रॉम होम और AI के बढ़ते उपयोग को देखते हुए संस्थागत व्यवस्था और कानूनी ढाँचे को भी समय के साथ विकसित करना होगा। उनके अनुसार, 'जागरूकता, रोकथाम और संस्थागत संवेदनशीलता ही सुरक्षित कार्यस्थल की सबसे मजबूत नींव हैं।'

हैंडबुक जारी और आगे की राह

कार्यक्रम के दौरान NCW ने 'पॉश एक्ट के तहत आंतरिक समितियों (IC) और स्थानीय समितियों (LC) के लिए जाँच प्रक्रिया' विषय पर एक विस्तृत हैंडबुक जारी की, जो शिकायतों की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जाँच के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करती है। आयोग ने बताया कि इस राष्ट्रीय परामर्श, देशभर में आयोजित क्षेत्रीय बैठकों और विभिन्न हितधारकों के सुझावों को मिलाकर एक व्यापक सिफारिश रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जो केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी। इस रिपोर्ट का लक्ष्य देशभर में महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और समावेशी कार्यस्थल सुनिश्चित करना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गिग अर्थव्यवस्था में काम करने वाली लाखों महिलाएँ आज भी इसके दायरे से बाहर हैं — यह कानून की सीमा नहीं, उसकी संरचनात्मक खामी है। NCW का यह परामर्श सही दिशा में है, पर असली परीक्षा सिफारिश रिपोर्ट के केंद्र सरकार तक पहुँचने के बाद शुरू होगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत की गिग अर्थव्यवस्था में महिला भागीदारी तेज़ी से बढ़ रही है और डिजिटल कार्यस्थल पर उत्पीड़न के मामले दर्ज करने की कोई स्पष्ट कानूनी राह अभी तक नहीं है। बिना बाध्यकारी समयसीमा और स्वतंत्र निगरानी तंत्र के, यह परामर्श भी पिछली कई रिपोर्टों की तरह फ़ाइलों में दब सकता है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पॉश एक्ट क्या है और इसमें सुधार की ज़रूरत क्यों है?
पॉश एक्ट (कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न रोकथाम, प्रतिषेध और प्रतितोष अधिनियम, 2013) कार्यस्थल पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न से सुरक्षा देने वाला केंद्रीय कानून है। बदलते कार्यस्थलों — जैसे गिग इकॉनमी, वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल संचार — के चलते इसके दायरे और क्रियान्वयन में सुधार की माँग उठ रही है।
NCW की बैठक में गिग वर्कर्स को लेकर क्या सिफारिश की गई?
NCW के राष्ट्रीय परामर्श में गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स, संविदा कर्मियों और घर से काम करने वाले कर्मचारियों को पॉश कानून के तहत प्रभावी सुरक्षा देने पर जोर दिया गया। वर्तमान कानूनी ढाँचा मुख्यतः पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंधों पर आधारित है, जिससे गिग वर्कर्स अक्सर इस सुरक्षा से वंचित रह जाती हैं।
डिजिटल उत्पीड़न को पॉश कानून में कैसे शामिल करने की बात हुई?
बैठक में ई-मेल, प्रोफेशनल मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, वर्चुअल मीटिंग, सोशल मीडिया और AI से तैयार आपत्तिजनक सामग्री के ज़रिए होने वाले उत्पीड़न को पॉश कानून के दायरे में लाने पर विचार हुआ। इसके लिए कानूनी और संस्थागत व्यवस्था को मजबूत बनाने के सुझाव दिए गए।
NCW ने इस कार्यक्रम में कौन-सी हैंडबुक जारी की?
NCW ने 'पॉश एक्ट के तहत आंतरिक समितियों (IC) और स्थानीय समितियों (LC) के लिए जाँच प्रक्रिया' विषय पर एक विस्तृत हैंडबुक जारी की। इसका उद्देश्य शिकायतों की निष्पक्ष, पारदर्शी, समयबद्ध और कानूनी रूप से सही जाँच के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है।
इस राष्ट्रीय परामर्श के बाद आगे क्या होगा?
NCW इस परामर्श, देशभर की क्षेत्रीय बैठकों और विभिन्न हितधारकों के सुझावों को मिलाकर एक व्यापक सिफारिश रिपोर्ट तैयार करेगा, जो केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर पॉश अधिनियम और उससे जुड़े नियमों के क्रियान्वयन को और प्रभावी बनाने पर विचार किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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