एनएचआरसी सख्त: बच्चों से जुड़े CSAM मामले में मेटा, 6 राज्यों के डीजीपी और IT मंत्रालय को नोटिस
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 4 अगस्त 2026 को सोशल मीडिया पर बच्चों से जुड़ी अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री — कथित तौर पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल (CSAM) — उपलब्ध होने के आरोपों का संज्ञान लेते हुए मेटा इंडिया, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और छह राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) को नोटिस जारी किए हैं। आयोग ने सभी पक्षों से एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एक्शन टेकन रिपोर्ट — एटीआर) तलब की है।
मामले की पृष्ठभूमि
एनएचआरसी ने यह कार्रवाई एक गैर-लाभकारी संस्था की शिकायत के आधार पर की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मेटा के प्लेटफॉर्म्स — इंस्टाग्राम और फेसबुक — पर कुछ ऐसे लिंक सक्रिय हैं जो अश्लील प्रकृति के हैं, बच्चों के लिए सर्वथा अनुपयुक्त हैं और जिनमें कथित तौर पर CSAM हो सकता है। शिकायत के साथ संबंधित यूआरएल और डिजिटल साक्ष्य भी संलग्न किए गए हैं।
एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह बच्चों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन होगा और पॉक्सो अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा।
किन राज्यों को नोटिस मिला
आयोग ने ओडिशा, हरियाणा, नई दिल्ली, पश्चिम बंगाल, चंडीगढ़ और बिहार के डीजीपी को निर्देश दिया है कि शिकायत में संलग्न यूआरएल और डिजिटल साक्ष्यों की तत्काल साइबर क्राइम यूनिट और विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) के माध्यम से जाँच कराई जाए। यदि जाँच में संज्ञेय अपराध के संकेत मिलते हैं तो एफआईआर दर्ज कर सामग्री के निर्माता, अपलोडर, प्रकाशक, प्रसारक या अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान करते हुए कानूनी कार्रवाई की जाए।
गौरतलब है कि आयोग ने यह भी कहा कि यदि किसी बच्चे की पहचान पीड़ित के रूप में होती है तो उसे तत्काल बचाव, चिकित्सा सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श और पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए।
MeitY से क्या माँगा गया
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से आयोग ने तीन बिंदुओं पर जवाब माँगा है — पहला, कथित आपत्तिजनक यूआरएल को हटाने, ब्लॉक करने या उनकी पहुँच प्रतिबंधित करने के लिए क्या कदम उठाए गए; दूसरा, ऐसी सामग्री की पुनः अपलोडिंग रोकने की क्या व्यवस्था है; और तीसरा, ऑनलाइन बाल सुरक्षा को दीर्घकालिक रूप से मजबूत करने के लिए कौन-से प्रस्ताव विचाराधीन हैं।
मेटा इंडिया को निर्देश
मेटा इंडिया के लॉ एनफोर्समेंट प्रमुख को निर्देश दिया गया है कि कथित सामग्री हटाने या उसकी पहुँच अवरुद्ध करने के लिए की गई कार्रवाई का ब्यौरा दें। साथ ही संबंधित खातों, मेटाडेटा, आईपी लॉग और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के आदेश दिए गए हैं। आयोग ने यह भी पूछा है कि यदि सामग्री में CSAM पाया जाता है तो पॉक्सो कानून के तहत स्थानीय पुलिस या SJPU को सूचित करने के संबंध में मेटा की क्या नीति और कार्रवाई रही है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में ऑनलाइन बाल सुरक्षा को लेकर नीतिगत बहस तेज हो रही है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही पर संसद में भी सवाल उठते रहे हैं। एनएचआरसी के नोटिस की समयसीमा समाप्त होने के बाद आयोग प्राप्त रिपोर्टों के आधार पर अगली कार्रवाई तय करेगा — जिसमें संबंधित पक्षों को तलब करने या आगे की जाँच के आदेश देने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।