इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण विज्ञापनों पर केंद्र सख्त, मेटा को 7 दिन में जवाब देने का नोटिस
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 5 जुलाई 2025 को इंस्टाग्राम पर पेड विज्ञापनों के ज़रिए बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार सामग्री (CSAM) के प्रसार को लेकर मेटा को कड़ा नोटिस जारी किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मेटा से सात दिनों के भीतर विस्तृत जवाब माँगा है और ऐसे सभी विज्ञापनों व कंटेंट को तत्काल हटाने का निर्देश दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
सूत्रों के अनुसार, MeitY ने मेटा से यह स्पष्ट करने को कहा है कि इंस्टाग्राम पर CSAM को बढ़ावा देने वाले या उस तक पहुँच आसान बनाने वाले विज्ञापन किस प्रकार प्रसारित हुए। मंत्रालय ने यह भी जानना चाहा है कि ऐसे विज्ञापनों को रोकने के लिए प्लेटफ़ॉर्म की ओर से क्या ठोस कदम उठाए गए।
सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय मेटा की कंटेंट मॉडरेशन प्रणाली, विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया और अवैध एवं हानिकारक सामग्री के विरुद्ध उठाए गए उपायों का विस्तृत ब्यौरा भी माँग सकता है। खबर लिखे जाने तक मेटा की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।
व्हाट्सऐप यूज़रनेम विवाद से जुड़ा संदर्भ
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत सरकार ने हाल ही में व्हाट्सऐप के नए यूज़रनेम फ़ीचर के रोलआउट पर अस्थायी रोक लगाई थी। इसके बाद मेटा की टीम ने MeitY के अधिकारियों से मुलाकात कर विस्तृत जवाब देने के लिए तीन दिनों का समय माँगा, जिसके बाद मंत्रालय ने नोटिस जारी किया।
व्हाट्सऐप ने अपने यूज़रनेम फ़ीचर को लेकर स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह वैकल्पिक होगा और किसी भी यूज़र के लिए इसे अपनाना अनिवार्य नहीं रहेगा। कंपनी ने कहा कि पहचान की चोरी, ऑनलाइन धोखाधड़ी और अनचाहे संपर्क जैसी समस्याओं से बचाव के लिए कई सुरक्षा उपाय पहले से जोड़े गए हैं। इंस्टाग्राम, फ़ेसबुक और मेटा वेरिफ़ाइड अकाउंट्स के मौजूदा यूज़रनेम सुरक्षित रखे गए हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और माँगें
MeitY ने मेटा को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इंस्टाग्राम पर CSAM से संबंधित कोई भी पेड विज्ञापन या कंटेंट बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि भविष्य में ऐसी सामग्री प्लेटफ़ॉर्म पर न आ सके, इसके लिए मेटा की नीतिगत व तकनीकी व्यवस्था की जाँच की जाएगी।
आम जनता और बच्चों की सुरक्षा पर असर
गौरतलब है कि CSAM से जुड़े विज्ञापनों का इंस्टाग्राम जैसे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले प्लेटफ़ॉर्म पर दिखना बाल सुरक्षा के लिहाज़ से अत्यंत गंभीर मामला है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर नियामकीय दबाव लगातार बढ़ रहा है।
क्या होगा आगे
मेटा को दिए गए सात दिनों के भीतर जवाब न मिलने पर सरकार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई का विकल्प खुला रखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भारत में बड़ी टेक कंपनियों की जवाबदेही और कंटेंट मॉडरेशन मानकों की व्यापक बहस को और तेज़ करेगा।