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NCW की पॉश एडवाइजरी: सभी राज्यों को अनिवार्य ऑडिट और मॉनिटरिंग सेल बनाने के निर्देश

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NCW की पॉश एडवाइजरी: सभी राज्यों को अनिवार्य ऑडिट और मॉनिटरिंग सेल बनाने के निर्देश

सारांश

राष्ट्रीय महिला आयोग ने पॉश एक्ट को लेकर देशभर के राज्यों और जिला प्रशासन को सख्त एडवाइजरी जारी की है — डिजिटल कंप्लायंस डैशबोर्ड, जिला नोडल अधिकारी और 50% महिला प्रतिनिधित्व वाली इंटरनल कमेटी अनिवार्य। चेयरपर्सन विजया रहाटकर ने इसे कानूनी नहीं, सामूहिक जिम्मेदारी बताया।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने 19 जून 2026 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पॉश एक्ट के अनुपालन हेतु एडवाइजरी जारी की।
एडवाइजरी मुख्य सचिवों, DGP, जिला मजिस्ट्रेटों, SSP और पुलिस आयुक्तों को भेजी गई है।
हर जिले में नोडल जिला अधिकारी नियुक्त करने और पॉश मॉनिटरिंग सेल या डिजिटल कंप्लायंस डैशबोर्ड बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
इंटरनल कमेटी में कम से कम 50% महिला प्रतिनिधित्व और एक बाहरी विशेषज्ञ अनिवार्य किया गया है।
NCW चेयरपर्सन विजया रहाटकर ने कहा कि पॉश एक्ट का पालन 'सामूहिक जिम्मेदारी' है।

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने 19 जून 2026 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एक व्यापक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें 'कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013' — जिसे पॉश एक्ट कहा जाता है — के प्रावधानों को तत्काल और प्रभावी ढंग से लागू करने का आह्वान किया गया है। यह एडवाइजरी सरकारी, निजी, संगठित और असंगठित — हर प्रकार के कार्यस्थल पर लागू होती है।

एडवाइजरी किसे भेजी गई

आयोग ने यह एडवाइजरी सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों (DGP) को भेजी है। जमीनी स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए देशभर के जिला मजिस्ट्रेटों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP) और पुलिस आयुक्तों को भी यह निर्देश अलग से भेजे गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब कार्यस्थल उत्पीड़न की शिकायतें देशभर में लगातार सामने आ रही हैं।

मुख्य निर्देश और प्रावधान

एडवाइजरी में राज्यों को पॉश एक्ट के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए विशेष पॉश मॉनिटरिंग सेल या डिजिटल कंप्लायंस डैशबोर्ड स्थापित करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, हर जिले में जिला अधिकारी को नोडल अथॉरिटी के रूप में नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है, जो कार्यान्वयन, जागरूकता और शिकायत निवारण की जिम्मेदारी संभालेगा।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि हर संस्थान की इंटरनल कमेटी (IC) का गठन कानून के अनुसार होना चाहिए — जिसमें एक महिला पीठासीन अधिकारी, योग्य सदस्य, एक बाहरी विशेषज्ञ और कम से कम 50 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व अनिवार्य है। गौरतलब है कि कई संस्थानों में इन्हीं बुनियादी शर्तों का पालन नहीं हो रहा था।

आयोग अध्यक्ष का बयान

राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन विजया रहाटकर ने कहा, 'किसी महिला को कभी भी अपनी गरिमा और अपनी आजीविका के बीच चुनाव नहीं करना पड़ना चाहिए। हर कार्यस्थल सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर की जगह होनी चाहिए।' उन्होंने आगे कहा कि 'पॉश एक्ट को प्रभावी ढंग से लागू करना सिर्फ एक कानूनी जिम्मेदारी नहीं है बल्कि महिलाओं के सशक्तीकरण और राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक सामूहिक जिम्मेदारी भी है।'

राज्यों से अपेक्षित कार्रवाई

एडवाइजरी में राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे वरिष्ठ प्रशासनिक स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करें, क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाएँ और संस्थानों को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करें। साथ ही, न्यायालयों के निर्देशों और कानूनी दायित्वों का पालन सुनिश्चित करना भी अनिवार्य किया गया है।

आगे की राह

यह एडवाइजरी कार्यस्थल सुरक्षा की दिशा में संस्थागत जवाबदेही को मजबूत करने का प्रयास है। डिजिटल कंप्लायंस डैशबोर्ड और जिला-स्तरीय नोडल अधिकारी की व्यवस्था यदि प्रभावी ढंग से लागू हुई, तो यह पॉश एक्ट के क्रियान्वयन में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल अनुपालन की जमीनी हकीकत का है — पॉश एक्ट 2013 से लागू है, फिर भी अनगिनत संस्थानों में इंटरनल कमेटियाँ या तो अस्तित्व में नहीं हैं या केवल कागजों पर हैं। डिजिटल कंप्लायंस डैशबोर्ड की परिकल्पना सही दिशा में है, पर इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि डेटा कौन भरेगा, कौन सत्यापित करेगा और गैर-अनुपालन पर दंड कितना वास्तविक होगा। असंगठित क्षेत्र — जहाँ महिला कामगारों की सबसे बड़ी संख्या है — इस पूरे ढाँचे के सबसे कमज़ोर कड़ी बनी रहेगी जब तक वहाँ जागरूकता और प्रवर्तन दोनों एक साथ नहीं पहुँचते।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NCW की पॉश एडवाइजरी 2026 क्या है?
राष्ट्रीय महिला आयोग ने 19 जून 2026 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पॉश एक्ट 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें पॉश मॉनिटरिंग सेल, डिजिटल कंप्लायंस डैशबोर्ड और जिला-स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
पॉश एक्ट के तहत इंटरनल कमेटी में क्या होना अनिवार्य है?
NCW की एडवाइजरी के अनुसार, हर इंटरनल कमेटी में एक महिला पीठासीन अधिकारी, योग्य सदस्य, एक बाहरी विशेषज्ञ और कम से कम 50 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व होना कानूनी रूप से अनिवार्य है। यह प्रावधान पॉश एक्ट 2013 में पहले से मौजूद है, लेकिन अब इसके सख्त अनुपालन पर जोर दिया गया है।
यह एडवाइजरी किन अधिकारियों को भेजी गई है?
एडवाइजरी सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों (DGP) को भेजी गई है। जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के लिए जिला मजिस्ट्रेटों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP) और पुलिस आयुक्तों को भी अलग से यह निर्देश प्राप्त हुए हैं।
पॉश मॉनिटरिंग सेल या डिजिटल कंप्लायंस डैशबोर्ड क्यों जरूरी है?
NCW ने संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए इन्हें अनिवार्य बताया है। ये तंत्र राज्य सरकारों को यह ट्रैक करने में मदद करेंगे कि कौन से संस्थान पॉश एक्ट का पालन कर रहे हैं और कहाँ चूक हो रही है। इससे शिकायत निवारण में पारदर्शिता और तेजी आने की उम्मीद है।
क्या यह एडवाइजरी असंगठित क्षेत्र पर भी लागू होती है?
हाँ, NCW की एडवाइजरी में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह सरकारी, निजी, संगठित और असंगठित — हर प्रकार के कार्यस्थल पर लागू होती है। असंगठित क्षेत्र में जागरूकता और अनुपालन सुनिश्चित करना जिला-स्तरीय नोडल अधिकारियों की प्रमुख जिम्मेदारी होगी।
राष्ट्र प्रेस
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