शिवसेना (यूबीटी) का महाराष्ट्र सरकार पर हमला: नसरापुर बलात्कार-हत्या पर फडणवीस से माफी की मांग
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने सोमवार, 4 मई 2026 को महाराष्ट्र की बिगड़ती कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित संपादकीय में पुणे जिले के भोर तहसील के नसरापुर में चार वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या की घटना का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से महाराष्ट्र की माताओं और बच्चियों से सार्वजनिक माफी माँगने की माँग की गई।
नसरापुर की दर्दनाक घटना और जनाक्रोश
भोर तालुका के नसरापुर गाँव में चार साल की एक मासूम बच्ची के साथ बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई। इस घटना से पूरे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। 'सामना' के संपादकीय के अनुसार, गुस्साए लोग बच्ची का शव सड़क पर लेकर आए और आरोपी को तत्काल उनके हवाले करने की माँग करने लगे। हालाँकि, पुलिस ने भीड़ पर लाठीचार्ज कर दिया, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
सरकारी मशीनरी पर 'खामोश सायरन' का आरोप
संपादकीय में केंद्र सरकार द्वारा देशभर में मोबाइल फोन पर इमरजेंसी सायरन टेस्ट का उल्लेख करते हुए तंज कसा गया है कि आपदा की चेतावनी देने की यह कोशिश तब हो रही है, जब महाराष्ट्र में महिलाओं और छोटी बच्चियों के साथ रोज़ाना अत्याचार की घटनाएँ हो रही हैं और राज्य की सरकारी मशीनरी का 'सायरन' पूरी तरह खामोश है। लेख में नसरापुर, चाकन, नागपुर और सांगली में हुई घटनाओं को गृह विभाग की विफलता का प्रमाण बताया गया है।
फडणवीस पर सीधा निशाना
'सामना' के संपादकीय में मुख्यमंत्री फडणवीस पर आरोप लगाया गया है कि वे राज्य के गृह मंत्री के रूप में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। कहा गया है कि जब पश्चिम बंगाल, केरल, असम और तमिलनाडु में राजनीतिक दौरों में व्यस्त रहकर महाराष्ट्र की छवि चमकाने के दावे किए जा रहे हैं, तब राज्य के भीतर भ्रष्टाचार और अपराध बढ़ रहे हैं। लेख में यह भी याद दिलाया गया कि मुख्यमंत्री ने 'मिसिंग लिंक' टनल प्रोजेक्ट के उद्घाटन के दौरान लगे ट्रैफिक जाम के लिए जनता से माफी माँगी थी — लेकिन राज्य की बच्चियों और माताओं की सुरक्षा में विफलता पर कोई माफी नहीं आई।
भाजपा की 'दोहरी नीति' पर सवाल
संपादकीय में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर भी निशाना साधा गया है। कहा गया है कि जब पश्चिम बंगाल के आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले में BJP ने जोरदार विरोध किया था, वहीं महाराष्ट्र में हो रही इसी तरह की घटनाओं पर राजनीति न करने की नसीहत दी जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब पुणे में अत्याचार और हत्या की घटनाएँ चिंताजनक रूप से बढ़ रही हैं।
फास्ट ट्रैक कोर्ट और 'लड़की बहन योजना' पर तंज
लेख में सवाल उठाया गया है कि सरकार बार-बार फास्ट ट्रैक कोर्ट और फाँसी की सजा की बात करती है, लेकिन वास्तव में कितने दोषियों को सजा मिली है। इसके साथ ही 'लड़की बहन योजना' — जिसके तहत महिलाओं को हर महीने ₹1,500 की सहायता दी जाती है — पर भी तंज कसते हुए पूछा गया है कि क्या इतनी राशि देने से सरकार को उन महिलाओं की बेटियों की सुरक्षा की अनदेखी करने का अधिकार मिल जाता है। 'सामना' के अनुसार, यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि मानवता और महिलाओं की गरिमा का प्रश्न है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब महाराष्ट्र में महिला सुरक्षा को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा और सड़क — दोनों स्तरों पर और तेज़ होने की संभावना है।