5 जुलाई 2026
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इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण विज्ञापनों पर केंद्र सख्त, मेटा को 7 दिन में जवाब देने का नोटिस

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इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण विज्ञापनों पर केंद्र सख्त, मेटा को 7 दिन में जवाब देने का नोटिस

सारांश

केंद्र सरकार ने इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण सामग्री के पेड विज्ञापनों को लेकर मेटा को 7 दिन का अल्टीमेटम दिया है। यह कदम व्हाट्सऐप यूज़रनेम फ़ीचर विवाद के बीच आया है और भारत में बड़ी टेक कंपनियों पर नियामकीय दबाव के बढ़ते दौर का संकेत है।

मुख्य बातें

MeitY ने 5 जुलाई 2025 को मेटा को इंस्टाग्राम पर CSAM विज्ञापनों को लेकर सख्त नोटिस जारी किया।
मेटा को 7 दिनों के भीतर विस्तृत जवाब देने और सभी संबंधित कंटेंट व विज्ञापन हटाने का निर्देश दिया गया है।
सरकार मेटा की कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली और विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया का ब्यौरा भी माँग सकती है।
खबर लिखे जाने तक मेटा की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया था।
व्हाट्सऐप यूज़रनेम फ़ीचर पर भी सरकार ने अस्थायी रोक लगाई है; मेटा ने 3 दिन का समय माँगा था।

केंद्र सरकार ने 5 जुलाई 2025 को इंस्टाग्राम पर पेड विज्ञापनों के ज़रिए बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार सामग्री (CSAM) के प्रसार को लेकर मेटा को कड़ा नोटिस जारी किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मेटा से सात दिनों के भीतर विस्तृत जवाब माँगा है और ऐसे सभी विज्ञापनों व कंटेंट को तत्काल हटाने का निर्देश दिया है।

मुख्य घटनाक्रम

सूत्रों के अनुसार, MeitY ने मेटा से यह स्पष्ट करने को कहा है कि इंस्टाग्राम पर CSAM को बढ़ावा देने वाले या उस तक पहुँच आसान बनाने वाले विज्ञापन किस प्रकार प्रसारित हुए। मंत्रालय ने यह भी जानना चाहा है कि ऐसे विज्ञापनों को रोकने के लिए प्लेटफ़ॉर्म की ओर से क्या ठोस कदम उठाए गए।

सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय मेटा की कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली, विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया और अवैध एवं हानिकारक सामग्री के विरुद्ध उठाए गए उपायों का विस्तृत ब्यौरा भी माँग सकता है। खबर लिखे जाने तक मेटा की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।

व्हाट्सऐप यूज़रनेम विवाद से जुड़ा संदर्भ

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत सरकार ने हाल ही में व्हाट्सऐप के नए यूज़रनेम फ़ीचर के रोलआउट पर अस्थायी रोक लगाई थी। इसके बाद मेटा की टीम ने MeitY के अधिकारियों से मुलाकात कर विस्तृत जवाब देने के लिए तीन दिनों का समय माँगा, जिसके बाद मंत्रालय ने नोटिस जारी किया।

व्हाट्सऐप ने अपने यूज़रनेम फ़ीचर को लेकर स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह वैकल्पिक होगा और किसी भी यूज़र के लिए इसे अपनाना अनिवार्य नहीं रहेगा। कंपनी ने कहा कि पहचान की चोरी, ऑनलाइन धोखाधड़ी और अनचाहे संपर्क जैसी समस्याओं से बचाव के लिए कई सुरक्षा उपाय पहले से जोड़े गए हैं। इंस्टाग्राम, फ़ेसबुक और मेटा वेरिफ़ाइड अकाउंट्स के मौजूदा यूज़रनेम सुरक्षित रखे गए हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया और माँगें

MeitY ने मेटा को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इंस्टाग्राम पर CSAM से संबंधित कोई भी पेड विज्ञापन या कंटेंट बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि भविष्य में ऐसी सामग्री प्लेटफ़ॉर्म पर न आ सके, इसके लिए मेटा की नीतिगत व तकनीकी व्यवस्था की जाँच की जाएगी।

आम जनता और बच्चों की सुरक्षा पर असर

गौरतलब है कि CSAM से जुड़े विज्ञापनों का इंस्टाग्राम जैसे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले प्लेटफ़ॉर्म पर दिखना बाल सुरक्षा के लिहाज़ से अत्यंत गंभीर मामला है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर नियामकीय दबाव लगातार बढ़ रहा है।

क्या होगा आगे

मेटा को दिए गए सात दिनों के भीतर जवाब न मिलने पर सरकार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई का विकल्प खुला रखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भारत में बड़ी टेक कंपनियों की जवाबदेही और कंटेंट मॉडरेशन मानकों की व्यापक बहस को और तेज़ करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

यूरोपीय संघ और ऑस्ट्रेलिया सभी इसी दिशा में सख्त कदम उठा रहे हैं। भारत का यह कदम सिर्फ एक नोटिस नहीं है; यह संकेत है कि सरकार अब IT अधिनियम की धारा 79 की 'सेफ हार्बर' सुरक्षा की सीमाओं को परखने के लिए तैयार है। असली सवाल यह है कि क्या मेटा की कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली में इतनी खामियाँ हैं कि CSAM विज्ञापन पेड फ़ॉर्मेट में पास हो सके — यदि हाँ, तो यह तकनीकी विफलता नहीं, नीतिगत विफलता है।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्र सरकार ने मेटा को नोटिस क्यों जारी किया?
इंस्टाग्राम पर पेड विज्ञापनों के ज़रिए बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार सामग्री (CSAM) के प्रसार को लेकर MeitY ने मेटा को 5 जुलाई 2025 को सख्त नोटिस जारी किया। सरकार ने ऐसे सभी विज्ञापन तत्काल हटाने और 7 दिनों में विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया है।
मेटा को कितने दिनों में जवाब देना है?
MeitY ने मेटा को नोटिस जारी होने की तारीख से 7 दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। इस दौरान मेटा को अपनी कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली और विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया का पूरा ब्यौरा भी सौंपना होगा।
CSAM क्या होता है और यह इतना गंभीर मामला क्यों है?
CSAM यानी Child Sexual Abuse Material — बच्चों के यौन शोषण या दुर्व्यवहार को दर्शाने वाली कोई भी सामग्री। इसका किसी भी प्लेटफ़ॉर्म पर प्रसार भारतीय दंड संहिता और POCSO अधिनियम के तहत गंभीर अपराध है, और पेड विज्ञापनों के ज़रिए इसका प्रसार प्लेटफ़ॉर्म की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाता है।
व्हाट्सऐप यूज़रनेम फ़ीचर का इस मामले से क्या संबंध है?
यह घटनाक्रम उस समय आया है जब सरकार ने व्हाट्सऐप के यूज़रनेम फ़ीचर के रोलआउट पर अस्थायी रोक लगाई थी। मेटा की टीम ने MeitY अधिकारियों से मिलकर 3 दिन का समय माँगा, जिसके बाद मंत्रालय ने CSAM विज्ञापनों पर यह नोटिस जारी किया — दोनों मामले मेटा और भारत सरकार के बीच चल रहे नियामकीय तनाव के हिस्से हैं।
अगर मेटा जवाब नहीं देता तो क्या होगा?
यदि मेटा निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं देता, तो सरकार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई कर सकती है, जिसमें प्लेटफ़ॉर्म की 'सेफ हार्बर' सुरक्षा वापस लेना या अन्य दंडात्मक उपाय शामिल हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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