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मेटा अब बाल यौन शोषण मामले सीधे आई4सी साइबर पोर्टल को भेजेगी, भारत सरकार ने की पुष्टि

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मेटा अब बाल यौन शोषण मामले सीधे आई4सी साइबर पोर्टल को भेजेगी, भारत सरकार ने की पुष्टि

सारांश

मेटा ने भारत में बड़ा कदम उठाते हुए बाल यौन शोषण से जुड़े मामले सीधे आई4सी के साइबर अपराध पोर्टल को भेजने की घोषणा की। यह फैसला इंस्टाग्राम पर AI-निर्मित 300 से अधिक आपत्तिजनक विज्ञापनों की जाँच के बाद आया है और सरकार ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा।

मुख्य बातें

मेटा ने 15 सितंबर 2026 को घोषणा की कि वह बाल सुरक्षा मामले सीधे आई4सी के साइबर अपराध पोर्टल पर दर्ज कराएगी।
टेक्नोलॉजी ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट (टीटीपी) की जाँच में फेसबुक और इंस्टाग्राम पर 300 से अधिक AI-निर्मित बाल यौन शोषण सामग्री वाले विज्ञापन पाए गए।
सरकार ने स्पष्ट किया कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा; पर्याप्त उपाय न करने वाले प्लेटफॉर्म के विरुद्ध कार्रवाई संभव।
भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म IT अधिनियम और IT (मध्यस्थ दिशानिर्देश) नियम, 2021 के तहत जवाबदेह हैं।
अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ भी इसी प्रकार की व्यवस्था पर सरकार की बातचीत जारी है।

अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनी मेटा ने 15 सितंबर 2026 को घोषणा की कि वह बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों की जानकारी अब सीधे भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) द्वारा संचालित राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर दर्ज कराएगी। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) के प्रसार को लेकर मेटा भारत में कड़ी निगरानी के दायरे में आ चुकी है।

घोषणा की पृष्ठभूमि

टेक्नोलॉजी ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट (टीटीपी) की एक जाँच के बाद यह मामला सामने आया था, जिसमें पाया गया कि फेसबुक और इंस्टाग्राम पर इस वर्ष बाल यौन शोषण सामग्री वाले सशुल्क विज्ञापन प्रदर्शित किए गए। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से हेरफेर की गई असली बच्चों की तस्वीरें भी शामिल थीं। जाँच में मेटा के प्लेटफॉर्म पर AI-निर्मित बाल यौन शोषण सामग्री वाले 300 से अधिक विज्ञापन पाए गए, जिसके बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया।

मेटा की प्रतिबद्धता

मेटा के एक प्रवक्ता ने कहा, 'इस नुकसान से निपटने के हमारे सामूहिक प्रयासों को मजबूत करने के लिए, मेटा अब बाल सुरक्षा संबंधी मामलों की रिपोर्ट सीधे आई4सी द्वारा संचालित साइबर अपराध पोर्टल पर करेगी।' कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और वह दोषियों को सजा दिलाने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, मेटा की यह प्रतिबद्धता सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है। गौरतलब है कि यह पहल केवल आंतरिक सामग्री नियंत्रण तक सीमित न रहकर सीधे कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक सूचना पहुँचाने की व्यवस्था करती है।

सरकार का रुख और कानूनी ढाँचा

सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा भारत में संचालित प्रत्येक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए एक मूलभूत सिद्धांत है, जिस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। सरकार ने चेतावनी दी है कि जो प्लेटफॉर्म बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त सक्रिय उपाय नहीं अपनाते, उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है।

भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत शासित होते हैं, जो मध्यस्थों के लिए उचित सावधानी बरतने के दायित्व निर्धारित करते हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि हानिकारक सामग्री की पहचान और उसे हटाने के लिए अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ भी बातचीत जारी है।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य और व्यापक असर

यह घटनाक्रम बच्चों के लिए ऑनलाइन जोखिमों — जिनमें यौन शोषण, हानिकारक सामग्री और साइबर दुर्व्यवहार शामिल हैं — को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की बढ़ती वैश्विक जाँच के बीच आया है। यह ऐसे समय में है जब कई देश बड़ी तकनीकी कंपनियों पर बाल सुरक्षा के मामले में सख्त जवाबदेही तय करने की माँग कर रहे हैं।

आगे क्या होगा

सरकार ने संकेत दिया है कि केवल मेटा तक सीमित न रहते हुए अन्य प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ भी इसी प्रकार की व्यवस्था पर बातचीत जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आई4सी के साथ सीधी रिपोर्टिंग की यह प्रणाली भारत में बाल यौन शोषण के ऑनलाइन मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह प्रतिक्रियात्मक है, न कि स्वैच्छिक — यह कदम तब उठाया गया जब 300 से अधिक आपत्तिजनक विज्ञापनों की जाँच सार्वजनिक हो चुकी थी। असली सवाल यह है कि आई4सी को रिपोर्ट भेजने की यह व्यवस्था कितनी स्वचालित और पारदर्शी होगी — क्या मेटा स्वयं तय करेगी कि कौन-सा मामला 'रिपोर्ट योग्य' है? बिना स्वतंत्र ऑडिट और स्पष्ट समयसीमा के, यह प्रतिबद्धता महज एक जनसंपर्क अभ्यास बनकर रह सकती है। भारत सरकार को चाहिए कि वह इस व्यवस्था को कानूनी बाध्यता में बदले, न कि इसे स्वैच्छिक समझौते तक सीमित रखे।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेटा का आई4सी साइबर अपराध पोर्टल से क्या समझौता हुआ है?
मेटा ने घोषणा की है कि वह बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों की रिपोर्ट अब सीधे भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) द्वारा संचालित राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर दर्ज कराएगी। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि ऐसे मामले केवल प्लेटफॉर्म के आंतरिक सामग्री नियंत्रण तक सीमित न रहें।
इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण सामग्री के विज्ञापनों की जाँच किसने की?
टेक्नोलॉजी ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट (टीटीपी) ने यह जाँच की, जिसमें फेसबुक और इंस्टाग्राम पर AI-निर्मित बाल यौन शोषण सामग्री वाले 300 से अधिक सशुल्क विज्ञापन पाए गए। इन विज्ञापनों में AI से हेरफेर की गई असली बच्चों की तस्वीरें भी शामिल थीं।
भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बाल सुरक्षा के लिए किस कानून के तहत जवाबदेह हैं?
भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत शासित होते हैं। ये नियम मध्यस्थों के लिए उचित सावधानी बरतने के दायित्व निर्धारित करते हैं।
क्या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी ऐसी कार्रवाई होगी?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि हानिकारक सामग्री की पहचान और उसे हटाने के लिए अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ भी बातचीत जारी है। जो प्लेटफॉर्म पर्याप्त सक्रिय उपाय नहीं अपनाते, उनके विरुद्ध कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
आई4सी क्या है और यह कैसे काम करता है?
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) केंद्र सरकार की एक संस्था है जो साइबर अपराधों से समन्वित तरीके से निपटने के लिए स्थापित की गई है। यह राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल का संचालन करती है, जहाँ नागरिक और अब मेटा जैसे प्लेटफॉर्म सीधे शिकायतें दर्ज करा सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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