मेटा से संसदीय समिति का अल्टीमेटम: जुकरबर्ग 3 दिन में माफी मांगें, वरना IT एक्ट की धारा 79 सुरक्षा होगी वापस
सारांश
मुख्य बातें
संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने 5 अगस्त 2026 को मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग को कड़ा अल्टीमेटम जारी किया है — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से 5 से 6 घंटे तक हटाए जाने के मामले में तीन दिनों के भीतर बिना शर्त माफी मांगी जाए। समिति ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव को पत्र भेजकर चेतावनी दी है कि माफी न मिलने पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3) के तहत मेटा को मिली कानूनी सुरक्षा वापस ली जा सकती है।
मामला क्या है
विवाद उस वीडियो को लेकर है जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों और जेनरेशन Z को संबोधित करते हुए परीक्षा संबंधी विवादों और पेपर लीक के खिलाफ सरकार की कार्रवाई पर चर्चा की थी। रिपोर्टों के अनुसार यह वीडियो फेसबुक पर लगभग 5 से 6 घंटे तक दिखाई नहीं दिया। 3 अगस्त 2026 को आयोजित समिति की बैठक में गृह मंत्रालय, MeitY और स्नैपचैट, गूगल, एक्स, मेटा तथा यूट्यूब के प्रतिनिधि शामिल हुए थे।
समिति की चेतावनी
लोकसभा सचिवालय में निदेशक ए. ज्योतिर्मयी द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि पत्र प्राप्ति के तीन दिनों के भीतर जुकरबर्ग बिना शर्त माफी नहीं मांगते, तो IT अधिनियम की धारा 79(3) के तहत प्राप्त संरक्षण और कानूनी छूट वापस लेने पर विचार किया जाएगा और मेटा के विरुद्ध प्रकाशक के रूप में कार्रवाई की जा सकती है। यह धारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को तृतीय-पक्ष कंटेंट के लिए दायित्व से बचाती है — इसे वापस लेना मेटा के भारतीय परिचालन के लिए कानूनी रूप से गंभीर परिणाम ला सकता है।
मेटा की प्रतिक्रिया
इस बीच, मेटा की उच्चस्तरीय टीम — जिसकी अगुवाई चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान ने की — ने 5 अगस्त को MeitY सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की। यह बैठक लगभग 45 मिनट तक चली, जिसमें मेटा के अधिकारियों ने वीडियो को गलती से हटाए जाने के पीछे के कारण स्पष्ट किए। रिपोर्टों के अनुसार मेटा के अधिकारी उसी दिन सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से भी मुलाकात करने वाले थे।
जवाबदेही और व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर लगातार सख्त रुख अपना रही है। गौरतलब है कि IT अधिनियम की धारा 79 के तहत मिली 'सेफ हार्बर' सुरक्षा वह ढाल है जिस पर मेटा, गूगल और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म भारत में अपने कंटेंट-मॉडरेशन निर्णयों के लिए निर्भर रहते हैं। समिति का यह कदम — प्रधानमंत्री से जुड़े कंटेंट के संदर्भ में — इस सुरक्षा की सीमाओं को लेकर एक नई बहस छेड़ सकता है।
आगे क्या होगा
अब सभी की नज़रें मेटा की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर हैं। यदि जुकरबर्ग निर्धारित समय-सीमा में माफी नहीं मांगते, तो सरकार के पास IT अधिनियम के तहत कार्रवाई का विकल्प खुला रहेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला भारत में बिग-टेक विनियमन की दिशा तय करने में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।