एनएचआरसी ने 8 राज्यों के डीजीपी को नोटिस जारी किए, इंस्टाग्राम पर CSAM के 50+ मामलों पर मेटा इंडिया को चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने 7 अगस्त 2026 को खुलासा किया कि पिछले एक सप्ताह में इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण और आपत्तिजनक सामग्री (CSAM) के 50 से अधिक मामलों की शिकायतें आयोग को प्राप्त हुई हैं। इन शिकायतों के आधार पर आयोग ने पंजाब, दिल्ली, तेलंगाना, महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और बिहार — कुल 8 राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) को नोटिस जारी कर एफआईआर दर्ज करने और तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'पिछले एक सप्ताह में इंस्टाग्राम पर CSAM के 50 से अधिक मामलों की शिकायत आ चुकी हैं। प्राप्त जानकारी के आधार पर हमने पंजाब, दिल्ली, तेलंगाना, महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और बिहार के पुलिस प्रमुखों को नोटिस जारी कर एफआईआर दर्ज करने और कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं।'
इससे पहले बुधवार को कानूनगो ने कहा था कि उन्होंने छह राज्यों के डीजीपी को पत्र लिखा था। एक सप्ताह के भीतर यह संख्या बढ़कर आठ राज्यों तक पहुँच गई, जो मामलों की गंभीरता और व्यापकता को दर्शाती है।
मेटा इंडिया और मंत्रालय को चेतावनी
एनएचआरसी ने मेटा इंडिया को भी औपचारिक नोटिस जारी किया है, जिसमें कंपनी को अपने प्लेटफॉर्म पर सुधार करने और भारतीय कानूनों का पालन सुनिश्चित करने की चेतावनी दी गई है। इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को भी इस मामले में सतर्क किया गया है।
कानूनगो ने स्पष्ट किया कि इस तरह की सामग्री का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड होना उस प्लेटफॉर्म की घोर लापरवाही को उजागर करता है। उनके अनुसार, 'सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।'
अपराध की तीन अलग श्रेणियाँ
कानूनगो ने रेखांकित किया कि बच्चों से जुड़े इन अपराधों को तीन अलग-अलग श्रेणियों में देखा जाना चाहिए — बच्चों का यौन शोषण, ऐसी हरकतों की वीडियो रिकॉर्डिंग, और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड करना। उन्होंने कहा कि प्रत्येक श्रेणी एक स्वतंत्र आपराधिक कृत्य है और उसके लिए पृथक एफआईआर एवं जाँच अपेक्षित है।
पूर्व में भी हुई है कड़ी कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब एनएचआरसी ने सोशल मीडिया से जुड़े बाल संरक्षण मामलों में हस्तक्षेप किया हो। कानूनगो ने बताया कि बीबीसी से जुड़े एक मामले में भी आयोग ने संज्ञान लिया था और दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजा था। समय पर एफआईआर और जाँच रिपोर्ट न मिलने पर आयोग ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को समन भेजकर आयोग में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। गौरतलब है कि यह कदम दर्शाता है कि एनएचआरसी केवल नोटिस जारी करने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अनुपालन न होने पर कड़े कदम उठाने से भी नहीं हिचकता।
आगे क्या होगा
सभी 8 राज्यों के डीजीपी से एफआईआर दर्ज करने और कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने की अपेक्षा है। मेटा इंडिया को भी अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा। यदि संबंधित पक्ष निर्धारित समय में उचित कदम नहीं उठाते, तो एनएचआरसी के पास उन्हें आयोग के समक्ष तलब करने का अधिकार है। यह मामला भारत में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर बड़ी नीतिगत बहस को और तेज कर सकता है।