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सुप्रिया सुले ने फडणवीस को लिखा पत्र, महाराष्ट्र में महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त की

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सुप्रिया सुले ने फडणवीस को लिखा पत्र, महाराष्ट्र में महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त की

सारांश

सुप्रिया सुले ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर महाराष्ट्र में महिलाओं की सुरक्षा की चिंताओं को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति गंभीर है और तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। बच्चों के खिलाफ अत्याचार की घटनाएं भी बढ़ रही हैं।

मुख्य बातें

महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति गंभीर है।
बच्चों के खिलाफ अत्याचार में वृद्धि।
सरकार की जिम्मेदारी है सुरक्षित माहौल प्रदान करना।
महिला पुलिस अधिकारियों की संख्या बढ़ानी चाहिए।
बाल विवाह के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति की आवश्यकता।

मुंबई, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति राज्य में अत्यंत गंभीर है। बच्चों के खिलाफ अत्याचार की घटनाओं में भी वृद्धि देखी जा रही है। यह एक गंभीर मामला है और राज्य में सभी को सुरक्षित माहौल प्रदान करना सरकार का दायित्व है।

सांसद सुप्रिया सुले ने कहा, "मीडिया में रोजाना आने वाली खबरें और राज्यभर में हो रही घटनाएं यह दर्शाती हैं कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा में वृद्धि हो रही है। महिलाओं के साथ मारपीट, हत्या, यौन उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, किडनैपिंग और बच्चों के शोषण की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। मुंबई, पुणे, नागपुर, छत्रपति संभाजीनगर और नासिक जैसे तेज़ी से विकसित होते शहरों में अपराधों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है और नागरिक डर के साए में जी रहे हैं।"

उन्होंने कहा, "ग्रामीण इलाकों में भी बढ़ते अपराधों के कारण नागरिक अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, जिसका प्रभाव लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, और विकास पर पड़ रहा है। यह अत्यंत गंभीर है और कानून-व्यवस्था के संदर्भ में, देश में एक सेक्युलर राज्य की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रहा है, जो बेहद दुखद है। राज्य में महिलाओं को सुरक्षित माहौल प्रदान करना सरकार की ज़िम्मेदारी है, और इसके लिए तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता है।"

सुप्रिया सुले ने सरकार से अनुरोध करते हुए कहा, "राज्य के गृह मंत्री को महिला सुरक्षा के दृष्टिकोण से सभी जिलों का तात्कालिक रिव्यू करना चाहिए। राज्य पुलिस बल में महिला पुलिस अधिकारियों की संख्या में वृद्धि की जानी चाहिए और रात की गश्त को भी बढ़ाना चाहिए। सभी जिलों में 'विकास कमेटी' का रिव्यू किया जाना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वे अपने कार्य कर रही हैं। साथ ही, राज्य में महिला आयोग का पद खाली है और महिला आयोग को तुरंत अपनी सभी क्षमताओं के साथ सक्रिय किया जाना चाहिए।"

उन्होंने कहा, "घरेलू हिंसा को रोकने के लिए गांव-गांव में सिस्टम को मजबूत किया जाना चाहिए, और बाल विवाह जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकारी एजेंसियों को विशेष रूप से सतर्क रहने का निर्देश दिया जाना चाहिए। सरकार को बाल विवाह और बाल शोषण के संदर्भ में 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाने की आवश्यकता है। स्कूलों और कॉलेजों में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्कता सुनिश्चित करने के लिए तुरंत गाइडलाइंस जारी की जानी चाहिए।"

अंत में, सुले ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस महिलाओं की सुरक्षा को लेकर व्यक्त की गई चिंताओं के मद्देनजर उचित कार्रवाई करेंगे और महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल बनाने की दिशा में कार्य करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल राज्य की प्रतिष्ठा को प्रभावित करता है, बल्कि समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सुप्रिया सुले का पत्र इस दिशा में एक आवश्यक कदम है, जो सरकार को सतर्कता के साथ उचित कार्रवाई करने की आवश्यकता का संकेत देता है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रिया सुले ने पत्र में क्या मुद्दा उठाया?
सुप्रिया सुले ने महिलाओं की सुरक्षा की गंभीर स्थिति और बच्चों के खिलाफ अत्याचार की घटनाओं की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त की।
मुख्यमंत्री को पत्र लिखने का उद्देश्य क्या था?
पत्र का उद्देश्य सरकार को महिलाओं की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने के लिए प्रेरित करना था।
महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में वृद्धि का क्या कारण है?
महिलाओं के खिलाफ हिंसा का बढ़ता मामला सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक कारणों से संबंधित है।
सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए?
सरकार को महिला पुलिस अधिकारियों की संख्या बढ़ानी चाहिए और ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा को मजबूत करना चाहिए।
बाल विवाह को रोकने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए?
सरकार को बाल विवाह के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनानी चाहिए और एजेंसियों को सतर्क रहने का निर्देश देना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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