महाराष्ट्र में कार्यस्थल उत्पीड़न रोकने को महिला विधायकों की संयुक्त समिति बनेगी, CM फडणवीस का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 24 जून 2026 को महाराष्ट्र विधान परिषद में घोषणा की कि कार्यस्थलों पर महिलाओं के उत्पीड़न को रोकने के लिए विधानसभा और विधान परिषद की महिला सदस्यों की एक संयुक्त समिति गठित की जाएगी। यह समिति कॉर्पोरेट कार्यस्थलों में लागू मौजूदा कानूनों और दिशा-निर्देशों की व्यापक समीक्षा करेगी और सुधारों की सिफारिश करेगी।
समिति का दायरा और जिम्मेदारी
प्रस्तावित संयुक्त समिति तीन मोर्चों पर काम करेगी — वर्तमान कानूनी ढाँचे का अध्ययन, हाल की घटनाओं की समीक्षा और भविष्य के लिए नीतिगत सुझाव। सरकार ने स्पष्ट किया है कि समिति की सिफारिशें लागू कर कार्यस्थलों को महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षित बनाया जाएगा। समिति यह भी जाँचेगी कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर लागू दिशा-निर्देशों को कानूनी रूप से और कड़ा कैसे किया जाए।
मामले की पृष्ठभूमि: नासिक का चर्चित प्रकरण
यह कदम अप्रैल-मई 2026 में नासिक में सामने आए एक प्रमुख उत्पीड़न मामले के बाद उठाया गया है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा। परिषद सदस्य चित्रा वाघ ने नासिक में महिला कर्मचारियों के यौन और मानसिक उत्पीड़न से जुड़े गंभीर आरोप सदन में उठाए, जिसके बाद नीलम गोर्हे और मनीषा कायंदे सहित कई विधायकों ने इस विषय पर चर्चा में भाग लिया।
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की फैक्ट फाइंडिंग समिति — जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस साधना जाधव ने की — ने जाँच के दौरान संबंधित कार्यस्थल के माहौल को 'बेहद विषाक्त' बताया था। आयोग की 50 पन्नों की रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून (POSH) के पालन में गंभीर खामियाँ, शिकायत निवारण तंत्र की विफलता और भय का वातावरण होने की बात दर्ज की गई थी।
एसआईटी जाँच और एफआईआर
मुख्यमंत्री फडणवीस ने सदन को बताया कि नासिक पुलिस की 12 सदस्यीय विशेष जाँच टीम (SIT) अपनी जाँच लगभग पूरी कर चुकी है। अब तक शिकायतों के आधार पर 9 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। एसआईटी ने आरोपियों के खिलाफ 1,500 पन्नों की चार्जशीट भी दाखिल की है, जिसमें कंपनी से जुड़े कई लोगों के नाम शामिल हैं। पीड़िता की शुरुआती शिकायत पर कार्रवाई न करने वाले मैनेजर को भी आरोपी बनाया गया है।
जाँच में यह भी सामने आया है कि कुछ कर्मचारियों पर महिलाओं को निशाना बनाकर उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने के आरोप हैं। हालाँकि, एसआईटी को कंपनी की संस्थागत भूमिका का कोई प्रमाण नहीं मिला है और संबंधित कंपनी ने जाँच में पूरा सहयोग दिया है।
सीएम का कॉर्पोरेट क्षेत्र पर बयान
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, 'किसी एक घटना के आधार पर देश की अग्रणी आईटी कंपनी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा। कॉर्पोरेट क्षेत्र ने भारत को वैश्विक पहचान दिलाई है और रोज़गार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित कंपनी सरकार द्वारा तय किए जाने वाले सभी सुरक्षा उपाय लागू करने को तैयार है।
अन्य मामलों पर त्वरित कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि कार्यस्थल सुरक्षा से जुड़ी अन्य शिकायतों पर भी तेज़ी से कदम उठाए जाएँगे। विधायक मनीषा कायंदे द्वारा उठाई गई सोलापुर के एक सरकारी आईटीआई से जुड़ी शिकायत की तत्काल जाँच कराई जाएगी। इसके अलावा पुणे के निकट तालेगांव दाभाडे में स्थित एक विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनी के खिलाफ मिली शिकायत की उच्चस्तरीय जाँच के आदेश दिए गए हैं और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ 15 दिनों के भीतर कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं। आने वाले दिनों में समिति के गठन की औपचारिक अधिसूचना और उसके कार्यक्षेत्र की घोषणा अपेक्षित है।