इंस्टाग्राम पर CSAM: एनएचआरसी ने 8 राज्यों के डीजीपी और मेटा को नोटिस जारी किए, 7 दिनों में 50 से अधिक मामले
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 7 अगस्त 2026 को इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री (CSAM) के प्रसार पर गंभीर संज्ञान लेते हुए 8 राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) और सोशल मीडिया कंपनी मेटा को औपचारिक नोटिस जारी किए हैं। आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो के अनुसार, पिछले सात दिनों में इस प्रकार के 50 से अधिक मामले सामने आए हैं जिनमें बच्चों के साथ बलात्कार और यौन शोषण के वीडियो इंस्टाग्राम पर अपलोड किए गए।
मुख्य घटनाक्रम
एनएचआरसी सदस्य प्रियांक कानूनगो ने बताया कि आयोग के संज्ञान में आए मामलों में पंजाब, दिल्ली, तेलंगाना और महाराष्ट्र सहित कुल 8 राज्य शामिल हैं। इन राज्यों के पुलिस प्रमुखों को निर्देश दिया गया है कि वे तत्काल एफआईआर दर्ज करें और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा, 'यह एक गंभीर अपराध है। हमने इंस्टाग्राम, भारत सरकार के आईटी मंत्रालय और आठ अलग-अलग राज्यों के पुलिस प्रमुखों को नोटिस जारी कर एफआईआर दर्ज करने और कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।'
यह ऐसे समय में आया है जब बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर वैश्विक स्तर पर दबाव बढ़ रहा है और भारत में भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर बहस तेज है।
मेटा और आईटी मंत्रालय पर दबाव
एनएचआरसी ने सीधे मेटा को भी नोटिस भेजा है और स्पष्ट किया है कि प्लेटफॉर्म को भारत के आईटी नियमों के तहत अवैध सामग्री तत्काल हटानी होगी। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को भी पूरे मामले से अवगत कराया गया है, ताकि केंद्र स्तर पर डिजिटल निगरानी को और सशक्त किया जा सके। गौरतलब है कि आईटी नियम 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री को 24 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य है।
जनता से अपील
आयोग सदस्य प्रियांक कानूनगो ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे ऐसी सामग्री देखने पर चुप न रहें। उन्होंने कहा, 'यदि कहीं भी चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल दिखाई देता है तो नजदीकी थाने में रिपोर्ट जरूर करें। यदि पुलिस कार्रवाई न करे तो आयोग को संपर्क करें।' उन्होंने यह भी कहा कि जनता की सक्रिय रिपोर्टिंग से आने वाले समय में और मामले सामने आने की संभावना है।
आम जनता और बच्चों पर असर
यह मामला केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं है — यह उन बच्चों की सुरक्षा का प्रश्न है जो डिजिटल माध्यमों पर सबसे अधिक असुरक्षित हैं। आलोचकों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के स्वचालित कंटेंट मॉडरेशन तंत्र भारत में भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के चलते अक्सर ऐसी सामग्री को पहचानने में विफल रहते हैं।
क्या होगा आगे
नोटिस का जवाब मिलने के बाद एनएचआरसी आगे की कार्रवाई तय करेगा। यदि राज्य पुलिस या मेटा की प्रतिक्रिया असंतोषजनक पाई गई तो आयोग उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में हस्तक्षेप की सिफारिश कर सकता है। MeitY से यह भी अपेक्षित है कि वह प्लेटफॉर्म अनुपालन रिपोर्ट सार्वजनिक करे।